कृष्ण कन्हाई, मथुरा में दिव्य और भव्य नजारा, इस बार आसमान में 500 ड्रोन दिखाएंगे कान्हा की लीलाएं
कान्हा के जन्मोत्सव का उल्लास पूरे ब्रज में छाया हुआ है। मथुरा नगरी पूरी सज चुकी है। जन्मोत्सव पर अपने आराध्य के दर्शन के लिए श्रद्धालु भी पहुंच गए हैं। अब इंतजार है बस शुक्रवार मध्यरात्रि का। जब घड़ी में रात के 12 बजते ही कन्हाई जन्म लेंगे तो हर ओर मंगल बधाई गीत गूजने लगेंगे। इस बार आसमान में 500 ड्रोन कान्हा की लीलाएं दिखाएंगे।
आज घर-घर जन्म लेंगे कृष्ण कन्हाई, गूंजेगी मंगल बधाई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर यह लोकोक्ति समूचे ब्रज को झंकृत किए हुए है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास पूरे ब्रज में हिलोरें ले रहा है। हर ब्रजवासी अपने कान्हा के आगमन का पलक-पावड़े बिछाकर इंतजार कर रहा है। उनके स्वागत के लिए ब्रज स्वर्ग सा सज गया है। जगह-जगह तोरण द्वार और रंग बिरंगी रोशनी से शहर के समूचे मार्ग और चौराहे यहां तक की गलियां तक रोशन हैं। शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे घर-घर कन्हाई जन्म लेंगे तो हर घर में मंगल बधाई गीत गूजेंगे। इसकी सभी तैयारियां हो चुकी हैं। उनके दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु ब्रज में आ चुके हैं।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मुख्य उत्सव का आयोजन होगा। यहां सुबह 5:30 बजे से रात्रि 1:30 बजे तक निरंतर प्रवेश रहेगा। वहीं, ब्रज के सभी छोटे-बड़े मंदिर, चौराहों को भी सजाया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर चप्पे-चप्पे पर पुलिस, पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है। खुफिया एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक 50 लाख से अधिक श्रद्धालु कृष्ण जन्मोत्सव के गवाह बनेंगे। लल्ला के स्वागत में पूरा ब्रज ही नहीं देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु आतुर हैं। मथुरा-वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे कन्हैया के जन्म लेते ही... हाथी-घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की जयघोष गूंजने लगेगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान, ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, प्रेम व इस्कॉन मंदिर में दर्शन के लिए बृहस्पतिवार को ही हजारों लोग उमड़ पड़े और यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।
रोशनी से नहाए मंदिरों की आभा देखकर सभी चमत्कृत
रोशनी से नहाए इन मंदिरों की आभा हर किसी को आकर्षित कर रही थी। विद्युत झालरों से सजे इन मंदिरों को देख लोगों के कदम वहीं थम गए। उधर, सेवायत गोस्वामी उल्लास के साथ बधाई गुनगुनाते नजर आए। वृंदावन के प्राचीन सप्त देवालयों को शिखर से लेकर चौखट तक रंगबिरंगी झालरों से सजाया गया है। मंदिर के अंदर चौक और गर्भगृह को देशी-विदेशी सुगंधित पुष्पों और गुब्बारों से सजाया गया है।
रोशनी से नहाए इन मंदिरों की आभा हर किसी को आकर्षित कर रही थी। विद्युत झालरों से सजे इन मंदिरों को देख लोगों के कदम वहीं थम गए। उधर, सेवायत गोस्वामी उल्लास के साथ बधाई गुनगुनाते नजर आए। वृंदावन के प्राचीन सप्त देवालयों को शिखर से लेकर चौखट तक रंगबिरंगी झालरों से सजाया गया है। मंदिर के अंदर चौक और गर्भगृह को देशी-विदेशी सुगंधित पुष्पों और गुब्बारों से सजाया गया है।
व्रत नियम और पूजा विधि (Vrat & Rituals)
जन्माष्टमी व्रत के दौरान क्या खाना चाहिए
- जन्माष्टमी व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। आमतौर इस व्रत में अन्न और अनाज का सेवन करने से बचना चाहिए। इस व्रती लोगो अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार निर्जला व्रत या फिर फलाहार कर सकते हैं। इस व्रत में केला, सेब, अनार, पपीता, नाशपाती जैसे फल, दूध-दही, मखाना, साबूदाना, सूखे मेवे, सिंघाड़ा का आटा, आलू, शकरकंद, सेंधा नमक आदि का सेवन कर सकते हैं।
- जन्माष्टमी व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। आमतौर इस व्रत में अन्न और अनाज का सेवन करने से बचना चाहिए। इस व्रती लोगो अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार निर्जला व्रत या फिर फलाहार कर सकते हैं। इस व्रत में केला, सेब, अनार, पपीता, नाशपाती जैसे फल, दूध-दही, मखाना, साबूदाना, सूखे मेवे, सिंघाड़ा का आटा, आलू, शकरकंद, सेंधा नमक आदि का सेवन कर सकते हैं।
जन्माष्टमी पर क्या है कान्हा की संपूर्ण पूजन विधि
- जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें और कान्हा जी का मन में ध्यान रखते हुए व्रत का संकल्प लें।
- जन्माष्टमी पर सुबह घर के मंदिर और पूजा स्थल की अच्छी से साफ-सफाई करें। बाल गोपाल की मूर्ति को सुंदर कपड़े आभूषण, मोरपंख, बांसुरी और फूलों से सजाएं। फिर पालने की भी सजावट करें।
- दिनभर भगवान कृष्ण के नाम, मंत्र, और भजनों का जाप करते हुए फलाहार व्रत रखें और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का पाठ करें।
- जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि कान्हा के अभिषेक करने का खास महत्व होता है। इस अवसर पर निशिता काल में कान्हा जी का पंचामृत से अभिषेक करें। और चंदन, फल-फूल, मेवा, मिठाई और तुलसी अर्पित करें।
- जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें और कान्हा जी का मन में ध्यान रखते हुए व्रत का संकल्प लें।
- जन्माष्टमी पर सुबह घर के मंदिर और पूजा स्थल की अच्छी से साफ-सफाई करें। बाल गोपाल की मूर्ति को सुंदर कपड़े आभूषण, मोरपंख, बांसुरी और फूलों से सजाएं। फिर पालने की भी सजावट करें।
- दिनभर भगवान कृष्ण के नाम, मंत्र, और भजनों का जाप करते हुए फलाहार व्रत रखें और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का पाठ करें।
- जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि कान्हा के अभिषेक करने का खास महत्व होता है। इस अवसर पर निशिता काल में कान्हा जी का पंचामृत से अभिषेक करें। और चंदन, फल-फूल, मेवा, मिठाई और तुलसी अर्पित करें।
भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, दूध, दही, फल का भोग लगाएं और धूप-दीप जलाकर आरती करें। इसके बाद मध्यरात्रि का इंतजार करते हुए भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाएं। इस रात को शंख, घंटी बजाएं और कान्हा जी पालने में झुलाएं और आरती-भजन करें।
जन्माष्टमी पर क्या न करें ?
- जन्माष्टमी के दिन न केवल अपने सात्विक भोजन का ध्यान रखें बल्कि अपने आचरण की शुद्धता का भी ध्यान रखने की परंपरा होती है। जन्माष्टमी पर किसी को अपशब्द, वाद-विवाद, अपमान करने से बचें। इस दिन पूरे घर में शांति और भक्तिमय वातावरण बनाए रखें।
- जन्माष्टमी के दिन न केवल अपने सात्विक भोजन का ध्यान रखें बल्कि अपने आचरण की शुद्धता का भी ध्यान रखने की परंपरा होती है। जन्माष्टमी पर किसी को अपशब्द, वाद-विवाद, अपमान करने से बचें। इस दिन पूरे घर में शांति और भक्तिमय वातावरण बनाए रखें।
ऐसे सजाएं कान्हा की झांकी
घर में झांकी बनाने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल या किसी साफ जगह की अच्छी तरह सफाई करें। एक छोटी चौकी पर पीला, लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर बाल गोपाल को विराजमान करें। झांकी को सजाने के लिए पालना, झूला, मोरपंख, बांसुरी, फूल और छोटे मिट्टी के दीपक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
अगर घर में पर्याप्त जगह है तो गोकुल या नंद भवन की थीम पर छोटा-सा दृश्य बनाया जा सकता है। इसके लिए मिट्टी की मटकियां, छोटे बर्तन, गाय-बछड़े की प्रतिमाएं और फूलों का इस्तेमाल करें। भगवान के जन्म के समय परिवार के सदस्य मिलकर पालना झुला सकते हैं।
घर में झांकी बनाने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल या किसी साफ जगह की अच्छी तरह सफाई करें। एक छोटी चौकी पर पीला, लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर बाल गोपाल को विराजमान करें। झांकी को सजाने के लिए पालना, झूला, मोरपंख, बांसुरी, फूल और छोटे मिट्टी के दीपक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
अगर घर में पर्याप्त जगह है तो गोकुल या नंद भवन की थीम पर छोटा-सा दृश्य बनाया जा सकता है। इसके लिए मिट्टी की मटकियां, छोटे बर्तन, गाय-बछड़े की प्रतिमाएं और फूलों का इस्तेमाल करें। भगवान के जन्म के समय परिवार के सदस्य मिलकर पालना झुला सकते हैं।
जन्माष्टमी: रात 12 बजे नहीं जा सकते मंदिर, तो कृष्ण जन्म के समय घर पर इस विधि से करें पूजा
जन्माष्टमी के दिन भक्त पूरे श्रद्धाभाव से कान्हा की पूजा करते हैं और आधी रात को उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। हालांकि कई लोगों के लिए रात में मंदिर जाना संभव नहीं होता। ऐसे में आइए जानते हैं कि घर पर ही पूरे भक्तिभाव के साथ कृष्ण जन्मोत्सव कैसे मना सकते हैं। जन्माष्टमी की रात निशीथ काल में करीब 12 बजे पूजा की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण के ध्यान से करें। सबसे पहले घर के पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और गणेश जी के साथ अपने इष्ट देव का स्मरण करें। इसके बाद बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद भगवान को साफ और सुंदर वस्त्र पहनाएं।
लड्डू गोपाल को मुकुट, मोरपंख, बांसुरी, चंदन, फूल और अन्य पूजा सामग्री से सजाएं। इसके बाद भगवान को अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें। श्रद्धा के साथ मंत्रों का जाप करते हुए कान्हा का ध्यान करें।कृष्ण जन्म के समय बजाएं शंख और घंटी
आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय होने पर शंख और घंटी बजाकर जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। इसके बाद कान्हा की आरती करें और उन्हें माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाएं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर कृष्ण भजन और पारंपरिक जन्मोत्सव गीत गा सकते हैं। इससे घर का वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।
आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय होने पर शंख और घंटी बजाकर जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। इसके बाद कान्हा की आरती करें और उन्हें माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाएं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर कृष्ण भजन और पारंपरिक जन्मोत्सव गीत गा सकते हैं। इससे घर का वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।
















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