दोपहर के समय गुलमर्ग गोंडोला के दूसरे चरण (फेज-2) में अचानक एक तकनीकी खराबी आ गई। इसके चलते केबल कार का संचालन पूरी तरह ठप हो गया और दर्जनों केबिन बीच हवा में ही रुक गए। ऊंचाई पर तेज हवाओं और कड़ाके की ठंड के बीच केबिनों में बंद पर्यटकों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, की सांसें अटक गईं। घटना की सूचना मिलते ही भारतीय सेना की स्थानीय विंग, जम्मू-कश्मीर पुलिस, SDRF और NDRF की टीमें तुरंत एक्शन में आ गईं।देवदूत बनकर पहुंचे जवान:
हवा में जांबाजी:
जवानों ने अत्यधिक ऊंचाई और दुर्गम रास्तों की परवाह न करते हुए रस्सियों और आपातकालीन सीढ़ियों के सहारे केबिनों तक पहुंच बनाई।
सांत्वना और सुरक्षा:
फंसे हुए घबराए पर्यटकों का हौसला बढ़ाते हुए सेना के जांबाजों ने एक-एक कर सभी 300 पर्यटकों को सुरक्षित जमीन पर उतारा। पर्यटकों ने जताया सेना का आभारसुरक्षित रेस्क्यू किए जाने के बाद कई पर्यटकों की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने भारतीय सेना के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। पर्यटकों का कहना था कि अगर सेना के जवान सही समय पर त्वरित कार्रवाई नहीं करते, तो अत्यधिक ऊंचाई और ठंड के कारण उनकी जान पर बन सकती थी। सोशल मीडिया पर भी लोग सेना के इस रेस्क्यू ऑपरेशन के वीडियो साझा कर जवानों की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश
इस गंभीर घटना पर संज्ञान लेते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रेस्क्यू टीम की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर जानकारी दी कि सभी पर्यटक पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस तकनीकी खराबी के कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में पर्यटकों की सुरक्षा के साथ ऐसा कोई खिलवाड़ न हो। सुरक्षा ऑडिट पूरा होने और तकनीकी खराबी पूरी तरह ठीक होने तक गुलमर्ग गोंडोला सेवा को अस्थायी रूप से बंद रखा गया है।
भारत के प्रमुख रोपवे हादसे
1. देवघर रोपवे हादसा (10 अप्रैल 2022)
झारखंड के देवघर स्थित त्रिकूट पर्वत पर रोपवे ट्रॉलियां बीच हवा में फंस गई थीं। 3 दिनों के दौरान करीब 48 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। भारतीय वायुसेना ने हेलिकॉप्टर से कई लोगों को निकाला। कुल 47 लोगों का बचाया गया। 3 लोगों की मौत हो गई थी।
2. गुलमर्ग गोंडोला हादसा (23 अप्रैल 2017)
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग गोंडोला में तेज हवाओं के कारण एक पेड़ गिरकर केबल से टकरा गया, जिससे कई केबिन प्रभावित हुए। एक केबिन में सवार सात लोग करीब 100 फीट नीचे गिर गए। हादसे में सबकी मौत हो गई थी।
3. दार्जिलिंग रोपवे हादसा (19 अक्टूबर 2003)
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में रंगीत रोपवे की तीन केबल कारें केबल से अलग होकर लगभग 50-60 फीट नीचे घाटी में गिर गईं। इस हादसे में तीन महिलाओं और एक बच्चे सहित कुल 4 पर्यटकों की मौत हो गई थी, जबकि 11 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
गुलमर्ग रोपवे दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा केबल रोपवे
गुलमर्ग रोपवे एशिया का सबसे ऊंचा और सबसे लंबा केबल कार है। यह दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा केबल कार है। इसकी अधिकतम ऊंचाई करीब 3,980 मीटर है।
यह गुलमर्ग से कोंगडोरी होते हुए अफरवात पीक तक जाता है। यह देश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है और गर्मियों में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। यहां से बर्फीली चोटियों के शानदार नजारे दिखाई देते हैं।
दुनिया का सबसे ऊंचा गोंडोला चीन का डागू ग्लेशियर गोंडोला है। यह सिचुआन प्रांत के डागू ग्लेशियर नेशनल पार्क में स्थित है और इसकी ऊंचाई करीब 4,860 मीटर है। यह केबल कार कुछ ही मिनटों में पर्यटकों को बर्फ से ढके ग्लेशियर टॉप तक पहुंचाती है।
दूसरे नंबर पर वेनेजुएला का मेरिडा केबल कार आता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 4,765 मीटर है। यह मेरिडा शहर को पिको एस्पेजो पर्वत से जोड़ता है और एंडीज पर्वतमाला का नजारा दिखाता है।
गुलमर्ग गोंडोला में 24 घंटे में दूसरी बार तकनीकी खराबी
सूत्रों के मुताबिक, गुलमर्ग गोंडोला में रविवार को भी तकनीकी गड़बड़ी आई थी, हालांकि मरम्मत के बाद सोमवार को सेवा दोबारा शुरू कर दी गई थी। 24 घंटे के भीतर दूसरी बार फिर से तकनीकी खराबी आ गई, जिससे सैकड़ों पर्यटक फंस गए।
इससे पहले गुलमर्ग गोंडोला में 25 जून 2017 को हादसा हुआ था। तेज आंधी के दौरान एक पेड़ गोंडोला की केबल लाइन पर गिर गया। इससे एक केबिन जोर से झूलने लगा और उसके शीशे टूट गए। केबिन में सवार लोग करीब 100 फीट नीचे गिर गए, जिससे सात लोगों की मौत हो गई थी।
अमित शाह ने रेस्क्यू टीमों की सराहना की
घटना को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने X पर पोस्ट के जरिए रेस्क्यू टीमों की सराहना की। शाह ने कहा कि 65 केबल कार केबिनों में फंसे यात्रियों को निकालने के लिए करीब 6 घंटे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। बचाव दलों के साहस और कौशल पर पूरा देश गर्व करता है।
इससे पहले जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी घटना को लेकर पोस्ट किया था। उन्होंने कहा- सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सभी केबिन और उसमें फंसे पर्यटक सुरक्षित हैं। घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा था- केबल कार के केबिनों में फंसे पर्यटकों के रेस्क्यू ऑपरेशन पर मैं नजर रख रहा हूं। मैंने DGP को घटनास्थल पर जाने का निर्देश दिया है। पुलिस, सेना, SDRF, डीसी और SSP की जॉइंट टीम मौके पर मौजूद है।














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