नपा खजाने को करीब ₹2 करोड़ का नुकसान: गायत्री शर्मा
प्रेसवार्ता में मीडिया से बातचीत करते हुए नपा अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने कहा कि नगर पालिका ने इस बेशकीमती जमीन के लिए सालों तक कानूनी लड़ाई लड़ी है। इस लंबी कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के चक्कर काटने में जनता का पैसा और नगर पालिका का भारी संसाधन खर्च हुआ है। अध्यक्ष ने दावा किया कि यदि इस जमीन का किराया और कानूनी प्रक्रिया के खर्च का पूरा हिसाब लगाया जाए, तो करीब 2 करोड़ रुपये की राशि नगर पालिका के हिस्से में आ सकती है। अगर यह भारी-भरकम राशि समय पर नगर पालिका को हस्तांतरित की जाती, तो संस्था की वित्तीय स्थिति काफी मजबूत हो सकती थी। लेकिन कोर्ट का स्पष्ट आदेश होने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी जमीन खाली कराने की ठोस कार्रवाई से कतरा रहे हैं।
"CMO जानबूझकर दे रहे हैं स्टे लाने का मौका"
नपा अध्यक्ष ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) यशवंत राठौड़ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने मीडिया को बताया कि उन्होंने इस संबंध में सीएमओ को कई बार लिखित निर्देश और पत्राचार किया है, लेकिन सीएमओ उनके फोन तक रिसीव नहीं कर रहे हैं। गायत्री शर्मा ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि पेट्रोल पंप संचालक समीर गांधी को सुप्रीम कोर्ट जाने और वहां से स्टे ऑर्डर (स्थगन आदेश) लाने का जानबूझकर मौका दिया जा रहा है। अधिकारियों की इस लचर कार्यप्रणाली की वजह से यह मामला एक बार फिर लंबा खिंच सकता है, जिससे नगर पालिका करोड़ों की संपत्ति का कब्जा पाने से वंचित रह जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि नगरीय प्रशासन पूरी ईमानदारी से कदम उठाए, तो 5 अक्टूबर तक इस जमीन को पूरी तरह खाली कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वे एसपी और कलेक्टर को भी लिखित मौखिक अवगत करा चुकी हैं। इधर मीडिया के साथियों ने बताया कि नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा ने सोमवार को पेट्रोल पंप से खुद अतिक्रमण हटाने की बात कही है।
पेट्रोल पंप संचालक ने दी सफाई
नपा अध्यक्ष के इन तीखे आरोपों के बीच पेट्रोल पंप संचालक समीर गांधी का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि झांसी तिराहा पेट्रोल पंप का यह मामला अब देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में पहुंच चुका है। नगर पालिका की ओर से भी कोर्ट में केविएट दाखिल की गई है। समीर गांधी ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को तय है, इसलिए फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण सभी पक्षों को कानून के दायरे में रहकर ही कोई कदम उठाना चाहिए। वैसे भी नपा ने हमें इस नोटिस से पूर्व कोई नोटिस नहीं दिया साथ ही सुप्रीम कोर्ट के अनुसार नोटिस 15 दिन की अवधि का देना चाहिए जिसे 10 दिन का दिया है जो कानूनन गलत है। जब उन्हें बताया कि नपाध्यक्ष सोमवार को हितेचि लेकर खुद अतिक्रमण हटाने वाली है तो गांधी ने कहा कि जमाने जीवन भर कानून का पालन किया है आगे भी करेंगे लेकिन अगर कोई हमारे विरुद्ध कारवाई करे तो कानून के हिसाब से उसे करना चाहिए ऐसा हमारा कहना है।
इधर नगर के लोगों के कुछ ये हैं नपा से सवाल
नपा ने जो नोटिस भेजा है वो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और मध्य प्रदेश अचल संपत्ति रूल्स नंबर 15 के हिसाब से गलत है तो आप उस जमीन को खाली कैसे करवा सकते है? इस हिसाब से आपको नया नोटिस भेजना होगा 15 दिन का आपको सामने वाले को सुनने का मौका देना होगा। क्या आप एक पेट्रोल पंप का कब्जा या डिमोलिशन कर सकते है क्योंकि वो एक ज्वलीनशील पदार्थ है। जिसके लिए बहुत सारे लाइसेंस लेने होते है और जो केंद्र सरकार की संपत्ति है। क्या आप इस जमीन को माननीय सर्वोच्च न्यायालय (supreme court) जिसमें आप नगर पालिका खुद एक पार्टी है और नगर पालिका ने कैविएट दायर की हुई है बिना सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के खाली करवा सकते है? क्या आप पब्लिक प्रॉपर्टी को मध्य प्रदेश पब्लिक प्रॉपर्टी एविक्शन के तहत बिना एविक्शन सूट न्यायालय में वाद दायर किए बिना खाली करा सकते है।
बिना कानून का पालन किए कैसे खाली कर सकते है। यह कोई अतिक्रमण नहीं है ये बकायदा लीज है कानूनी कार्यवाही तो आपको पूर्ण करनी होगी।











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