इस घोर कुप्रबंधन से गुस्साए अभिभावकों का सब्र का बांध टूट गया है, और उन्होंने खुलेआम स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा है— "धिक्कार है शिवपुरी की ऐसी रीढ़विहीन नेता नगरी पर, जो अपने जिले में एक स्थायी परीक्षा केंद्र तक नहीं टिकवा सकती!" अफसोस जनक है कि न सिर्फ नीट बल्कि ssc सहित अन्य परीक्षा देने के लिए भी विद्यार्थियों को ग्वालियर इंदौर दौड़ना पड़ता है।
'सफर' नहीं, 'सजा' बन गई परीक्षा:
ट्रेन और बसें फुल, टिकटों के लिए हाहाकार21 जून 2026 को होने वाली परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों को जो एडमिट कार्ड और सिटी स्लिप थमाई गई है, उसने उनके होश उड़ा दिए हैं। छात्र संकल्प भार्गव, देशु खटीक आदि ने बताया कि पहले कहा था कि जो परीक्षा केंद्र है वही रखा जाएगा। उसके अनुसार हमें ग्वालियर जाना था लेकिनआज जब पिता पवन भार्गव ने एडमिट कार्ड निकलवाया तो इंदौर केंद्र निकला। जब बस की बुकिंग करनी चाही तो पता लगा पूरी फुल हो चुकी हैं। अब एक दिन पहले अपने निजी साधन से जाना होगा। जो काफी महंगा है। फिर होटल में दो दिन रुकना, खाना आदि पर भारी खर्च होना तय है। उपर से पढ़ाई कैसे होगी ये समझ नहीं आ रहा।
वेटिंग लिस्ट का संकट:
शिवपुरी से इंदौर जाने वाली सभी ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है। तत्काल कोटा मिनटों में फुल हो गया।
बसों की मनमानी: निजी बस संचालकों ने मजबूरी का फायदा उठाकर टिकटों के दाम आसमान पर पहुंचा दिए हैं।अभिभावकों की लाचारी: कई परिवारों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे निजी गाड़ियां बुक कर सकें। माता-पिता सवाल उठा रहे हैं कि इस भीषण गर्मी में बच्चे 400 किमी का सफर धक्के खाकर तय करेंगे या चैन से परीक्षा देंगे? आखिर परीक्षा की सफलता पर ग्रहण लगाकर रख दिया है।
अशोकनगर, दतिया को केंद्र मिला, तो शिवपुरी से यह सौतेला व्यवहार क्यों?
स्थानीय नागरिकों और फेसबुक (Facebook) पर आक्रोशित युवाओं के अनुसार, पड़ोसी जिलों जैसे गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना और दतिया तक में नीट परीक्षा के सेंटर बनाए जा सकते हैं, तो शिवपुरी को इस सूची से बाहर क्यों रखा गया?
शिवपुरी में बड़े नेताओं और मंत्रियों की फौज
शिवपुरी में बड़े नेताओं और मंत्रियों की फौज होने के बावजूद, जब भी राष्ट्रीय स्तर की किसी परीक्षा (जैसे NEET, JEE या अन्य) की बारी आती है, तो यहाँ के बच्चों को ग्वालियर, कोटा, या भोपाल भागने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। छात्र संगठनों का कहना है कि नेताओं की इस कमजोरी के कारण शिवपुरी आज भी शिक्षा और परीक्षा सुविधाओं के मामले में पिछड़ रहा है।
व्यवस्था फेल, पर पहरा सख्त:
21 जून को कड़े सुरक्षा इंतजामएक तरफ छात्र परिवहन की मार झेल रहे हैं, तो दूसरी तरफ मोहन यादव सरकार और एनटीए ने परीक्षा को लेकर सुरक्षा कड़ी कर दी है:
जैमर की तैनाती: इंदौर के सभी परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल सिग्नल ब्लॉक करने के लिए जैमर लगाए जा रहे हैं ताकि इस बार दोबारा कोई पेपर लीक की साजिश न रच सके।
कड़ी चेकिंग: परीक्षा केंद्रों पर मेटल डिटेक्टर, बायोमेट्रिक पहचान और कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
अपील: प्रशासन ने छात्रों से समय से काफी पहले इंदौर पहुँचने की अपील की है, लेकिन सवाल वही है कि जब जाने का रास्ता ही सुलभ नहीं है, तो छात्र समय पर कैसे पहुंचेंगे?
आक्रोशित जनता की मांग: शिवपुरी के छात्र अब सिर्फ परीक्षा नहीं दे रहे, बल्कि वह इस पूरे सिस्टम की विफलता और मानसिक तनाव से लड़ रहे हैं। अभिभावकों नेचेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शिवपुरी को स्थायी परीक्षा केंद्र घोषित नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर सरकार और स्थानीय नेताओं के खिलाफ उग्र आंदोलन छेड़ेंगे।














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