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#धमाका_न्यूज: उर्वरकों की कालाबाजारी न हो, कलेक्टर अर्पित के सख्त निर्देश, किसानों को सलाह, एनपीके उर्वरक का करें उपयोग,प्राकृतिक खेती अपनाकर सुधारें मिट्टी की सेहत

बुधवार, 27 मई 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी, 27 मई 2026। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री अर्पित वर्मा ने उर्वरक वितरण एवं किसानों द्वारा खेतों में उपयोग किए जा रहे उर्वरक को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
उन्होंने निर्देश दिए हैं कि उर्वरक की कालाबाजारी नहीं होना चाहिए। एक ही डीलर के पास स्टॉक ना रहे। सभी डीलर्स को सही मात्रा में उर्वरक मिले जिससे किसानों को भी सही मात्रा में उर्वरक वितरण किया जा सके। किसी के द्वारा अवैध रूप से अधिक स्टॉक संचित ना हो, यह ध्यान रखा जाए। इसके अलावा कृषि विभाग के स्थानीय अमले द्वारा किसानों को उर्वरक के उपयोग को लेकर जागरूक किया जाए। बैठक में कृषि विभाग के उपसंचालक, कोऑपरेटिव बैंक, सहकारिता विभाग, मार्कफेड के अधिकारी मौजूद रहे।
किसानों को एनपीके उर्वरक उपयोग की सलाह
जिले के किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य सुधार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को कम कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार असंतुलित उर्वरकों के उपयोग से भूमि की उर्वरक क्षमता प्रभावित हो रही है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं तथा सॉइल हेल्थ कार्ड की वैज्ञानिक अनुशंसाओं के आधार पर ही नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करें। इससे खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए विभाग प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर दे रहा है। 
जैविक खेती की ओर बढ़ें किसान
किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत जैसी जैविक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई है। इन विधियों से मिट्टी में मौजूद मित्र कीट एवं सूक्ष्म जीव सुरक्षित रहते हैं, जिससे भूमि की जलधारण क्षमता और जैविक कार्बन में वृद्धि होती है।
कृषि विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों से करें संपर्क
कलेक्टर श्री अर्पित वर्मा ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करें तथा अपने खेतों के एक हिस्से में प्रायोगिक रूप से प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें। अधिक जानकारी एवं तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किसान अपने निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र या क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।














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