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#mamakadhamakanews: केंद्रीय मंत्री द ग्रेट ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मां जागेश्वरी मंदिर में दर्शन कर पुनर्विकास कार्यों का निरीक्षण किया

शनिवार, 18 जुलाई 2026

/ by Vipin Shukla Mama
* ₹20 करोड़ की लागत से हो रहे जीर्णोद्धार में विरासत संरक्षण पर दिया विशेष जोर, अधिकारियों को दिए कई महत्वपूर्ण निर्देश
*चंदेरी की ऐतिहासिक पहचान और स्थापत्य विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए मंदिर परिसर का विकास हो : सिंधिया
चंदेरी/अशोकनगर/गुना। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री तथा स्थानीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज चंदेरी स्थित ऐतिहासिक मां जागेश्वरी मंदिर में दर्शन-पूजन कर लगभग ₹20 करोड़ की लागत से चल रहे मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ निर्माण कार्यों की बारीकी से समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्य आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ मंदिर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए किए जाएं। सिंधिया ने कहा कि इस काम्प्लेक्स का निर्माण उज्जैन के महाकाल लोक की तरह होगा और यहाँ वैसी ही सुविधाएं श्रद्धालुओं को मिलेंगी। 
उल्लेखनीय है कि मां जागेश्वरी मंदिर परिसर, सागर ताल एवं ऐतिहासिक झरोखे का निर्माण वर्ष 1894 में सिंधिया राजवंश के शासनकाल में श्रीमंत महाराज माधवराव सिंधिया द्वारा कराया गया था। उन्होंने कहा कि यह परिसर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि चंदेरी की समृद्ध सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है, इसलिए इसके मूल स्वरूप को यथासंभव सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि मूल स्वरूप का संरक्षण एवं रेस्टोरेशन किया जाए: सिंधिया
निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रस्तावित सीसी रोड हटाकर प्राकृतिक पत्थर से मार्ग विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मंदिर परिसर के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन का कार्य राज्य पुरातत्व विभाग की तकनीकी सलाह के अनुरूप करने को कहा। झरोखे का निरीक्षण करते हुए उन्होंने स्वयं उसके विभिन्न हिस्सों का अवलोकन किया और निर्देश दिए कि उसका पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि मूल स्वरूप का संरक्षण एवं रेस्टोरेशन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुराने पत्थरों को यथासंभव सुरक्षित रखा जाए तथा निर्माण में ईंट का उपयोग न किया जाए।
पूरे परिसर में चंदेरी एवं ग्वालियर के स्थानीय पत्थरों का ही हो उपयोग
सिंधिया ने मंदिर के सामने बनने वाले प्लाजा के डिज़ाइन में भी आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पूरे परिसर में बाहरी पत्थर के स्थान का उपयोग न करके बल्कि हमारे चंदेरी एवं ग्वालियर के स्थानीय पत्थरों का ही प्राथमिकता से किया जाए। परिसर की फ़र्श, रेलिंग एवं अन्य निर्माण सामग्री भी पारंपरिक पत्थरों से तैयार की जाए ताकि चंदेरी की स्थापत्य पहचान सुरक्षित रह सके।
सागर ताल का निरीक्षण करते हुए केंद्रीय मंत्री ने जलस्तर बढ़ाने के लिए आवश्यक खुदाई एवं संरक्षण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सागर ताल, मंदिर और ऐतिहासिक झरोखा मिलकर चंदेरी की विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं और इनका संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि मां जागेश्वरी मंदिर का पुनर्विकास केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि चंदेरी की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का अभियान है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनभागीदारी के समन्वय से इस पूरे परिसर को उसकी मूल गरिमा के अनुरूप विकसित किया जाएगा, जिससे यह प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर सके। 

















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