राहुल बोले- सरकार ने चुपचाप यूपी पर फीस का रास्ता खोला, बीजेपी का जवाब- झूठा आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने चुपचाप यूपी पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। सरकार कहती है कि कोई फीस नहीं ली जाएगी, लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से। ग्राहक की जेब से आएगी। भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस का दावा झूठा है।
ऐसे समझिए क्या है नया बबाल
सवाल: क्या ₹2,000 UPI पेमेंट की नई लिमिट है?
जवाब: नहीं। ₹2,000 कोई नई पेमेंट लिमिट
नहीं है। UPI से इससे ज्यादा रकम भेजी जा सकती है। यह सिर्फ फीस से जुड़ी सीमा है। यानी ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चार्ज नहीं लगा सकते। अगर लगाना है तो सरकार को नियम बनाने होंगे।
सवाल: अगर मुझे ₹2,500, ₹5,000 या ₹10,000 का UPI पेमेंट करना हो तो क्या फीस लगेगी?
जवाब: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% की नई फीस लागू की गई है। हालांकि चार्ज की मैक्सिमम लिमिट 300 रुपए तक की गई है। ये आपके ट्रांजैक्शन की रकम पर निर्भर होगा।
सवाल: आरएस2,000 से ज्यादा के पेमेंट को लेकर इतनी चर्चा क्यों है?
जवाब: इसकी बड़ी वजह बड़े कारोबारी पेमेंट हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों को आरएस198 लाख करोड़ यूपीआई से पेमेंट हुए। इनमें आरएस2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन सिर्फ 4% हुए, लेकिन इनकी कुल वैल्यू आरएस131 लाख करोड़ थी। जो कुल पेमेंट का 66% है।
सवाल: अगर मैं दोस्त या परिवार के किसी सदस्य को आरएस5,000 या आरएस10,000 भेजूं तो क्या फीस लगेगी?
जवाब: नहीं। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले प2प (पर्सन-तो-पर्सन) पेमेंट मुफ्त रहेंगे। इसलिए दोस्त, परिवार या किसी दूसरे व्यक्ति को बड़ी रकम यूपी से भेजने पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
सवाल: फिर यह फीस किन पेमेंट पर लग रही है?
जवाब: मुख्य चर्चा मर्चेंट पेमेंट को लेकर है।
यानी जब आप किसी दुकान, कारोबारी या सर्विस प्रोवाइडर को यूपी से पेमेंट करते हैं। तो उस ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू हो जाएगा, तो तय सीमा से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट इसके दायरे में आ जाएंगे।
सवाल: एमडीआर क्या होता है और यह किससे लिया जाता है?
जवाब: एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट। आसान भाषा में यह डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा के बदले दुकानदार या कारोबारी से लिया जाने वाला शुल्क है। कार्ड पेमेंट में इस तरह का शुल्क पहले से मौजूद है। अगर यूपी पर एमडीआर लागू होता है, तो यह मुख्य रूप से मर्चेंट से जुड़ा शुल्क होगा।
सवाल: एमडीआर का असर ग्राहक पर पड़ेगा या दुकानदार पर?
जवाब: अभी इस बारे में अंतिम व्यवस्था तय नहीं है। एमडीआर मर्चेंट से जुड़ा शुल्क है, इसलिए इसका सीधा असर दुकानदार या कारोबारी की पेमेंट लागत पर पड़ सकता है। हालांकि, अगर कारोबारी की लागत बढ़ती है तो वह इसे अपनी कारोबारी लागत में शामिल कर सकता है। इसका असर सामान या सेवा की कीमत पर पड़ेगा या नहीं, यह आगे के नियमों और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
सवाल: सरकार कानून में बदलाव क्यों करने जा रही है?
जवाब: सरकार का कहना है कि यूपी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसे सुरक्षित रखने, साइबर फ्रॉड रोकने, तकनीक अपग्रेड करने और पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में लगातार खर्च होता है। कानून में बदलाव को इसी लंबे समय की जरूरत से जोड़ा गया है। आम यूजर के रोजमर्रा के छोटे पेमेंट पर फिलहाल कोई सीधा असर नहीं है।
यूपी कैसे काम करता है?











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