इस साल सर्व पितृ अमावस्या पर गजच्छाया योग का निर्माण हो रहा है, जो सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में पितरों के निमित्त किया गया तर्पण और दान उन्हें अक्षत तृप्ति प्रदान करता है और परिवार को पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है।
इस बार का विशेष संयोग
इस साल सर्व पितृ अमावस्या पर गजच्छाया योग का निर्माण हो रहा है, जो सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में पितरों के निमित्त किया गया तर्पण और दान उन्हें अक्षत तृप्ति प्रदान करता है और परिवार को पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है।
सर्व पितृ अमावस्या का महत्व
पितृ पक्ष का यह अंतिम दिन उन सभी ज्ञात और अज्ञात पूर्वजों के श्राद्ध के लिए समर्पित होता है, जिनकी मृत्यु की तिथि हमें ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध हम पितृ पक्ष के बाकी दिनों में नहीं कर पाते हैं। इस दिन तर्पण करने के बाद गाय, कौवे, कुत्ते, चींटी और ब्राह्मणों को भोजन (पंचबली भोग) कराया जाता है। इसके ठीक अगले दिन यानी 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो जाएगी।
पंचांग के अनुसार,
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का विवरण इस प्रकार है:
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 9 अक्टूबर 2026 को रात 09:35 बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर 2026 को रात 09:19 बजे तक
मुख्य तिथि (उदयातिथि): शास्त्रों में दोपहर के समय श्राद्ध और तर्पण करने का विधान है। 9 अक्टूबर को दोपहर में अमावस्या तिथि न होने के कारण, उदयातिथि के नियम से 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को ही सर्व पितृ अमावस्या का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जा रहा है।
श्राद्ध-तर्पण के शुभ मुहूर्त (10 अक्टूबर 2026)
ऋषियों और पंचांग के अनुसार, पितरों की विदाई और श्राद्ध कर्म के लिए 10 अक्टूबर को निम्नलिखित समय सबसे उत्तम हैं:
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:31 बजे से दोपहर 01:17 बजे तक
- अपराह्न काल (श्राद्ध का मुख्य समय): दोपहर 01:18 बजे से दोपहर 03:37 बजे तक।











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