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#mamakadhamakanews: शिवपुरी में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष, कार्यालय मंत्री की सहमति से विक्रय हुई बीजेपी कार्यालय की प्राइम लैंड को कौड़ियों के दाम बेचने के आरोप, पार्टी के पुराने नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व पर लगाए गम्भीर आरोप, बीजेपी जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव ने कहा, भूमि अच्छे दाम पर प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेतृत्व की निगरानी में ही की गई विक्रय, स्थानीय नेताओं का कोई दखल नहीं

गुरुवार, 20 अगस्त 2026

/ by Vipin Shukla Mama
सारशिवपुरी में बीजेपी  अपने नवीन कार्यालय की भूमि खरीद चुकी है और जल्द ही उसका निर्माण शुरू किया जाएगा लेकिन इसी बीच बीजेपी कार्यालय निर्माण के लिए फिजिकल इलाके में स्थित इसके पूर्व की पुरानी भूमि के विक्रय का मामला सुर्खियां बन गया है, हालाकि उक्त भूमि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष, कार्यालय मंत्री की जानकारी में विक्रय की गई है फिर भी स्थानीय कुछ नेता उस विक्रय पर सवाल उठा रहे हैं। उन्हें या तो इस बात की जानकारी नहीं की प्रदेश स्तर से भूमि विक्रय का सौदा उनकी सहमति से किया गया या फिर ज्ञात होने पर स्थानीय नेता अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर आरोप उछालकर उन्हें कठघरे में खड़ा करना चाहते हैं। 
आइए बताते है क्या है मामला
शहर में सोन चिरैया मार्ग पर स्थित शराब दुकान से कुछ आगे चलकर बीजेपी ने कार्यालय के लिए कई साल पहले चंदा करके भूमि खरीदी थी। बाद में निर्माण शुरू हुआ लेकिन अधूरा छोड़ दिया गया जिसे लेकर तत्समय ये आरोप उछले थे कि बीजेपी के कुछ बड़े नाम वाले नेता चंदा देने की राशि लिखवाकर देने से मुकर गए जिससे कार्यालय नहीं बन सका और कोठी नंबर एक में ही आज भी कार्यालय संचालित किया जा रहा है। खैर इसी भूमि को अब बेच दिया गया वो भी भोपाल में बैठे प्रदेश अध्यक्ष और कार्यालय मंत्री की पूरी जानकारी के बाद लेकिन इसी सौदे को लेकर कुछ नेता सवाल खड़े कर रहे हैं। जिनका आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य की प्राइम लोकेशन की शासकीय पार्टी भूमि को कथित तौर पर बेहद कम कीमतों पर बेच (कौड़ियों के दाम खुर्द-बुर्द) दिया है।  स्थानीय स्तर पर विपक्ष और नागरिक संगठनों का आरोप है कि शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की इस व्यावसायिक भूमि को रसूखदारों के दबाव में बेहद कम (कलेक्टर गाइडलाइन से भी कम) दामों पर बेचा गया है। 
क्या है मुख्य विवाद और गंभीर आरोप?
आरोप है कि
बाजार मूल्य की अनदेखी: जिस भूमि की बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही थी, उसे कागजों पर बेहद मामूली कीमत में दर्शाकर बेच दिया गया।
राजस्व को चपत:
इस सौदे में स्टांप ड्यूटी और सरकारी राजस्व की चोरी की भी आशंका जताई जा रही है।
नेताओं और अफसरों की मिली भगत: स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरी डील को बिना किसी सार्वजनिक निविदा (टेंडर) या पारदर्शी प्रक्रिया के, बंद कमरों में प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों के संरक्षण में अंजाम दिया गया।
विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा, सरकार घेरे में
इस मामले के सामने आते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और अन्य स्थानीय नेताओं ने इसे आड़े हाथों लिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि एक तरफ तो आम जनता और गरीबों के छोटे-मोटे अतिक्रमणों पर प्रशासन का बुलडोजर तुरंत चल जाता है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल के कार्यालय से जुड़ी जमीनों के ऐसे संदेहास्पद सौदों पर प्रशासन पूरी तरह मौन साधे हुए है। विपक्ष ने मांग की है कि इस पूरे सौदे की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए और रजिस्ट्री को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
बीजेपी अध्यक्ष जसमंत जाटव का पक्ष: आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष जी, कार्यालय मंत्री जी की जानकारी में पूरी तरह नियमों के तहत ही वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए भूमि का विक्रय किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार का आर्थिक भ्रष्टाचार नहीं हुआ है और स्थानीय स्तर पर हमारे हाथ में कुछ भी नहीं था जो निर्णय हुआ पार्टी स्तर पर लिया गया निर्णय है। भूमि वर्तमान बाजार मूल्य पर अच्छी कीमत पर विक्रय की गई है। फिर भी किसी को लगता है अधिक मूल्य दिलवा सकता है तो पार्टी स्तर पर भोपाल बातचीत करे। जहां तक विपक्ष का सवाल है वह इस मुद्दे की आड़ में झूठी और भ्रामक अफवाहें फैला रहा है।
इन नेताओं ने छोड़े तरकश से तीर
ओमी गुरू ने कहा, सभी से बात करनी चाहिए थी
भाजपा के पूर्व महामंत्री एवं वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश शर्मा (गुरु) का कहना है कि हम लोग पार्टी के लिए चंदा करते हैं, और एक-एक रुपए का महत्व होता है। इसमें तो लगभग 60 लाख रुपए का घाटा पार्टी को हो रहा है, इतनी बड़ी राशि से तो नए बनने वाले कार्यालय में कई काम हो सकते हैं। ओमी गुरु ने कहा कि पार्टी कार्यालय को बेचने से पहले सभी विधायकों के अलावा उन लोगों से भी चर्चा करना चाहिए थी, जिन्होंने उस भूमि को खरीदने में चंदा दिया था।
हम लोगों ने ही कराई थी रजिस्ट्री: ओमी जैन
भाजपा के जिस पुराने कार्यालय को 60 लाख रुपए कम रेट में बेचा है, उसकी रजिस्ट्री कराने मैं ही गया था। कार्यालय के लिए विधायक देवेंद्र जैन सहित पार्टी के कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी अपनी हैसियत के मुताबिक चंदा दिया था। उनमें से किसी से भी कोई बात न करके इतने कम रेट में कार्यालय को बेचना पूरी तरह से गलत है। हमारे पास ही अधिक रेट में पुरानी भूमि खरीदने वाले मौजूद हैं, तो फिर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को किया गया सौदा निरस्त करके अधिक दाम देने वाले को ही बेचना चाहिए था।
















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