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#धमाका_खास_खबर: एमपी नगरीय निकाय चुनाव के नियमों में हुआ 'महाबदलाव', अब नगर निगम के महापौर, नगरपालिका और नगर परिषदों के अध्यक्षों का चुनाव भी सीधे जनता द्वारा (प्रत्यक्ष मतदान) किया जाएगा

रविवार, 27 सितंबर 2026

/ by Vipin Shukla Mama
* जेब भी होगी ढीली और देना होगा पाई-पाई का हिसाब!
bhopal भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने नियमों में बड़ा और कड़ा फेरबदल कर दिया है। 'मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994' में संशोधन करते हुए अब चुनाव प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और सख्त बना दिया गया है। इन बदलावों के बाद अब चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के लिए राह इतनी आसान नहीं होगी। 
आइए जानते हैं मध्य प्रदेश नगरीय निकाय चुनाव को लेकर हुए इन बड़े बदलावों के 5 प्रमुख बिंदु:
  • बढ़ गई जमानत राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट): चुनावी अखाड़े में उतरने वाले दिग्गजों की जेब अब ढीली होने वाली है। नए नियमों के मुताबिक, महापौर पद के उम्मीदवार को अब ₹32 हजार और नगरपालिका अध्यक्ष के प्रत्याशी को ₹24 हजार की जमानत राशि जमा करानी होगी। इसके साथ ही नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षदों के लिए भी जमानत राशि बढ़ा दी गई है।
  • चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता जरूरी: अब प्रत्याशियों को अपने चुनावी खर्च की पाई-पाई का हिसाब देना होगा। इसके लिए हर उम्मीदवार को एक अलग बैंक खाता खोलना अनिवार्य कर दिया गया है। चुनाव का पूरा लेन-देन इसी खाते से करना होगा, जिससे काले धन और बेहिसाब खर्च पर लगाम कसी जा सके। 
  • पारदर्शिता का नया दौर – हलफनामा होगा ऑनलाइन: चुनाव लड़ने वाले सभी पार्षदों और अध्यक्षों को अपनी संपत्ति, शिक्षा और आपराधिक रिकॉर्ड की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। यह शपथ-पत्र न सिर्फ राज्य निर्वाचन आयोग के पास रहेगा, बल्कि आम जनता के देखने के लिए जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा।
  • नामांकन के लिए मिलेंगे कम से कम 7 दिन: नामांकन जमा करने की समय-सीमा में भी बदलाव किया गया है। अब प्रत्याशियों को पर्चा दाखिल करने के लिए न्यूनतम 7 दिनों का समय मिलेगा। यदि सातवें दिन कोई सार्वजनिक अवकाश या छुट्टी होती है, तो उसे अगले कार्यदिवस (वर्किंग डे) तक बढ़ा दिया जाएगा।
  • जनता खुद चुनेगी अपना बॉस
  • अब नगर निगम के महापौर के साथ-साथ नगरपालिका और नगर परिषदों के अध्यक्षों का चुनाव भी सीधे जनता द्वारा (प्रत्यक्ष मतदान) किया जाएगा। पहले पार्षदों के जरिए अध्यक्ष चुने जाने से जोड़-तोड़ की राजनीति होती थी, जिस पर अब पूरी तरह ताला लग जाएगा। 











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