आइए जानते हैं मध्य प्रदेश नगरीय निकाय चुनाव को लेकर हुए इन बड़े बदलावों के 5 प्रमुख बिंदु:
- बढ़ गई जमानत राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट): चुनावी अखाड़े में उतरने वाले दिग्गजों की जेब अब ढीली होने वाली है। नए नियमों के मुताबिक, महापौर पद के उम्मीदवार को अब ₹32 हजार और नगरपालिका अध्यक्ष के प्रत्याशी को ₹24 हजार की जमानत राशि जमा करानी होगी। इसके साथ ही नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षदों के लिए भी जमानत राशि बढ़ा दी गई है।
- चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता जरूरी: अब प्रत्याशियों को अपने चुनावी खर्च की पाई-पाई का हिसाब देना होगा। इसके लिए हर उम्मीदवार को एक अलग बैंक खाता खोलना अनिवार्य कर दिया गया है। चुनाव का पूरा लेन-देन इसी खाते से करना होगा, जिससे काले धन और बेहिसाब खर्च पर लगाम कसी जा सके।
- पारदर्शिता का नया दौर – हलफनामा होगा ऑनलाइन: चुनाव लड़ने वाले सभी पार्षदों और अध्यक्षों को अपनी संपत्ति, शिक्षा और आपराधिक रिकॉर्ड की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। यह शपथ-पत्र न सिर्फ राज्य निर्वाचन आयोग के पास रहेगा, बल्कि आम जनता के देखने के लिए जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा।
- नामांकन के लिए मिलेंगे कम से कम 7 दिन: नामांकन जमा करने की समय-सीमा में भी बदलाव किया गया है। अब प्रत्याशियों को पर्चा दाखिल करने के लिए न्यूनतम 7 दिनों का समय मिलेगा। यदि सातवें दिन कोई सार्वजनिक अवकाश या छुट्टी होती है, तो उसे अगले कार्यदिवस (वर्किंग डे) तक बढ़ा दिया जाएगा।
- जनता खुद चुनेगी अपना बॉस
- अब नगर निगम के महापौर के साथ-साथ नगरपालिका और नगर परिषदों के अध्यक्षों का चुनाव भी सीधे जनता द्वारा (प्रत्यक्ष मतदान) किया जाएगा। पहले पार्षदों के जरिए अध्यक्ष चुने जाने से जोड़-तोड़ की राजनीति होती थी, जिस पर अब पूरी तरह ताला लग जाएगा।











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