बचाव दल के अनुसार, पानी से एक महिला का शव निकालते समय उन्हें काफी कठिनाई हुई, क्योंकि वह अपने बच्चे को सीने से कसकर लगाए हुए थी। बताया गया कि मां ने अपने करीब 4 साल के बेटे को इस तरह जकड़ रखा था कि दोनों को अलग करना मुश्किल हो रहा था।
इस दर्दनाक दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद लोग ही नहीं, बल्कि कैबिनेट मंत्री Rakesh Singh भी भावुक हो गए। हर किसी की आंखें नम हो गईं। यह घटना एक बार फिर मां के अटूट प्रेम और ममता की गहराई को दर्शाती है, जहां अंतिम क्षण तक उसने अपने बच्चे का साथ नहीं छोड़ा।
जिला प्रशासन ने किया खंडन
हालाकि उक्त फोटो को लेकर जबलपुर जिला प्रशासन ने कहा है कि इस फोटो का क्रूज हादसे से कोई संबंध नहीं है। बता दें कि ये फोटो आज देश भर की मीडिया रिपोर्ट्स की सुर्खियां बना है।
हादसे पर हादसे और जांच तक सिमटी जिम्मेदारी
प्रदेश में यह पहला हादसा नहीं है। इसी तरह की एक नाव शिवपुरी जिले के खनियाधाना तालाब में डूब गई थी। तब भी बड़े बड़े वादे किए गए थे, वोट, क्रूज चलवाएंगे लेकिन नतीजा सिफर, अब बरगी में बिना परमिशन डीजल क्रूज का संचालन हुआ वो भी बिना लाइफ़ जैकिट और तूफान की चार घंटे पहले जारी चेतावनी के बावजूद क्रूज पानी में कुलांचे भर रहा था। अब सरकार ने फिर जांच और दोषियों पर कार्रवाई को आगे कर दिया है। घटना के दोषी पायलेट और कुछ कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। मुआवजे की मरहम भी लगाई जा रही है लेकिन क्या वो लोग लौटकर आएंगे जिन्होंने आनंद के लिए क्रूज की सवारी की थी लेकिन नहीं जानते थे कि ये सफर मौत के मुहाने तक लेकर जाएगा। राहत, बचाव के इंतजाम के बिना आखिर कब तक नाव, vot, क्रूज का संचालन होता रहेगा।
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