सरकार का रुख और कोर्ट का फैसलाजस्टिस अवनीश झिंगन की बेंच के सामने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा. उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) द्वारा दी गई 5 जून की डेडलाइन केवल क्लब को स्वेच्छा से जमीन सौंपने का एक विकल्प थी, न कि बलपूर्वक कब्जा लेने की तारीख।
अंतरिम रोक से कोर्ट का इनकार:
सरकार के इस लिखित आश्वासन और हलफनामे के वादे के बाद, कोर्ट ने केंद्र के आदेश पर किसी भी प्रकार की अंतरिम रोक लगाने की जरूरत नहीं समझी.
केंद्र सरकार को समन:
दिल्ली हाई कोर्ट ने क्लब के सदस्यों और कर्मचारी संघ द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को समन जारी किया है और 8 हफ्तों के भीतर इस पर जवाब मांगा है।
मुआवजे और जमीन का विकल्प:
सरकार ने बताया कि मूल लीज डीड के क्लॉज 4 के तहत मुआवजे का प्रावधान मौजूद है. इसके तहत क्लब को आर्थिक मुआवजा या फिर अपनी गतिविधियों को चलाने के लिए दिल्ली में ही दूसरी जगह वैकल्पिक जमीन दी जा सकती है। आखिर क्यों खाली कराना चाहती है सरकार?
केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने 22 मई 2026 को क्लब की लीज को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था.
राष्ट्रीय सुरक्षा:
सैन्य बुनियादी ढांचा:
सरकार का तर्क है कि देश के रक्षा बुनियादी ढांचे (Defence Infrastructure) को मजबूत और सुरक्षित करने के लिए तथा अन्य महत्वपूर्ण सरकारी परियोजनाओं के लिए इस जमीन की तात्कालिक जरूरत है। भारी-भरकम बकाया:
रिपोर्टों के अनुसार, लीज रद्द करने के आदेश से पहले क्लब पर मूल किराए के अलावा करोड़ों रुपये का बकाया भी बताया गया है।
क्लब की दलील:
'600 परिवारों की रोजी-रोटी का संकट' क्लब के सदस्यों और कर्मचारी संघ की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में पैरवी की. क्लब का कहना है कि सरकार का यह फैसला अचानक और मनमाना है. यदि बिना किसी ठोस विकल्प के इस 113 साल पुराने ऐतिहासिक क्लब को बंद किया गया, तो वहां काम कर रहे करीब 600 कर्मचारियों की आजीविका और उनके परिवारों पर सीधा संकट आ जाएगा. साथ ही, इसके 14,000 से अधिक रसूखदार सदस्यों (जिनमें रिटायर्ड जज, सैन्य अधिकारी, राजनेता और नौकरशाह शामिल हैं) की यादें और सामाजिक दायरा इससे प्रभावित होगा। ब्रिटिश काल से सत्ता के गलियारों तक का सफर
साल 1913 में 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' के रूप में शुरू हुआ यह संस्थान भारत के इतिहास और सत्ता परिवर्तन का जीवंत गवाह रहा है. कनॉट प्लेस के मुख्य आर्किटेक्ट रॉबर्ट टोर रसेल द्वारा डिजाइन किया गया यह क्लब देश के सबसे रसूखदार लोगों का पसंदीदा अड्डा माना जाता रहा है, जहां मेंबरशिप मिलना भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होता।
यहाँ दिल्ली जिमखाना क्लब से जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प, अनसुनी और 'चटपटी' बातें दी गई हैं, जो इसके रसूख और इतिहास को बयां करती हैं:
सालों लंबी वेटिंग लिस्ट:
इस क्लब की मेंबरशिप पाना देश में सबसे मुश्किल कामों में से एक है। आम लोगों के लिए इसकी वेटिंग लिस्ट 15 से 30 साल तक लंबी होती है। कई बार लोग अपने बच्चों का नाम बचपन में ही लिखवा देते हैं ताकि जवानी तक उन्हें मेंबरशिप मिल सके!
रसूखदारों का 'पॉवर सेंटर':
यह केवल एक क्लब नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों का एक बड़ा केंद्र है। इसके 14,000 से ज्यादा सदस्यों में देश के पूर्व प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, सेना के टॉप कमांडर और बड़े-बड़े ब्यूरोक्रेट्स शामिल हैं।
ब्रिटिश दौर की 'क्लास' और 'रेसिज्म': साल 1913 में जब यह बना, तब इसका नाम 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' था। ब्रिटिश काल में यहाँ भारतीयों की एंट्री पर सख्त पाबंदी थी। आजादी के बाद इसके नाम से 'इंपीरियल' शब्द तो हटा दिया गया, लेकिन इसका शाही अंदाज आज भी कायम है।
सख्त 'ड्रेस कोड' का टशन:
यहाँ आज भी ब्रिटिश जमाने के कड़े नियम और ड्रेस कोड लागू हैं। आप यहाँ बिना कॉलर वाली टी-शर्ट, स्पोर्ट्स शूज (सिर्फ स्पोर्ट्स एरिया को छोड़कर) या कैजुअल चप्पल पहनकर नहीं घूम सकते। कई बार बड़े-बड़े नेताओं और हस्तियों को ड्रेस कोड न मानने पर गेट से ही लौटाया जा चुका है।
सस्ता और शानदार खाना:
जहाँ बाहर फाइव-स्टार होटलों में खाने का बिल हजारों में आता है, वहीं इस क्लब के अंदर सदस्यों को बेहद कम और सब्सिडी वाले दामों पर शानदार खाना, चाय-नाश्ता और ड्रिंक्स मिलती हैं। यहाँ का 'मटन समोसा' और 'क्लब सैंडविच' बेहद मशहूर हैं।
विवादों से पुराना नाता:
पिछले कुछ सालों में क्लब में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद (Nepotism) और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे थे। इसके बाद केंद्र सरकार ने साल 2021 में इसके पुराने मैनेजमेंट को हटाकर अपना सरकारी प्रशासक (Administrator) नियुक्त कर दिया था, जिसके बाद से ही सरकार और क्लब के पुराने लॉबी के बीच तनातनी चल रही है। दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास (Delhi Gymkhana Club History) केवल एक क्लब की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत के औपनिवेशिक इतिहास, सत्ता के हस्तांतरण और लुटियंस दिल्ली के निर्माण का एक जीवंत दस्तावेज है।
113 साल पुराने इस क्लब का गौरवशाली और शाही सफर निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं में सिमटा हुआ है:
स्थापना और शाही शुरुआत (1913) राजधानी बदलने का असर: ब्रिटिश काल में जब साल 1911 में किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी को कलकत्ता (अब कोलकाता) से दिल्ली शिफ्ट करने का ऐलान किया, तब ब्रिटिश अधिकारियों के मनोरंजन के लिए एक विशिष्ट सामाजिक केंद्र की जरूरत महसूस हुई।
इंपीरियल जिमखाना:
इसी जरूरत के तहत 3 जुलाई 1913 को इस क्लब की स्थापना की गई। तब इसका नाम 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' हुआ करता था।
पहले अध्यक्ष:
इसके पहले प्रेसिडेंट ब्रिटिश अधिकारी श्री स्पेंसर हारकोर्ट बटलर (Spencer Harcourt Butler) थे, जो तत्कालीन यूनाइटेड प्रॉविंस के गवर्नर भी रहे। शुरुआती ठिकाना:
शुरुआत में यह क्लब उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में 'कोरोनेशन ग्राउंड्स' के पास संचालित होता था। लुटियंस दिल्ली में नई रियासत (1928-1930 का दशक)27.3 एकड़ की जमीन: साल 1928 में जब नई दिल्ली (लुटियंस दिल्ली) का नक्शा तैयार हो रहा था, तब इस क्लब को सफदरजंग रोड पर 27.3 एकड़ जमीन एक 'परपेचुअल लीज' (अनंतकालीन पट्टे) पर मामूली किराए के साथ आवंटित की गई।
शानदार वास्तुकला:
क्लब की वर्तमान भव्य इमारत को मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टोर रसेल (Robert Tor Russell) ने डिजाइन किया था। रसेल वही शख्स हैं जिन्होंने दिल्ली का ऐतिहासिक कनॉट प्लेस (Connaught Place) और 'तीन मूर्ति हाउस' भी डिजाइन किया था।
शाही चंदा और स्विमिंग पूल:
1930 के दशक में भारत के वायसराय की पत्नी लेडी विलिंगडन ने क्लब में स्विमिंग पूल बनाने के लिए ₹21,000 का दान दिया था, जिसके सम्मान में वहां आज भी 'लेडी विलिंगडन स्विमिंग बाथ' की संगमरमर की पट्टिका लगी हुई है।
7 राजा बने आजीवन सदस्य:
क्लब के शाही रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके शुरुआती दौर में देश की 7 बड़ी रियासतों के महाराजा इसके लाइफटाइम मेंबर (आजीवन सदस्य) बने थे।
आजादी और 'इंपीरियल' से मुक्ति (1947)
नाम में बदलाव:
15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने के बाद, क्लब के नाम से औपनिवेशिक प्रतीक 'इंपीरियल' शब्द को हमेशा के लिए हटा दिया गया और इसका नया नाम 'दिल्ली जिमखाना क्लब' पड़ा।
रसूखदारों का नया अड्डा:
गोरों के जाने के बाद भारतीय शासक वर्ग, राजनेताओं, बड़े नौकरशाहों (IAS/IFS/IPS), सैन्य कमांडरों और जजों ने इस क्लब की कमान संभाली और यह आजाद भारत का नया 'पावर सेंटर' बन गया।
घास के कोर्ट का गौरव:
यह क्लब भारत में खेल, विशेष रूप से लॉन टेनिस के लिए काफी मशहूर रहा है। यहाँ घास के 26 टेनिस कोर्ट हैं, जो देश में किसी भी क्लब में सबसे ज्यादा हैं। यहाँ कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय (जैसे डेविस कप) टेनिस मुकाबले भी खेले जा चुके हैं। आजादी के बाद भी इस क्लब ने अपनी पुरानी ब्रिटिश परंपराओं और वीआईपी संस्कृति को बनाए रखा, जो आज 2026 में इसके अस्तित्व पर आए सबसे बड़े संकट (लीज रद्दीकरण और बेदखली नोटिस) के समय भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
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