करैरा। स्व. श्री प्रफुल्ल कुमार चतुर्वेदी पहाड़ी की स्मृति में एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया जिसमें श्री प्रताप चन्द्र चतुर्वेदी ने अध्यक्षता की ।
मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी श्री भोगीलाल विलैया उपस्थित रहे ।
विशिष्ट अतिथि के रूप में समाजसेवी श्री सुरेश बंधु उपस्थित थे ।
कवि गोष्ठी में साहित्यकार श्री प्रभु दयाल शर्मा, सतीश श्रीवास्तव, घनश्याम योगी , प्रमोद गुप्ता भारती, डॉ. राजेन्द्र गुप्ता, रमेश सौरभ तिवारी , श्री वेदप्रकाश दुबे,डॉ. ओमप्रकाश दुबे , के साथ बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे ।
समस्त साहित्यकारों स्व. श्री प्रफुल्ल कुमार चतुर्वेदी पहाड़ी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए।
तत्पश्चात कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय भावना हेतु जागरूक करने वाली कविताएँ सुनाकर मंत्र मुग्ध कर दिया।
सर्वप्रथम गीतकार प्रभु दयाल शर्मा ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की,
जयति जय माँ शारदे
उद्धार जग का कीजिये,
वीणा से ऐसे स्वर बहा
तत्पश्चात प्रमोद गुप्ता भारती ने अपनी कविताओं से मंत्रमुग्ध किया-
हमहुँ कहें अब ठकुर सुहाती
मैं इसका खंडन करता हूँ,
भला लगे या बुरा किसी को
सच कहने से कब डरता हूँ
शब्दों में शोले भरता हूँ।
प्रभुदयाल शर्मा ,राष्ट्रवादी ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को तालियां बजाने को मजबूर कर दिया...
भाई बंधु रिश्ते नाते
झूठे भ्रम भरमाया है
साथ रहेगा केवल तेरे
जितना हरि गुण गाया है।
डा. ओमप्रकाश दुबे ने अपनी चिरपरिचित शैली में कविता सुनाई।
करैरा के प्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डा. राजेन्द्र गुप्ता ने अपनी कविता सुनाई...
अज्ञान विवसता बेकारी
नैतिक मूल्यों की लाचारी
मेरा देश महान ये तीखा
व्यंग अभी जारी है,
जंग अभी जारी है।
तत्पश्चात सतीश श्रीवास्तव ने अपनी कविता सुनाई-
समय भले ही बडा बुरा है
पर मुस्काएं हम,
बुरे वक्त में बोलो भइया
क्यों घबराएं हम।
साहित्यकार गीतकार सौरभ तिवारी ने अपने मुक्तक और गीतों के माध्यम से गोष्ठी को नया आयाम दिया..
जो ग्रंथों में , नहीं बंधे हैं
जो पंथों में, नहीं बंटे हैं
जो अंतः में आत्मसात हैं
शुकवाणी से ,नहीं रटे हैं,
सार्वजन्य सन्यासी अक्षर
संग्रह योग्य नहीं हो सकते
गीत हमारे वनवासी हैं।
प्रसिद्ध गीतकार श्री घनश्याम योगी ने दोहों और गीतों से गोष्ठी को ऊँचाई प्रदान की....
सागर के पार कैसे
जाऊँ री सजनियाँ
प्रीतम से कैसे
मिल पाऊँ सजनियाँ।
विशिष्ट अतिथि श्री सुरेश बंधु ने स्व. श्री प्रफुल्ल कुमार चतुर्वेदी पहाड़ी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पहाड़ी जी के घर में सचमुच कविता का वास है माँ सरस्वती की असीम कृपा है।
मुख्य अतिथि श्री भोगीलाल विलैया ने अपने सारगर्भित उदवोधन में आयोजन की प्रशंशा करते हुए कहा धन्य है उनके बेटे और बेटियां जो पिता के साहित्यिक माहौल को जारी रख रहे हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्रीश्री प्रताप चन्द्र चतुर्वेदी ने कहा कि आज की इस गोष्ठी को जीवन में कभी नहीं भूल पाऊंगा, आज की कविताओं ने कभी मुझे भावुक किया, कभी गुदगुदाया तो कभी रोमांचित भी किया है, इस परंपरा को जारी रखने का भी आग्रह किया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से पहाड़ी जी बेटी श्रीमती अरुणा और श्रीमती अनीता उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रमोद गुप्ता भारती ने किया तो वहीं आभार प्रदर्शन आलोक चतुर्वेदी और उल्लास चतुर्वेदी ने किया।











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