शिवपुरी। राजनीति में चटपटे बयान की ख्याति अर्जित कर चुके पिछोर विधायक प्रीतम लोधी रविवार को फिर एक बार चर्चा के वायस बन गए हैं। इस बार उन्होंने एक समय के कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया की याद ताजा करते हुए उन्हें अपना मित्र और बड़ा भाई कह डाला है। इतना ही नहीं उन्होंने रामबाबू के चित्र पर पुष्प अर्पित किए जिसे लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।
दरअसल शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में पाल/बघेल समाज द्वारा रविवार को आयोजित लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना "मित्र और बड़ा भाई" बताया, जिसके बाद उनका यह बयान और डकैत की तस्वीर पर माल्यार्पण करना चर्चा का विषय बन गया है।
मंच पर लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की तस्वीर के बगल में डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर भी रखी गई थी, जिस पर विधायक प्रीतम लोधी ने पुष्प अर्पित किए और माल्यार्पण किया। विधायक लोधी ने मंच से कहा, "रामबाबू गड़रिया मेरा मित्र और बड़ा भाई था। हम दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे। रामबाबू की जेल से लेकर जंगल तक की एक-एक चीज मुझे याद है।"
डकैत बनने का बचाव:
प्रीतम लोधी ने डकैत का बचाव करते हुए कहा कि रामबाबू कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जो डकैत बनता, बल्कि सामंती शक्तियों और समाज के कुछ लोगों के अत्याचार व प्रताड़ना के कारण वह डाकू बनने पर मजबूर हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय मीडिया ने उन्हें (प्रीतम लोधी को) एक गुंडे और डाकू का सहयोग करने वाला बताया था, लेकिन उनके लिए वह एक इंसान था।
जानिए कौन था डकैत रामबाबू गड़रिया?
रामबाबू गड़रिया चंबल और ग्वालियर-चंबल संभाग का एक बेहद दुर्दांत और 15 लाख रुपये का इनामी डकैत रह चुका है, जिस पर हत्या, लूट और अपहरण के 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। उसके गिरोह की सबसे खौफनाक वारदात ग्वालियर के भंवरपुरा गांव में मुखबिरी के शक में 13 गुर्जर समाज के लोगों को एक लाइन में खड़ा करके गोलियों से भून देने की थी, जिसने पूरे देश को दहला दिया था। वर्ष 2007 में पुलिस मुठभेड़ (एनकाउंटर) में उसके मारे जाने का दावा किया गया था।
विवाद क्यों बढ़ा?
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। एक ऐसे दुर्दांत अपराधी, जिसने 13 मासूमों की कतार में खड़ा करके जान ले ली थी, उसे एक सत्तारूढ़ दल के विधायक द्वारा सार्वजनिक मंच से 'भाई' कहना और गौरवान्वित करना प्रदेश की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।














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