माँ राजेश्वरी मंदिर से शुरू हुआ सफर
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 की रात ठीक 9:00 बजे शहर के सुप्रसिद्ध श्री माँ राज राजेश्वरी मंदिर पर मैया रानी की विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती के साथ इस यात्रा का विधि-विधान से शुभारंभ हुआ। यात्रा शुरू होते ही पूरा मार्ग "जय माता दी" और "हारे के सहारे की जय" के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 की रात ठीक 9:00 बजे शहर के सुप्रसिद्ध श्री माँ राज राजेश्वरी मंदिर पर मैया रानी की विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती के साथ इस यात्रा का विधि-विधान से शुभारंभ हुआ। यात्रा शुरू होते ही पूरा मार्ग "जय माता दी" और "हारे के सहारे की जय" के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।
रास्ते भर भक्तों का हुआ भव्य स्वागत
मैया के दरबार से दंडवत करते हुए निकले 40 भक्तों का कारवां जैसे ही आगे बढ़ा, रास्ते में खड़े आम नागरिकों और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका हौसला बढ़ाया। यह यात्रा गुरुद्वारा चौक और झांसी तिराहे से होते हुए आगे बढ़ी। इस दौरान सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। देर रात तक चले इस आयोजन में सुरक्षा और व्यवस्था को संभालने के लिए समिति के सेवादारों के साथ स्थानीय लोग भी मुस्तैद दिखे।
मैया के दरबार से दंडवत करते हुए निकले 40 भक्तों का कारवां जैसे ही आगे बढ़ा, रास्ते में खड़े आम नागरिकों और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका हौसला बढ़ाया। यह यात्रा गुरुद्वारा चौक और झांसी तिराहे से होते हुए आगे बढ़ी। इस दौरान सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। देर रात तक चले इस आयोजन में सुरक्षा और व्यवस्था को संभालने के लिए समिति के सेवादारों के साथ स्थानीय लोग भी मुस्तैद दिखे।
गुना बाईपास स्थित प्राचीन मंदिर पर हुआ समापन
कठिन साधना और कड़े नियमों का पालन करते हुए सभी 40 भक्त कड़कड़ाती रात में जमीन पर दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते रहे। यात्रा का अंतिम पड़ाव गुना बाईपास स्थित शहर का प्रसिद्ध प्राचीन माँ चिंतपूर्णी खाटूश्यामजी मंदिर रहा, जहाँ पहुंचकर यह भव्य यात्रा संपन्न हुई। मंदिर परिसर में समिति द्वारा बाबा श्याम और माता रानी का विशेष शृंगार किया गया था। यात्रा पूर्ण होने पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और समिति के पदाधिकारियों ने इस सफल व ऐतिहासिक आयोजन के लिए सभी नगरवासियों का आभार व्यक्त किया।
कठिन साधना और कड़े नियमों का पालन करते हुए सभी 40 भक्त कड़कड़ाती रात में जमीन पर दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते रहे। यात्रा का अंतिम पड़ाव गुना बाईपास स्थित शहर का प्रसिद्ध प्राचीन माँ चिंतपूर्णी खाटूश्यामजी मंदिर रहा, जहाँ पहुंचकर यह भव्य यात्रा संपन्न हुई। मंदिर परिसर में समिति द्वारा बाबा श्याम और माता रानी का विशेष शृंगार किया गया था। यात्रा पूर्ण होने पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और समिति के पदाधिकारियों ने इस सफल व ऐतिहासिक आयोजन के लिए सभी नगरवासियों का आभार व्यक्त किया।












सच्ची और अच्छी खबरें पढ़ने के लिए लॉग इन कीजिये "मामा का धमाका डॉट कॉम"।
ये है, आपकी अपनी आवाज।
फोन कीजिये। खबर भेजिये वाट्सअप नम्बर 98262 11550 या मेल कीजिये 550vip@gmail.com
कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें