हिंदू धर्म में इस अवधि का विशेष धार्मिक महत्व है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। पंचांग की गणना के अनुसार, इस साल तिथियों के फेर के कारण पितृ पक्ष 16 के बजाय केवल 15 दिनों का होगा।
प्रमुख तिथियां और कैलेंडर (Shradh Dates 2026)
- 26 सितंबर 2026 (शनिवार): भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध (उन पितरों के लिए जिनकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई हो)
- 27 सितंबर 2026 (रविवार): अश्विन कृष्ण प्रतिपदा श्राद्ध (पितृ पक्ष की औपचारिक शुरुआत)।
- 4 अक्टूबर 2026 (रविवार): मातृ नवमी (परिवार की दिवंगत माताओं, बहनों और बेटियों का श्राद्ध)।
- 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार): सर्वपितृ अमावस्या / महालय अमावस्या (पितृ पक्ष का समापन)। इस दिन उन सभी पूर्वजों का श्राद्ध किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है।
- तर्पण की विधि और सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तपितरों के तर्पण के लिए दोपहर के समय को उत्तम माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, दोपहर 11:36 बजे से 12:24 बजे तक का कुतुप काल तर्पण के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है।श्राद्ध विधि के नियम:
- दिशा और वस्त्र: श्राद्ध के दिन सुबह स्नान करके साफ या पीले वस्त्र धारण करें। तर्पण करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें या खड़े हों।
- सामग्री: तांबे के लोटे में जल, गंगाजल, कच्चा दूध और काला तिल मिलाएं। हाथ की अनामिका उंगली में कुश की अंगूठी धारण करके पितरों को तीन बार जलांजलि दें।
- पंचबलि भोजन: ब्राह्मण को भोजन कराने से पहले भोजन में से 5 हिस्से निकालना अनिवार्य है। ये हिस्से गाय, कुत्ता, कौआ, देवता और चींटी के लिए होते हैं। माना जाता है कि इनके माध्यम से भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है।
- पंडित विकास दीप शर्मा जी से जानिए श्राद्ध की सही विधि, जरूरी नियम और इन दिनों की जाने वाली आम गलतियों को विस्तार से समझने के लिए आप इस यू ट्यूब वीडियो गाइड को देख सकते हैं:
- क्या करें और क्या न करें (Do's and Don'ts)
- क्या करें: जरूरतमंदों और गरीबों को अन्न-वस्त्र का दान करें। घर में शांत, आदरपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
- क्या न करें: श्राद्ध कर्म करने वाले व्यक्ति को पितृ पक्ष के दौरान बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से बचना चाहिए। इन दिनों घर में तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) का सेवन न करें। साथ ही, किसी भी पशु-पक्षी या असहाय व्यक्ति का अपमान भूलकर भी न करें।











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