क्यों अड़े हैं दूधिए?
दाम बढ़ाने की मांग: दूधिया संघ का कहना है कि पशु आहार, खल और चारे की बढ़ती कीमतों के कारण दूध उत्पादन की लागत काफी बढ़ गई है। ₹55 प्रति लीटर की जिद: स्थानीय दूधिए वर्तमान रेट से करीब 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर ₹55 प्रति लीटर का भाव मांग रहे हैं, जिस पर शहर के निजी डेयरी संचालक और व्यापारी राजी नहीं हैं।सप्लाई रोकी: मांगें पूरी न होने तक दूधियों ने चिंताहरण मंदिर पर बैठक कर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा और शहर में दूध न लाने का कड़ा फैसला किया।
'सांची' ने संकट को किया कम
शहर में अचानक दूध की किल्लत होते ही प्रशासन और ग्वालियर सहकारी दुग्ध संघ (जिसके अंतर्गत शिवपुरी क्षेत्र आता है) तुरंत एक्शन मोड में आ गए।अतिरिक्त काउंटर खोले: सांची ने शहर के प्रमुख चौराहों, पार्कों और सांची पार्लरों पर सुबह से ही दूध के पैकेटों का अतिरिक्त स्टॉक भिजवाना शुरू कर दिया।
पार्लरों पर लंबी कतारें:
हालांकि निजी डेयरियां सूनी पड़ी रहीं, लेकिन सांची के केंद्रों पर पाश्चुरीकृत थैली वाले दूध (सांची गोल्ड, शक्ति, ताजा) को खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
दूध संकट बहुत हद तक नियंत्रित:
सांची द्वारा की गई इस त्वरित और सुचारू सप्लाई की बदौलत शहर के अस्पतालों, बच्चों और आम परिवारों को समय पर दूध मिल सका, जिससे हड़ताल का बड़ा असर बेअसर हो गया।
हाल ही में सांची ने बढ़ाया है किसानों का दाम
उल्लेखनीय है कि निजी बाजार में जारी खींचतान के बीच ग्वालियर सहकारी दुग्ध संघ (सांची) ने 21 मई 2026 से ही अपने दुग्ध उत्पादकों के लिए दूध क्रय दर को बढ़ाकर ₹840 प्रति किलोग्राम फैट कर दिया है। सांची प्रबंधन के इस फैसले से शिवपुरी जिले के हजारों रजिस्टर्ड पशुपालक किसान काफी खुश हैं और वे सांची को लगातार दूध की सप्लाई दे रहे हैं, जिसके कारण सांची के पास स्टॉक की कोई कमी नहीं रही।
वर्तमान स्थिति:
शहर में निजी दूधियों की हड़ताल को लेकर प्रशासनिक अधिकारी दोनों पक्षों (दूधिया संघ और डेयरी संचालक) के बीच समझौता कराने का प्रयास कर रहे हैं। जब तक गतिरोध नहीं टूटता, तब तक नागरिकों के लिए सांची दूध ही एकमात्र और सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है।
जनता का फूटा गुस्सा: "हर साल का नाटक बन गई है दूधियों की हड़ताल, पहले ही आसमान छू रहे हैं दाम"
दूधियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन अब आम जनता का धैर्य जवाब देने लगा है। शहर के अलग-अलग वार्डों और सांची पार्लरों पर दूध के लिए लाइन में खड़े नागरिकों ने दूधिया संघ के इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। आम उपभोक्ताओं का साफ कहना है कि दूध जैसी आवश्यक वस्तु को रोककर आम जनता को बंधक बनाना बिल्कुल गलत है और दूधियों को हर साल किसी न किसी बहाने हड़ताल करने की आदत पड़ चुकी है।
आम नागरिकों का क्या है कहना?
पहले से ही महंगे हैं दाम: शहर के पुरानी शिवपुरी और कोर्ट रोड इलाके के निवासियों का कहना है कि शिवपुरी में पहले से ही दूध के दाम आम आदमी के बजट से बाहर हैं। ऐसे में ₹10 प्रति लीटर की और बढ़ोतरी की मांग पूरी तरह नाजायज है।
हर साल का बन गया है ढर्रा:
लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर साल गर्मी के मौसम में दूधिया संघ लामबंद हो जाता है और कृत्रिम संकट पैदा करके दाम बढ़ाने का दबाव बनाता है।
बच्चों और बुजुर्गों पर आफत:
स्थानीय गृहणियों का कहना है कि घरों में छोटे बच्चों और बीमार बुजुर्गों के लिए दूध बेहद जरूरी है। इस भीषण गर्मी में दूध न मिलने से लोग परेशान हो रहे हैं।
प्रशासन से "स्थायी समाधान" की मांग
दूधियों के इस अड़ियल रुख को देखते हुए अब शिवपुरी की जनता ने जिला प्रशासन से इस समस्या का हमेशा के लिए हल निकालने की मांग की है:
मनमानी पर लगे रोक:
नागरिकों ने मांग की है कि प्रशासन दूधियों की इस मनमानी हड़ताल के खिलाफ सख्त कदम उठाए और दूध के दाम तय करने के लिए एक उचित सरकारी पैमाना तय करे।
सांची के बूथ बढ़ाए जाएं:
लोग इस बात से बेहद खुश हैं कि सांची डेयरी ने संकट के समय पूरा साथ दिया। अब जनता की मांग है कि शहर के उन अंदरूनी वार्डों में भी सांची के अस्थाई काउंटर खोले जाएं जहाँ लोगों को दूध के लिए दूर जाना पड़ रहा है।
जनता की दोटूक: "शिवपुरी में केवल सुबह क्यों आता है दूध? रात की क्रीम निकालकर बेच रहे दूधिए"
शिवपुरी में दूधियों की मनमानी को लेकर अब शहर का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
नागरिकों ने दूधिया संघ के उस स्याह पक्ष को उजागर किया है, जो पूरे प्रदेश में केवल शिवपुरी में ही देखने को मिलता है। जनता का कहना है कि शिवपुरी संभवतः एकमात्र ऐसा शहर है, जहां दूधिए सिर्फ सुबह ही दूध की सप्लाई करते हैं, शाम को गायब रहते हैं। इसके पीछे का जो सच सामने आया है, उसने आम जनता के साथ-साथ व्यापारियों को भी हैरान कर दिया है।
रात का दूध, क्रीम गायब: जनता ने खोली पोल
• केवल एक समय सप्लाई: आम नागरिकों का आरोप है कि दूधिए शाम को जानबूझकर दूध लेकर नहीं आते। वे रात के दूध को रोककर रखते हैं और मशीनों के जरिए उसकी पूरी क्रीम (मलाई) निकाल लेते हैं।
मलाई का डबल मुनाफा, जनता को पानी:
रात के दूध से महंगी क्रीम निकालकर उसे अलग से भारी दामों में बेचा जाता है। इसके बाद बिना फैट वाले उस पतले (क्रीम निकले) दूध को सुबह जनता के घरों में ऊंचे दामों पर खपाया जाता है। दाम पूरे और दूध पानी जैसा, यह खेल लंबे समय से जारी है।
डेयरी संचालक और मिठाई विक्रेता भी त्रस्त
• मनमानी से धंधा चौपट: दूधियों की इस एकतरफा व्यवस्था और हड़ताल से केवल आम उपभोक्ता ही
नहीं, बल्कि शहर के मिठाई विक्रेता और निजी डेयरी संचालक भी भारी घाटे में हैं।
• खोवा और मिठाई पर संकट: शादियों और गर्मी के सीजन में जब दूध व मावे की मांग सबसे ज्यादा होती है, तब दूधियों के इस अड़ियल रुख के कारण हलवाइयों का काम ठप होने की कगार पर है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा से जनता की गुहार: "कसिए शिकंजा, भरिए सैंपल"
शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और व्यापारियों ने नवगत कलेक्टर अर्पित वर्मा से इस बेलगाम
सिंडिकेट के खिलाफ तत्काल और सख्त एक्शन लेने की मांग की है:
• नियमित सैंपल जांच हो: जनता का कहना है कि प्रशासन को केवल हड़ताल खत्म कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अब समय आ गया है कि खाद्य सुरक्षा विभाग को सक्रिय कर इन दूधियों के दूध के नियमित सैंपल भरने की शुरुआत की जाए।
• मनमानी पर लगे परमानेंट ब्रेक: मिलावटखोरों और क्रीम निकालने वाले दूधियों पर जब तक भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक शिवपुरी की जनता को शुद्ध और पूरा दूध नहीं मिल सकेगा। कलेक्टर को इनकी अच्छे से खबर लेनी ही होगी।














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