बस ऑपरेटरों की चिंता: 'राजस्व का घाटा और दुर्घटनाओं का भय
एसपी को सौंपे गए ज्ञापन में बस ऑपरेटरों ने जिला प्रशासन के सामने दो बेहद गंभीर मुद्दे रखे हैं:
- सुरक्षा पर बड़ा खतरा: हाईवे पर भारी और तेज रफ्तार वाहनों के बीच बेहद धीमी गति से चलने वाले ई-रिक्शा और ऑटो दुर्घटनाओं को खुला आमंत्रण दे रहे हैं।
- आर्थिक नुकसान: परमिट लेकर चलने वाली बसों की सवारियों को ये अवैध वाहन बीच रास्ते से ही उठा लेते हैं, जिससे बस ऑपरेटरों को भारी राजस्व (टैक्स) की हानि उठानी पड़ रही है।
जनता का तीखा पलटवार: 'मजबूरी में जान हथेली पर लेकर सफर'
इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्थानीय नागरिकों का गुस्सा भी चरम पर है। आम जनता का आरोप है कि हाईवे पर सफर करना उनकी कोई चॉइस नहीं, बल्कि मजबूरी है। नागरिकों ने निजी बस चालकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
- मनमाना किराया और अभद्रता: बस कंडक्टर और स्टाफ यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं। यदि कोई विरोध करता है, तो उसके साथ बदतमीजी की जाती है।
- शॉर्ट-डिस्टेंस यात्रियों की उपेक्षा: कम दूरी (5 से 10 किलोमीटर) वाले यात्रियों को बस वाले न तो सीट देते हैं और कई बार उन्हें गाड़ी में बैठाने तक से मना कर देते हैं।
- सरकारी तंत्र पर मिलीभगत का आरोप: लोगों का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग केवल दिखावे की कार्रवाई करते हैं। सरकारी रोडवेज (MPSRTC) सेवा शुरू न होने के कारण निजी ऑपरेटरों का एकाधिकार (Monopoly) है, जिससे वे निरंकुश हो चुके हैं।
- एसपी का कड़ा रुख और आगे की राहज्ञापन लेने के बाद एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने दोनों पक्षों के इनपुट को संज्ञान में लिया है। उन्होंने पुलिस और ट्रैफिक अमले को हाईवे पर नियमों के खिलाफ चलने वाले छोटे वाहनों की चेकिंग करने के निर्देश दिए हैं।
















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