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#धमाका_बड़ी_खबर: इंटरसिटी ट्रेवल्स की बस में इस तरह लगी भीषण आग, लोग बनाते रहे वीडियो, बस खाक, शिवपुरी के CA अभिषेक जैन के 4 वर्षीय मासूम बेटे अन्य की दर्दनाक मौत, 6 दमकल ने बुझाई आग, यात्रियों ने खिड़की, दरवाजे से भागकर बचाई जान

शनिवार, 16 मई 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शाजापुर/देवास। शाजापुर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर, मक्सी के पास होटल जैन पथ के सामने शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात इंदौर से ग्वालियर की ओर जा रही इंटरसिटी ट्रेवल्स की AC स्लीपर बस (MP-07 JL 9090) में भीषण आग लग गई। 
जिसमें शिवपुरी आजाक थाने के पास रहने वाले CA अभिषेक जैन के 4 वर्षीय बेटे अनय जैन की जिंदा जलने से मौत हो गई है। अभिषेक की शिवपुरी में दिनेश जैन के यहां ससुराल है उनकी पत्नी मिनी भी CA हैं जो इंदौर में प्रैक्टिस करती है, ये लोग शिवपुरी आ रहे थे।


होटल पर न रुकी होती बस तो....
बस होटल पर चाय-नाश्ते के लिए रुकी थी। यात्रियों के अनुसार बस में पहले से ही वायरिंग जलने की बदबू आ रही थी। तभी अचानक बोनट से धुआं निकला और पूरी बस आग की लपटों में घिर गई। मक्सी, तराना और
शाजापुर से आईं 5 दमकल गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। 
भगदड़ और हताहत
आग लगते ही यात्रियों में चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। अधिकांश यात्री नीचे उतर चुके थे या खिड़की तोड़कर बाहर निकले। लेकिन इस अफरा-तफरी के बीच शिवपुरी निवासी एक 4 साल का बच्चा बस के अंदर ही फंसा रह गया, जिसका बाद में सीट के नीचे से कंकाल मिला।पुलिस ने बच्चे के शव को जिला अस्पताल भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
यात्रियों की मानें तो बस में कोई इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन द्वार) नहीं था। फायर सेफ्टी यानि आग बुझाने के लिए बस के भीतर कोई अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) मौजूद नहीं था। उनका ये भी कहना है कि काश बस चाय पीने नहीं रुकी होती और चलती बस में आग लगती तो कई जान जा सकती थी। बस खड़ी थी कुछ यात्री जाग रहे थे, कुछ नीचे उतरे थे जिससे बड़ा जन हादसा टल गया। बता दें कि प्रदेश में रात्रि कालीन बसों में लगातार आग लगने की घटना सामने आ रही हैं लेकिन सरकार को न जाने कितनी और लाशों का इंतजार है! नियम कायदे ताक पर रखकर बसों का संचालन किया जा रहा है।
जेसीबी से कटी बस, तब मिला बच्चे का कंकाल
आग पर काबू पाने के बाद भी मासूम अन्य का कहीं पता नहीं चल रहा था। बच्चे को ढूंढने के लिए प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। मौके पर जेसीबी मशीन बुलाई गई, जिसके पंजे से बस के गेट और खिड़कियां तोड़ी गईं।
इसके बाद पीछे का रास्ता बनाने के लिए वेल्डिंग मिस्त्री को बुलाकर गेट कटवाया गया और सीटें हटाई गईं। करीब दो घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद एक सीट के नीचे से मासूम का कंकाल बरामद हुआ, जिसे पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल शाजापुर भेजा गया। बच्चे की मां ने कहा उसके बेटे को बचाने कोई नहीं आया सभी को अपनी जान की पड़ी थी।
पिता ने बचाई लोगों की जान, लाखों के गहने पुलिस को सौंपे
इस दुखद घड़ी में भी मासूम के पिता अभिषेक जैन ने इंसानियत की एक अभूतपूर्व मिसाल पेश की। जिस वक्त वो बस के मलबे में रोते-बिलखते अपने बेटे को ढूंढ रहे थे, उन्हें बस के अंदर किसी यात्री के गिरे हुए लाखों रुपए के सोने के जेवर मिले।
खुद का सब कुछ उजड़ जाने के बाद भी अभिषेक ने उन गहनों को तुरंत तराना टीआई रामचरण भदौरिया को सौंपा। इसके अलावा आग लगने के तुरंत बाद अभिषेक ने खुद की जान जोखिम में डालकर कई यात्रियों को भी सुरक्षित बाहर निकाला।
पहली फायर ब्रिगेड आई, उसमें पानी ही नहीं था: अभिषेक
अस्पताल में रोते-बिलखते हुए पिता अभिषेक जैन ने प्रशासन और फायर ब्रिगेड की बड़ी लापरवाही को उजागर किया। उन्होंने कहा-"मैं अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ इंदौर से रात 10 बजे शिवपुरी के लिए निकला था।
ड्राइवर को बदबू के बारे में बताया पर उसने नहीं सुना। आग लगने के बाद मैंने खुद फायर ब्रिगेड को फोन लगाया। आधे घंटे बाद जो गाड़ी आई, उसमें पानी ही नहीं था। उसके बाद दूसरी गाड़ियां आईं। यह प्रशासन लोगों की जान ले रहा है। मीडिया से मेरा अनुरोध है कि इसे आगे उठाएं, ताकि किसी और का भविष्य ऐसे न जले, मेरा तो भविष्य जल गया।
स्टाफ फरार
घटना के तुरंत बाद बस का ड्राइवर और क्लीनर मौके से फरार हो गए। 
बैटरी फटने का दावा गलत: शुरुआती अफवाहों में इसे बैटरी ब्लास्ट बताया गया था, लेकिन पुलिस और यात्रियों के अनुसार आग लगने का असली कारण शॉर्ट सर्किट (वायरिंग जलना) था। पिता के मुताबिक बस में पहले से ही जलने की बदबू आ रही थी, जिसकी शिकायत ड्राइवर से भी की गई थी।

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