डॉ. शिखा जैन, उनके पति डॉ. गौरव जैन द्वारा 29 श्रीराम कॉलोनी शिवपुरी में अवैध रूप से सी.एम.एच.ओ. कार्यालय शिवपुरी में पंजीयन / लायसेन्स / लिये बिना क्लीनिक का संचालन किया जा रहा है। पर्चे A/5, A/6 एवं A/7 पर क्लीनिक के लायसेन्स / पंजीयन संबंधी विवरण अंकित नहीं है। सी.एम.एच.ओ. कार्यालय से क्लीनिक का लायसेन्स / पंजीयन लिये बिना क्लीनिक संचालित करना म.प्र. रूजोपचार एवं उपचर्या अधिनियम का उल्लंघन होकर दण्डनीय अपराध है। डॉ शिखा जैन के विरूद्ध उपचर्या अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए अवैध क्लीनिक सीलबन्द किया जावे एवं सक्षम न्यायालय में अवैध क्लीनिक चलाये जाने के अपराध के संबंध परिवाद पत्र प्रस्तुत कर दंडित कराया जावे।
डॉ शिखा जैन द्वारा प्रार्थी की पत्नी श्रीमती निधि अग्रवाल को डिलेवरी हेतु दिनांक 28.03.2026 को निजी हॉस्पीटल में भर्ती किया था और सिजेरियन डिलेवरी 28.03.2026 के 08:40 बजे प्रातः की गई थी। शासकीय ड्यूटी के समय एवं शासकीय चिकित्सक होते हुए निजी हॉस्पीटल में सर्जरी करना शासकीय सेवाओं एवं म.प्र. रूजोपचार एवं उपचर्या अधिनियम के नियमों का उल्लंघन है। डॉ शिखा जैन ने उक्त हॉस्पीटल में प्रार्थी की पत्नी श्रीमती निधि अग्रवाल की दिनांक 28.03.2026 को प्रातः 09:00 बजे सिजेरियन डिलेवरी करायी थी। डॉ. शिखा जैन 10:00 बजे सिजेरियन डिलेवरी के पश्चात रोगी को छोड़कर चली गई। उक्त हॉस्पीटल में अन्य कोई महिला रोग चिकित्सक मौजूद नहीं थी, रोगी को हो रही समस्याओं एवं ब्लीडिंग तथा यूरिन न आने की शिकायत होते हुए रोगी को देखने एवं उपचार करने के लिये डॉ शिखा जैन बुलाने पर भी नहीं आयीं। कई बार बुलाये जाने पर रात्रि 07:45 बजे आई और रोगी को सामान्य समस्याऐं होना बताते हुए चली गयीं, लगभग 12 घण्टे तक डॉ शिखा जैन ने रोगी के पास विजिट नहीं की, जिस कारण रोगी की किडनी फैल होने लगी। रोगी की हालत विगड़ने और नियंत्रण से बाहर होने पर रात्रि 02-03:00 बजे रोगी को मेडीकल कॉलेज शिवपुरी डॉ शिखा जैन द्वारा अपने अण्डर में शिफ्ट किया गया था। निजी हॉस्पीटल से प्राप्त उपचार की फाईल संयुक्त रूप से अनेग्जर A/8 है, रोगी का मेडीकल कॉलेज द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र अनेग्जरA/9 है, मेडीकल कॉलेज की उपचार की फाईल अनेग्जर A/10 है। हॉस्पीटल द्वारा रोगी को यूरिन न आने की समस्या होने पर भी नैफरोलॉजिस्ट को परामर्श हेतु नहीं बुलाया, जिससे किडनी पेशाव आना बन्द हो गयी और रोगी श्रीमती निधि अग्रवाल की किडनी फैल हो गयी। रोगी की मेडीकल कॉलेज में भर्ती होने के 4-5 घण्टे बाद ही श्रीमती निधि अग्रवाल की मृत्यु हो गयी। डॉ शिखा जैन ने रोगी के उपचार में लापरवाही को छुपाने के लिये अपने मन से मेडीकल कॉलेज में रोगी की पेसेन्ट सीट तैयार कर HELLP Syndrome होना बताया गया। यदि रोगी को डिलेवरी से पूर्व HELLP Syndrome था तो उसका उपचार नहीं किया गया और रोगी के डिलेवरी के पश्चात 12 घण्टे तक न देखकर उपचार में लापरवाही की गयी, जिससे रोगी की मृत्यु हुई। डिलेवरी के पश्चात पोस्ट ऑपरेटिव केयर करने में डॉ शिखा जैन एवं हॉस्पीटल के संचालक असफल रहे, उपचार में लापरवाही के कारण रोगी की मृत्यु हुई है।
कुलमिलाकर गगन अग्रवाल ने कलेक्टर से निवेदन किया है कि डॉ शिखा जैन, डॉ. आर.पी. सिंह एवं हॉस्पीटल के संचालक / लायसेंन्सी के विरूद्ध अवैध रूप से रोगी के उपचार में शासकीय चिकित्सकों की निजी हॉस्पीटल में सेवाये लेने, सिजेरियन डिलेवरी एवं पोस्ट ऑपरेटिव केयर में लापरवाही किये जाने के संबंध में दोषी चिकित्सकगण एवं हॉस्पीटल के विरूद्ध हॉस्पीटल का लायसेंस / पंजीयन निरस्ती की कार्यवाही की जावे एवं शासकीय चिकित्सकों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संस्थित कर दंडित कर प्रार्थी को न्याय प्रदान किया जावे।













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