शिवपुरी। करैरा नगर के समीप ग्राम खडीचा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास श्रीकृष्ण चन्द्र ठाकुर जी, वृन्दावन धाम द्वारा श्रद्धालुओं को अत्यंत भावपूर्ण और ज्ञानवर्धक कथा का रसपान कराया गया। दूसरे दिन की कथा में मुख्य रूप से राजा परीक्षित के जीवन प्रसंग, उनके श्राप तथा शुकदेव मुनि के आगमन का विस्तार से वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा व्यास श्री कृष्ण चन्द्र ठाकुर ने बताया कि पांडव वंश की रक्षा हेतु भगवान की कृपा से राजा परीक्षित का जन्म हुआ। उन्होंने धर्म और न्याय के मार्ग पर चलते हुए राज्य संचालन किया, किंतु एक ऋषि के अपमान के कारण उन्हें श्राप प्राप्त हुआ, जिससे उनके जीवन की दिशा ही बदल गई।
श्राप मिलने के बाद राजा परीक्षित द्वारा गंगा तट पर कथा श्रवण का निर्णय लिया, वहां ज्ञान व वैराग्य के प्रतीक शुकदेव मुनि का आगमन कथा का प्रमुख आकर्षण रहा। शुकदेव जी द्वारा सुनाई गई श्रीमद्भागवत कथा को जीवन के अंतिम समय में मोक्ष का सर्वोत्तम मार्ग बताया गया।
इस दौरान सृष्टि प्रकरण का भी विस्तार से वर्णन किया गया, जिसमें भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना का अद्भुत प्रसंग प्रस्तुत किया गया। उन्होंने आध्यात्मिक रहस्यों को सरल भाषा में समझाया गया। श्रीमद्भागवत कथा के व्यवस्थापक व जनसेवक हाकिम सिंह रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि द्वितीय दिवस की कथा का मूल संदेश यही रहा कि मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर प्रभु भक्ति में लीन होना चाहिए, जिससे जीवन के अंतिम क्षणों में भी भगवान की प्राप्ति संभव हो सके।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस में डूबकर कथा का आनंद लिया। आयोजन समिति द्वारा व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं।













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