यह आदेश जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। इससे पहले, मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बहाने कार्रवाई रुकी हुई थी, लेकिन अब प्रशासन की नजरें अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
विवाद का मुख्य कारण:
- नगर पालिका ने 1960 में एबी रोड पर स्थित झांसी तिराहे के पास ब्लॉक क्रमांक 1 से 4 की जमीन 25 साल की लीज पर दी थी।
- नियमानुसार लीज खत्म होने से 6 महीने पहले इसके नवीनीकरण (रिन्यूअल) के लिए आवेदन करना जरूरी था, लेकिन फर्म ने समय पर आवेदन नहीं किया।
- नवीनीकरण न होने के कारण यह मामला अदालत पहुंचा। पिछले महीने ही हाईकोर्ट ने नगर पालिका शिवपुरी के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसके बाद नगर पालिका ने कब्जा लेने के लिए नोटिस जारी किए थे।
- अधिकारियों की मुस्तैदी और याचिका की जल्दबाजी:
जमीन खाली कराने के लिए नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा खुद मौके पर पहुंची थीं, लेकिन उस समय प्रशासन और पुलिस का सहयोग न मिलने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई थी क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन बताया गया था। याचिकाकर्ता मेसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स ने इस विवाद में 28 सितंबर 2026 को याचिका दायर की थी, जो 30 सितंबर को पंजीकृत हुई। इसके महज 6 दिन बाद, 6 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। दूसरी ओर, पंप संचालक समीर गांधी का कहना है कि उन्हें 6 महीने का समय मिला है, हालांकि अभी कोर्ट का पूरा लिखित आदेश जारी होना बाकी है।











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