शिवपुरी। जिला कलेक्ट्रेट में बीते रोज आयोजित जनसुनवाई के दौरान शहर के युवक दिशांशु अग्रवाल ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया कि नगर पालिका की लापरवाही के कारण वार्ड क्रमांक 34 और 36 के बीच का क्षेत्र लंबे समय से गंदगी, अवैध कचरा डंपिंग, नालियों की बदहाल स्थिति और आवारा पशुओं की समस्या से जूझ रहा है। ज्ञापन में उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) तथा दोनों वार्डों के पार्षदों पर भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करने के आरोप लगाए हैं।
दिशांशु अग्रवाल का कहना है कि वार्ड में खुलेआम कचरा डाला जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैली रहती है। आरोप है कि कई बार इसी कचरे में आग भी लगा दी जाती है, जिससे जहरीला धुआं निकलता है और आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। उनका कहना है कि गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है और डेंगू, मलेरिया सहित अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है और आम लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
दिशांशु अग्रवाल ने दावा किया है कि यह समस्या नई नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में भी इसी संबंध में नगर पालिका को लिखित शिकायत दी गई थी। इसके बाद CPGRAMS और स्वच्छता एप के माध्यम से भी कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन आज तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
ज्ञापन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016, नगर पालिका अधिनियम और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही अवैध कचरा डंपिंग तत्काल बंद कराने, खुले में पड़े कचरे को हटाने, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने, आवारा पशुओं के नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था करने तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि जिला प्रशासन और नगर पालिका द्वारा समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो मामले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उठाया जाएगा।
हालांकि, यह सभी आरोप शिकायतकर्ता दिशांशु अग्रवाल द्वारा अपने ज्ञापन में लगाए गए हैं। इस मामले में नगर पालिका अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO), वार्ड 34 एवं 36 के पार्षदों अथवा नगर पालिका प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
जनसुनवाई में ग्रामीणों ने उठाई पत्थर क्रेशर की शिकायत, प्रदूषण व फसलों के नुकसान का लगाया आरोप
शिवपुरी। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में करैरा तहसील के ग्राम पंचायत पारागढ़ के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को आवेदन सौंपकर गांव के समीप संचालित पत्थर क्रेशर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आवेदनकर्ता कामता प्रसाद लोधी ने ग्रामीणों की ओर से आरोप लगाया कि क्रेशर के संचालन से धूल, ध्वनि प्रदूषण और ब्लास्टिंग के कारण क्षेत्र का वातावरण प्रभावित हो रहा है तथा किसानों और ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि क्रेशर से निकलने वाली धूल खेतों में खड़ी फसलों पर जम रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। वहीं ब्लास्टिंग के दौरान उड़ने वाले पत्थरों से फसलों को नुकसान पहुंचने का भी आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार धूल उड़ने से सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि क्रेशर से जुड़े भारी वाहनों के लगातार आवागमन के कारण गांव की सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। साथ ही ब्लास्टिंग से आसपास के मकानों और कुओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की बात कही गई है।
आवेदनकर्ता कामता प्रसाद लोधी ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में भी प्रशासन, माइनिंग विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी जा चुकी है तथा सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने और समस्या का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
















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