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#makadhamakanews: प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने की हाइवे पर दौड़ रहे ऑटो वालों की शिकायत, इधर जनता का पलटवार: हाईवे पर अवैध वाहनों के खिलाफ एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

गुरुवार, 13 अगस्त 2026

/ by Vipin Shukla Mama
shivpuri शिवपुरी। जिले के फोरलेन और स्टेट हाईवे पर अवैध रूप से दौड़ रहे ऑटो और ई-रिक्शा के संचालन को लेकर निजी बस ऑपरेटरों ने मोर्चा खोल दिया है। मुकेश सिंह चौहान की अध्यक्षता में प्राइवेट बस ऑपरेटरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिवपुरी एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर हाईवे पर अवैध वाहनों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। इस गंभीर मामले को सुनने के बाद एसपी भूटिया ने ऑपरेटरों को आश्वस्त किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ जल्द ही कड़ा अभियान चलाकर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दल में बस संचालक भदौरिया, हिमांशु सहित अन्य ऑपरेटर शामिल थे।
बस ऑपरेटरों की चिंता: 'राजस्व का घाटा और दुर्घटनाओं का भय 
एसपी को सौंपे गए ज्ञापन में बस ऑपरेटरों ने जिला प्रशासन के सामने दो बेहद गंभीर मुद्दे रखे हैं:
  • सुरक्षा पर बड़ा खतरा: हाईवे पर भारी और तेज रफ्तार वाहनों के बीच बेहद धीमी गति से चलने वाले ई-रिक्शा और ऑटो दुर्घटनाओं को खुला आमंत्रण दे रहे हैं।
  • आर्थिक नुकसान: परमिट लेकर चलने वाली बसों की सवारियों को ये अवैध वाहन बीच रास्ते से ही उठा लेते हैं, जिससे बस ऑपरेटरों को भारी राजस्व (टैक्स) की हानि उठानी पड़ रही है।
जनता का तीखा पलटवार: 'मजबूरी में जान हथेली पर लेकर सफर'
इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्थानीय नागरिकों का गुस्सा भी चरम पर है। आम जनता का आरोप है कि हाईवे पर सफर करना उनकी कोई चॉइस नहीं, बल्कि मजबूरी है। नागरिकों ने निजी बस चालकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
  • मनमाना किराया और अभद्रता: बस कंडक्टर और स्टाफ यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं। यदि कोई विरोध करता है, तो उसके साथ बदतमीजी की जाती है।
  • शॉर्ट-डिस्टेंस यात्रियों की उपेक्षा: कम दूरी (5 से 10 किलोमीटर) वाले यात्रियों को बस वाले न तो सीट देते हैं और कई बार उन्हें गाड़ी में बैठाने तक से मना कर देते हैं।
  • सरकारी तंत्र पर मिलीभगत का आरोप: लोगों का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग केवल दिखावे की कार्रवाई करते हैं। सरकारी रोडवेज (MPSRTC) सेवा शुरू न होने के कारण निजी ऑपरेटरों का एकाधिकार (Monopoly) है, जिससे वे निरंकुश हो चुके हैं।
  • एसपी का कड़ा रुख और आगे की राह
    ज्ञापन लेने के बाद एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने दोनों पक्षों के इनपुट को संज्ञान में लिया है। उन्होंने पुलिस और ट्रैफिक अमले को हाईवे पर नियमों के खिलाफ चलने वाले छोटे वाहनों की चेकिंग करने के निर्देश दिए हैं।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का हल तभी संभव है जब:
    1. रूट का निर्धारण हो: ऑटो और ई-रिक्शा केवल शहर के अंदर चलें, उन्हें हाईवे पर जाने की अनुमति न मिले।
    2. किराए और व्यवहार पर लगाम हो: आरटीओ और पुलिस बसों की औचक चेकिंग करें ताकि यात्रियों से ओवरचार्जिंग और बदतमीजी न हो सके।
















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