प्रशासन के विरोधाभास पर खड़े हुए सवाल
इस कार्रवाई ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जानकारों का कहना है कि तत्कालीन कलेक्टर राजीव दुबे के कार्यकाल में मध्य प्रदेश दुग्ध संघ ने नगर पालिका से बकायदा स्थान चयनित करवाकर और निर्धारित शुल्क चुकाकर ये सांची पार्लर रखवाए थे।
संकट की घड़ी में बने थे मददगार
हैरानी की बात यह है कि जब भी शहर में निजी दूध डेयरियों की हड़ताल होती है, तब जिला प्रशासन इन्हीं सांची पार्लरों के माध्यम से नगर में दूध की सुचारू सप्लाई सुनिश्चित करता है और संकट से जंग जीतता है। लेकिन अब प्रशासन खुद के द्वारा ही रखवाए गए इन पार्लरों को अतिक्रमण बताकर हटा रहा है। इससे पहले कलेक्ट्रेट के पास स्थित पार्लर को भी हटाया गया था, और आज फिर दो अन्य पार्लरों पर यह कार्रवाई की गई है।
















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