शिवपुरी। शहर भर में कोतवाली पुलिस पर हुई बड़ी कार्रवाई की चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही। वो भी तब जबकि टी आई रोहित दुबे जिन्हें दूसरी बार कोतवाली की कमान सौंपी गई थी और वे संभलकर जिम्मेदारी संभाल रहे थे ऐसे में अचानक उन्हें पुलिस लाइन जाना पड़ा ? आखिर क्यूं ये जनता को समझ नहीं आ रहा। शायद इसलिए की भले ही रोहित अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे लेकिन उनके अधीनस्थ स्टाफ ने अनुशासनहीनता की सारी हदें लांघ दी। सूत्रों की मानें तो जनता के रक्षक खुद दुश्मन की तरह आपस में लड़ बैठे वो भी कोतवाली से लेकर शहर के हृदय स्थल तक और जनता के सामने, शायद एक प्रभारी होने के नाते स्टाफ की इसी भूल ने रोहित को लाइन भिजवा डाला है। अन्यथा सभी जानते है कि रोहित ने नशा मुक्ति की दिशा में ड्रग पकड़ने में अग्रणी भूमिका निभाई जबकि जागरूकता में भी सबसे आगे अभियान की डोर थामी। इतना ही नहीं जहां अन्य थाना क्षेत्र में डीजे दम से बजे लेकिन रोहित ने कोतवाली इलाके में आवाज का गला घोंटे रखा। कई अन्य मामलों की गुत्थी भी रोहित ने बखूबी सुलझाई। यही कारण है कि मीडिया ने उनके लाइन जाने पर लिखा
तो आमजन भी सोशल प्लेटफॉर्म पर उन्हें हटाए जाने के निर्णय पर एसपी से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।
ये लिखा खत
जय माई की 🙏 माननीय पुलिस अधीक्षक महोदय, शिवपुरी से विनम्र निवेदन 🙏
कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी का सम्मान हो, निष्पक्ष जाँच हो और किसी के साथ अन्याय न हो।
मैं स्वयं इस बात का प्रत्यक्ष गवाह हूँ कि जब हमारी मानव वेलफेयर सोसाइटी द्वारा गांधी पार्क में रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था, उस समय टीआई श्री रोहित दुबे जी अपनी पूरी टीम के साथ रात लगभग 11 से 11:30 बजे तक कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्था संभाल रहे थे, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
मैंने स्वयं उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए देखा है। ऐसे में उसी दौरान कोतवाली में घटित घटना के लिए उनकी भूमिका और जवाबदेही की निष्पक्ष जाँच किए बिना उन्हें निलंबन की सजा देना कई सवाल खड़े करता है।
मेरा विनम्र सवाल है कि यदि कोई घटना उस समय हुई, जब अधिकारी स्वयं शहर में कानून-व्यवस्था संभालने में व्यस्त था, तो क्या यह देखना जरूरी नहीं है कि उस घटना में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी और उसे इसकी जानकारी थी भी या नहीं?
हम यह नहीं कहते कि किसी की गलती को नजरअंदाज किया जाए। यदि कोई दोषी है, तो नियमानुसार कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए। लेकिन किसी अन्य की गलती का खामियाजा किसी ऐसे अधिकारी को क्यों भुगतना पड़े, जो उसी समय जनता की सुरक्षा और सुविधा के लिए अपनी ड्यूटी निभा रहा था?
माननीय पुलिस अधीक्षक महोदय, आपसे करबद्ध निवेदन है कि टीआई श्री रोहित दुबे जी के निलंबन संबंधी कार्रवाई पर पुनर्विचार करें और सभी तथ्यों एवं उनकी उस समय की ड्यूटी को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष समीक्षा कराएँ। यदि जाँच में उनकी जिम्मेदारी सिद्ध नहीं होती है, तो उन्हें न्याय प्रदान किया जाए।
पुलिस प्रशासन का सम्मान हम सभी करते हैं। हमारी यह अपील किसी कार्रवाई का विरोध मात्र नहीं, बल्कि निष्पक्षता और न्याय की अपेक्षा है।
जनता की सेवा करने वाले अधिकारियों का मनोबल भी बना रहना चाहिए। न्याय तभी सार्थक है, जब वह तथ्यों के आधार पर हो।
🙏 न्याय की अपेक्षा के साथ।
— एक प्रत्यक्षदर्शी एवं जागरूक नागरिक भैया भैया
जय माई की 🙏 माननीय पुलिस अधीक्षक महोदय, शिवपुरी से विनम्र निवेदन 🙏
कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी का सम्मान हो, निष्पक्ष जाँच हो और किसी के साथ अन्याय न हो।
मैं स्वयं इस बात का प्रत्यक्ष गवाह हूँ कि जब हमारी मानव वेलफेयर सोसाइटी द्वारा गांधी पार्क में रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था, उस समय टीआई श्री रोहित दुबे जी अपनी पूरी टीम के साथ रात लगभग 11 से 11:30 बजे तक कार्यक्रम स्थल पर व्यवस्था संभाल रहे थे, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
मैंने स्वयं उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए देखा है। ऐसे में उसी दौरान कोतवाली में घटित घटना के लिए उनकी भूमिका और जवाबदेही की निष्पक्ष जाँच किए बिना उन्हें निलंबन की सजा देना कई सवाल खड़े करता है।
मेरा विनम्र सवाल है कि यदि कोई घटना उस समय हुई, जब अधिकारी स्वयं शहर में कानून-व्यवस्था संभालने में व्यस्त था, तो क्या यह देखना जरूरी नहीं है कि उस घटना में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी और उसे इसकी जानकारी थी भी या नहीं?
हम यह नहीं कहते कि किसी की गलती को नजरअंदाज किया जाए। यदि कोई दोषी है, तो नियमानुसार कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए। लेकिन किसी अन्य की गलती का खामियाजा किसी ऐसे अधिकारी को क्यों भुगतना पड़े, जो उसी समय जनता की सुरक्षा और सुविधा के लिए अपनी ड्यूटी निभा रहा था?
माननीय पुलिस अधीक्षक महोदय, आपसे करबद्ध निवेदन है कि टीआई श्री रोहित दुबे जी के निलंबन संबंधी कार्रवाई पर पुनर्विचार करें और सभी तथ्यों एवं उनकी उस समय की ड्यूटी को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष समीक्षा कराएँ। यदि जाँच में उनकी जिम्मेदारी सिद्ध नहीं होती है, तो उन्हें न्याय प्रदान किया जाए।
पुलिस प्रशासन का सम्मान हम सभी करते हैं। हमारी यह अपील किसी कार्रवाई का विरोध मात्र नहीं, बल्कि निष्पक्षता और न्याय की अपेक्षा है।
जनता की सेवा करने वाले अधिकारियों का मनोबल भी बना रहना चाहिए। न्याय तभी सार्थक है, जब वह तथ्यों के आधार पर हो।
🙏 न्याय की अपेक्षा के साथ।
— एक प्रत्यक्षदर्शी एवं जागरूक नागरिक भैया भैया
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