शिवपुरी। माननीय उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ के आदेश पर श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज शिवपुरी में सहायक प्राध्यापक डॉ छत्रपाल प्रजापति की नियुक्ति निरस्त कर दी है।
माननीय उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश, ग्वालियर खंडपीठ ने रिट अपील क्रमांक WA-1204/2025 *डॉ. मनबहादुर राजपूत बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य* में 31 जुलाई 2026 को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज, शिवपुरी में सहायक प्राध्यापक - सामुदायिक औषधि के पद पर की गई नियुक्ति को अवैध घोषित करते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
माननीय न्यायमूर्ति श्री जी.एस. अहलूवालिया एवं माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।
मामले का संक्षिप्त विवरण
याचिकाकर्ता डॉ. मनबहादुर राजपूत ने श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज, शिवपुरी में दिनांक 20.08.2018 को सहायक प्राध्यापक - सामुदायिक औषधि के पद पर की गई प्रतिवादी क्रमांक 5 की नियुक्ति को चुनौती देते हुए _क्वो वारंटो_ की प्रकृति की रिट याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि नियुक्त व्यक्ति के पास पद हेतु अनिवार्य न्यूनतम योग्यता नहीं थी।
न्यायालय के मुख्य अवलोकन
1. *न्यूनतम योग्यता का अभाव*: मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की "Minimum Qualifications for Teachers in Medical Institutions Regulations, 2017" के अनुसार सहायक प्राध्यापक के पद हेतु संबंधित विषय में MD/MS के साथ 3 वर्ष का जूनियर रेजिडेंसी और 1 वर्ष का सीनियर रेजिडेंसी का अनुभव अनिवार्य है।
2. नियुक्ति नियम विरुद्ध: न्यायालय ने पाया कि प्रतिवादी क्रमांक 5 ने जून 2018 में ही MD की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और 2 माह के भीतर ही 20.08.2018 को नियुक्ति प्राप्त कर ली। उनके पास 3 वर्ष का जूनियर रेजिडेंसी और 1 वर्ष का सीनियर रेजिडेंसी का अनुभव नहीं था।
3. प्रशासन का तर्क खारिज: राज्य शासन एवं कॉलेज प्रशासन द्वारा यह तर्क दिया गया था कि वर्ष 2018 में सामुदायिक औषधि विषय में सीनियर रेजिडेंट का पद ही अस्तित्व में नहीं था। न्यायालय ने इस तर्क को "असत्य, तुच्छ, आधारहीन और भ्रामक" करार दिया। न्यायालय ने सफदरजंग अस्पताल एवं वी.एम.एम.सी. नई दिल्ली के 30.09.2017 के परिणाम को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें दर्शाया गया कि 2017 में ही सामुदायिक औषधि विभाग में सीनियर रेजिडेंट का पद उपलब्ध था।
4. क्वो वारंटो का दायरा: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि क्वो वारंटो याचिका में याचिकाकर्ता के स्वयं योग्य होने की आवश्यकता नहीं है। यह देखना आवश्यक है कि पद सार्वजनिक है और उस पर आसीन व्यक्ति वैध प्राधिकार के बिना है या नहीं।
न्यायालय का आदेश
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि
> "चूंकि प्रतिवादी क्रमांक 5 के पास Minimum Qualifications for Teachers in Medical Institutions (Amendment) Regulations, 2017 के अनुसार न्यूनतम योग्यता नहीं थी, इसलिए श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज, शिवपुरी में सहायक प्राध्यापक (सामुदायिक औषधि) डॉ छत्रपाल प्रजापति के पद पर उनकी नियुक्ति विधिमान्य नहीं है और तद्नुसार इसे निरस्त किया जाता है। वे तत्काल प्रभाव से सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्य करना बंद करेंगे।"
न्यायालय ने रिट अपील को स्वीकार कर लिया है।
इस निर्णय से प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में नियुक्तियों में पारदर्शिता और योग्यता के मानकों के पालन को बल मिलेगा।
ऐसी ही पेटिशन शिवपुरी मेडिकल के दो और डॉ के ख़िलाफ़ भी लगी हुई हैं डॉ शिखा जैन स्त्री रोग औरडॉ मोहित शर्मा दंत चिकित्सक के ख़िलाफ़ डॉ मान बहादुर ने ये याचिका लगाई थी और वकील गौरव समाधिया थे।
















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