जयपाल जाट लिखते हैं
एक पिता के सामने बेटे की अर्थी… शायद इससे बड़ा दुःख कोई नहीं
एक पिता के सामने जब उसके जवान बेटे की अर्थी उठती है, तो उस पल की पीड़ा को शब्दों में बयां करना शायद संभव नहीं।
जिसने जन्म लिया है, उसे एक दिन इस संसार से जाना ही है, लेकिन अपनी उम्र से पहले, अपने सपनों को अधूरा छोड़कर किसी नौजवान का यूं चले जाना पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ देता है।
आज ऐसा ही हृदयविदारक दृश्य था।
पत्रकार भूपेंद्र शर्मा के 17 वर्षीय पुत्र आर्यन शर्मा का असमय निधन हो गया। आर्यन इंदौर में रहकर CA की पढ़ाई कर रहा था। आंखों में बड़े सपने थे और मन में अपने परिवार दादा-दादी, मां और पिता के सपनों को पूरा करने का जुनून। बहुत ही शर्मीला सा भोलापन लिए धीमी आवाज में बात करने वाला आर्यन मुझे अक्सर मिलता था,बड़े ही शालीन तरीके से , कभी उसे जोर से बात करते नहीं देखा। बस हमेशा एक ही बात कहता था मुझे कुछ करना है और इसीलिये आगे की पढ़ाई करने इंदौर चला गया। और ऐसा गया कि फिर हमारे बीच में लौटा ही नहीं और न कभी लौटेगा।
आर्यन अभी जिंदगी को ठीक से समझ भी नहीं पाया था
अभी तो उसे बहुत कुछ देखना था, बहुत कुछ हासिल करना था।
इसी बीच उसे बुखार आया। सामान्य-सा लगने वाला बुखार। हम अक्सर बुखार को बहुत हल्के में लेते हैं—दवाई लो और ठीक हो जाएगा। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि आर्यन के लिए यही बुखार जिंदगी और मौत के बीच की आखिरी कड़ी बन जाएगा।
एक दिन बुखार और अगले दिन पेट खराब होने के साथ उल्टियां शुरू हो गईं। आर्यन अपने पिता से अपनी तबीयत के बारे में बात कर ही रहा था कि अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। उसके मित्र उसे इंदौर के मेदांता अस्पताल लेकर पहुंचे।
शुरुआत में चिकित्सकों को हार्ट अटैक की आशंका हुई, लेकिन ECG और अन्य जांचों के बाद स्थिति कुछ और सामने आई। जांच में पता चला कि आर्यन की किडनी और हार्ट गंभीर रूप से प्रभावित हो चुके थे।
डॉक्टरों की टीम ने उसे वेंटिलेटर पर रखा। करीब 20 घंटे तक जिंदगी बचाने की पूरी कोशिश होती रही। परिवार की उम्मीदें डॉक्टरों की कोशिशों से जुड़ी रहीं… लेकिन आखिरकार सारी कोशिशें नियति के आगे हार गईं।
आखिर ऐसा कौन-सा बुखार था, जिसने महज दो दिनों में एक हंसते-खेलते, सपनों से भरे 17 वर्षीय नौजवान को काल का ग्रास बना लिया?
आर्यन चला गया…
अपने पीछे छोड़ गया दादा-दादी की सूनी आंखें, मां की ममता का अधूरा संसार और पिता के सीने में ऐसा दर्द, जिसे शायद कोई शब्द कभी कम नहीं कर सकता।
आज आर्यन की अर्थी देखकर हर आंख नम थी।
लेकिन उस पिता के हृदय में क्या तूफान होगा, जिसने अपने हाथों से अपने जवान बेटे की अर्थी को विदा किया…
उस पिता का मन आज ईश्वर से यही पूछ रहा है—
हे ईश्वर…घर का चिराग बुझा दिया ?
हे ईश्वर... इस बात की नाराजगी और सवाल हर जन्म में रहेगा। ”
इस सवाल का जवाब शायद किसी के पास नहीं है।
आर्यन, तुम बहुत जल्दी चले गए…
तुम्हारे सपने अधूरे रह गए, लेकिन तुम्हारी यादें हमेशा जीवित रहेंगी।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति… ॐ शांति… ॐ शांति… 🙏💐
I Miss You आर्यन… 😭











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