10 घंटे की जगह मिल रही किश्तों में बिजली, जल रही हैं मोटरें
किसानों का कहना है कि शासन द्वारा किसानों को सिंचाई के लिए प्रतिदिन 10 घंटे लगातार बिजली देने का नियम है। इसके विपरीत पहोरा फीडर पर कभी भी तय समय के अनुसार लाइट नहीं दी जा रही है। निवोदा, खोंकर और सेसई पंप पर ओवरलोड (अत्यधिक भार) होने के कारण बिजली कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी बार-बार लाइन बंद कर देते हैं। इस अघोषित कटौती और लो-वोल्टेज के कारण खेतों में लगी सिंचाई की मोटरें आए दिन जल रही हैं, जिससे किसानों पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
लाइन मरम्मत के बहाने घंटों कटौती, ड्यूटी से गायब रहते हैं कर्मचारी
कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में बिजली कंपनी के कर्मचारी लाइन की मरम्मत (मेंटेनेंस) का बहाने बनाकर रोज घंटों लाइट बंद रखते हैं, जबकि धरातल पर कोई सुधार कार्य नहीं किया जाता। इसके अलावा, फीडर पर तैनात कर्मचारी छत्रपाल सिंह जादौन और बिलाल खान पर ड्यूटी ठीक से न करने और शिकायत करने पर अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। किसानों ने इन दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की है।
किसानों ने की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग
क्षेत्र के पीड़ित किसानों एवं उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि बिजली की इस समस्या को दूर करने के लिए पूर्व की व्यवस्था को दोबारा लागू किया जाए, जिसके तहत एक सप्ताह रात्रि में और एक सप्ताह दिन में बिना रुकावट के पूरी लाइट दी जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति में सुधार और लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। समस्त ग्रामवासी खोकर, सेसई।
















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