बड़े जतन से चौराहे लिए थे गोद अब भुला दिए गए
नगर में नामी गिरामी समाजसेवी संस्थाएं वैसे भी कोई ठोस काम कम ही करती हैं। अपने निजी हित या संस्था के ऊपर से थोपे जाने वाले लक्ष्य को पूरा करने के अलावा ये संस्थाएं यदा कदा किसी ठोस काम में शामिल होती हैं और उस काम को भी बाद में भुला देती हैं। आपको याद दिला दें कि उक्त रोटरी चौक को रोटरी क्लब ने नगर पालिका से गोद लिया था जबकि एमएम अस्पताल के पास वाले चौराहे को लायंस क्लब ने गोद लिया था। दोनों चौराहे अपनी साख बचाने को संघर्ष कर रहे हैं।
एक भी चौराहा ट्रैफिक के अनुकूल नहीं
शहर में स्टेटकालीन माधव चौक, अस्पताल चौराहा, कष्टम गेट को छोड़कर कोई भी चौराहा या तिराहा ट्रैफिक नियम के अनुरूप नहीं बना है। यानि कोई एक किनारे पर बना दिया गया है जबकि कोई किसी कोने में या इनके साइज छोटे करने से लोग चौराहे की परिक्रमा ट्रैफिक नियम से नहीं करते बल्कि रोंग साइड आते जाते हैं। उदाहरण के लिए अग्रसेन चौराहा, रोटरी चौक, लायंस चौक, बीटीपी चौक, फिजिकल पर परशुराम चौक, ग्वालियर बायपास स्थित चौक, गुना नाके का चौक, महाराणा प्रताप चौक, गुरुद्वारा चौक सहित जो भी चौराहे हैं उन्हें न्यू ले आउट के साथ बनाने की आवश्यकता है या फिर इनके आसपास स्थाई निर्माण करना या बेरीकेट करके नियम से ट्रैफिक चलाया जा सकता है।














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