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#mamakadhamakanews: 'अपना घर' स्थापना दिवस: सेवा का दिखावा नहीं, दुआओं का सौदा है 'अपना घर आश्रम': डॉ. बी.एम. भारद्वाज

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सोमवार, 27 जुलाई 2026

#shivpuri शिवपुरी। मानसिक रूप से दिव्यांग और बेसहारा प्रभूजियों (आश्रम के निवासियों) की सेवा में जुटे 'अपना घर आश्रम' के स्थापना दिवस समारोह में उस वक्त माहौल भावुक हो गया, जब संस्था के संस्थापक डॉ. बी.एम. भारद्वाज ने मंच से सेवा की असली परिभाषा समझाई। भरतपुर से विशेष रूप से पहुंचे डॉ. भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा कि अपना घर आश्रम में की जा रही सेवा, जीवन की कोई आम सेवा नहीं है बल्कि यह 'बिरली सेवा' है। उन्होंने सेवा के मार्ग पर चलने वाले लोगों को सचेत करते हुए एक बहुत ही गहरी और सीख देने वाली बात कही। उन्होंने सेवादारों को प्रेरित करते हुए कहा कि यह 'बिरली सेवा' है। भगवान केवल निस्वार्थ भाव से की गई सेवा और दुआओं को स्वीकार करता है, दिखावे की सेवा को नहीं। इससे आने वाली पीढ़ियों को पुण्य मिलता है। 
ये रहे मौजूद 
कार्यक्रम में चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष दीवान अरविंद लाल, शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन, कोलारस के पूर्व विधायक वीरेंद्र रघुवंशी, रमन गोयल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सलाहकार राजेंद्र अग्रवाल, अध्यक्ष रमेश चंद्र अग्रवाल और ब्रह्माकुमारी आश्रम की प्रमुख बी.के. शबनम, अपना घर आश्रम के कानूनी सलाहकार एडवोकेट संजीव बिलगैंया, महेंद्र रावत, वरिष्ठ पत्रकार विपिन शुक्ला मामा भी उपस्थित थे। अंत में सभी सेवादारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन संजीव बांझल ने किया।
दिखावे से बचें, भगवान सिर्फ भाव स्वीकार करता है
डॉ. भारद्वाज ने सेवा में अहंकार और प्रदर्शन को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, "भगवान भी सिर्फ इन दुआओं को स्वीकार करता है। वह दिखावे की सेवा स्वीकार नहीं करता।" उन्होंने उपस्थित सेवादारों और समाजसेवियों से अपील की कि वे इस पवित्र अनुष्ठान को केवल अंतरात्मा की शुद्धि और परोपकार के लिए करें, इसे किसी भी तरह के दिखावे की वस्तु या मंच न बनने दें।
सीधे पीढ़ियों को मिलती हैं प्रभूजियों की दुआएं
आश्रम में रहने वाले प्रभूजियों की सेवा को उन्होंने सीधे ईश्वर की भक्ति से जोड़ा। डॉ. भारद्वाज ने कहा कि यह एक ऐसा पावन मार्ग है, जहां निस्वार्थ भाव से की गई सेवा के बदले जो असीम दुआएं मिलती हैं, वे सीधे व्यक्ति की पूरी पीढ़ी को तर देती हैं। इन बेसहारा लोगों के चेहरे पर आने वाली मुस्कान ही इस सेवा का सबसे बड़ा पुरस्कार है।
आश्रम में लिए गए बड़े फैसले:
डॉ. भारद्वाज के इन्हीं सेवा भावों से प्रेरित होकर शिवपुरी के अपना घर आश्रम की साधारण सभा में कुछ ऐतिहासिक निर्णय भी लिए गए:
पूर्व विधायक वीरेंद्र रघुवंशी देंगे वाशिंग मशीन के लिए 3 लाख
अपना घर आश्रम से आरंभ से जुड़कर लगातार सेवा करते आ रहे पूर्व विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने एक बार फिर दान राशि की घोषणा की। उन्होंने कपड़ों की सफाई के लिए अपनी ओर से 3 लाख रुपए की वॉशिंग मशीन देने का वादा किया, ताकि 192 प्रभूजियों के कपड़े आसानी से धुले जा सकें। बता दें कि उनके सेवा संस्कार से उनके बेटे ने अपना घर आश्रम परिसर में एक कमरा बनवाया लेकिन इस बात की भनक माता पिता को नहीं लगने दी। जब उसकी ओपनिंग करने पिता वीरेंद्र पहुंचे तो उन्हें जानकारी हुई। 
सोलर प्लांट की सौगात
बिजली खर्च को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए 12 लाख की लागत से सोलर प्लांट लगाया जाएगा।
विकास कार्य
प्रभूजियों के बेहतर रहन-सहन के लिए 120 बेड का नया पुरुष आवास, आधुनिक वाशिंग मशीनें और गोशाला में जीव दया चिकित्सालय जैसी करोड़ो रुपए की विकास योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
महायज्ञ बनी बेसहारा प्रभूजियों की सेवा, 15 अगस्त से आश्रम में पॉलीथिन पर पूरी तरह बैन
मानसिक रूप से दिव्यांग और बेसहारा प्रभूजियों की सेवा में समर्पित 'अपना घर आश्रम' शिवपुरी का स्थापना दिवस समारोह उत्साह और सेवा संकल्प के साथ रविवार सुबह 10:30 बजे से शुरू हुआ। साधारण सभा की कार्यवाही में संस्था के भविष्य को लेकर कई बड़े और ऐतिहासिक निर्णय लिए गए।
प्रभूजियों का आंकड़ा
1251 को मिला सहारा, 363 स्वस्थ होकर घर लौटेआश्रम द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में इस आश्रम में कुल 192 प्रभूजी रह रहे हैं, जिनमें 166 पुरुष और 26 महिलाएं शामिल हैं। संस्था का सेवा ट्रैक रिकॉर्ड बेहद प्रेरणादायक रहा है।
कुल लाभांवित
अब तक इस आश्रम में कुल 1,251 प्रभूजी भर्ती हो चुके हैं।पुनर्वास: इनमें से 363 प्रभूजी पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर वापस जा चुके हैं।
गंभीर चुनौतियां
आश्रम में आए 70 प्रभूजी गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे, जिसके चलते उनका देह विलीन हो गया। वहीं 660 प्रभूजी ऐसे थे, जिन्हें इलाज के लिए भरपूर या अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों में भेजा गया है।
जानिए... किस मुख्य अतिथि और वक्ता ने क्या कहा?
समारोह में पहुंचे विशिष्ट अतिथियों और संस्था के पदाधिकारियों ने अपने विचार रखते हुए प्रभूजियों की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया:
विधायक देवेंद्र जैन ने कहा, "शिवपुरी जिले की विशेष पहचान अपना घर आश्रम की टीम बनी हुई है। यह टीम मानसिक दिव्यांग प्रभूजियों की जो सेवा कर रही है, वह सराहनीय है।" विधायक जी ने आश्रम के बेहतर संचालन और संसाधनों के लिए 10 लाख रुपए की आर्थिक राशि देने की घोषणा की। वहीं अपना घर गौ शाला लुधावली के लिए भी 10 लाख देने की बात कही। 
पूर्व विधायक वीरेंद्र रघुवंशी ने प्रभूजियों के चार्ट पर भगवान के नाम लिखी गई अपील पढ़कर भावुक होते हुए कहा कि जीवन में अमेरिका हो या भारत किसी तरह की करेंसी साथ नहीं जाएगी लेकिन निस्वार्थ सेवा की तो उसका फल जरूर मिलेगा। तथागत फाउंडेशन के प्रमुख आलोक एम. इंदौरिया ने संस्था की पारदर्शिता की तारीफ करते हुए कहा, "समर्पण, विश्वसनीयता और जवाबदेही संस्था तय करती है। यही समर्पण इसे एक अलग पहचान देता है और आश्रम की टीम ने यह सब करके दिखाया है।"
संस्थान के संस्थापक गौरव जैन
उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, "एक समय था जब विषम परिस्थितियों में लोगों को साधन जुटाकर भरतपुर ले जाते थे। आज शिवपुरी में ही 192 से अधिक प्रभूजियों की सेवा होना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।"
वित्तीय लेखा-जोखा और आगामी विकास कार्य
वित्त सचिव गोविंद प्रसाद बंसल ने संस्था का वर्ष 2025-26 का आय-व्यय का बजट प्रस्तुत किया, जिसे सदन ने करतल ध्वनि से पारित किया। इसके साथ ही वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित योजनाओं को सदन के सामने रखा गया:
करोड़ों की लागत से गोशाला विकास: अपना घर गोशाला में 1.20 करोड़ की लागत से 120 बेड का पुरुष आवास बनाया जाएगा।
शेड़ निर्माण
गायों के लिए 20 लाख रुपए की लागत से नए शेड तैयार होंगे।
सोलर प्लांट और गीजर
बिजली का खर्च रोकने के लिए 12 लाख की लागत से सोलर प्लांट और 2 लाख की लागत से सोलर गीजर लगाया जाएगा।
अन्य सुविधाएं
परिसर में पैवर्स ब्लॉक, गोबर गैस प्लांट, और गोशाला में 'जीव दया चिकित्सालय' (जिसकी स्थापना लायंस क्लब ने की है) का विस्तार किया जाएगा।
महिला विंग का गठन और सेवा संकल्प
समारोह के दौरान महिला आश्रम की अध्यक्ष बबिता जैन ने नई कार्यकारिणी की घोषणा की। उपस्थित महिलाओं में किरण उप्पल, भारती जैन, रुचि जैन, अन्नू जैन और बबिता अग्रवाल आदि शामिल हैं। सभी ने सामूहिक रूप से एकत्रित होकर पीड़ित मानवता की सेवा करने का संकल्प लिया।

















#धमाका_न्यूज: पुलिस ने पकड़ा, अरमान उर्फ बल्ला ने चलती बोलेरो की छत पर स्टंट करते हुए वीडियो "इंस्टाग्राम" पर किया था पोस्ट

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गुरुवार, 10 जुलाई 2025

भरतपुर। अगर आपको भी रील बनाने का जुनून है और वो भी खतरनाक स्टंट करते हुए तो हरगिज ऐसा मत कीजिए क्योंकि ये कानूनन जुर्म है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें सोशल मीडिया पर स्टंटबाजी का वीडियो वायरल होने पर भरतपुर एसपी मृदुल कच्छावा के निर्देशन में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। थाना वैर
क्षेत्र के समराया गांव निवासी अरमान उर्फ बल्ला (25) ने चलती बोलेरो गाड़ी की छत पर बैठकर स्टंट करते हुए एक वीडियो "इंस्टाग्राम" पर पोस्ट किया था।  सूचना पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयनारायण मीणा व वृत्ताधिकारी धर्मेन्द्र शर्मा के सुपरविजन में थानाधिकारी नरेन्द्र सिंह राजावत ने टीम के साथ कार्रवाई करते हुए आरोपी को सुभाष चौक, बयाना से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को शांति भंग की धारा 170 बीएनएसएस के तहत गिरफ्तार किया गया है, वहीं स्टंट में प्रयुक्त बोलेरो गाड़ी को 207 एमवी एक्ट के तहत जब्त कर लिया गया है। पुलिस ने बताया कि इस तरह की स्टंटबाजी खुद की और राहगीरों की जान को जोखिम में डाल सकती है, इसलिए इस पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है।








#धमाका_खास_खबर: 24 साल पहले जिसको मान चुके मृत, जिंदा होने की खबर मिली तो पूरा गांव रोया, प. बंगाल से परिवार के साथ आश्रम संस्था लेने पहुंचे भरतपुर

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शनिवार, 17 मई 2025

भरतपुर। बिछड़ों को अपनों से मिलवा कर उनके परिवार को साहस, बल और ऊर्जा प्रदान करने का कार्य अपनाघर कर रहा है। अपनाघर इस समय न सिर्फ मानसिक रूप से बीमार 6000 से भी अधिक प्रभुजनों की देखभाल करने का काम कर रहा है बल्कि पिछले प्रभुजनों को उनके परिजनों को ढूंढ कर उनके परिवार की खुशियों को लौटाने का भी नेक कार्य कर रहा है। अपनाघर इन 25 सालों में अब तक 33000 से भी ज्यादा प्रभुजनों को ठीक कर उनके परिवार से मिलवा चुका है। हर महीने संस्था की सभी ब्रांच में 200 से भी अधिक प्रभुजनों को जो गंभीर अवस्था में आते हैं उनको ठीक कर उनके परिजनों से मिलवा रहा है। ऐसा ही मामला पश्चिम बंगाल का अपनाघर में पहुंचा। वर्ष 2021 से अपनाघर में रह रहीं। मनोरोगी रूपाली हेंब्रम प्रभुजन को परिवार वाले मृत मान चुके थे और उसको वापस जीवित देखने की उम्मीद छोड़ चुके थे। पर, मात्र दो दिन में इंटरनेट के माध्यम से पश्चिम बंगाल उनके परिजनों को ढूंढ कर मिलवाने का कार्य किया। संस्था संस्थापक डॉ बी.एम भारद्वाज बताते हैं कि प्रभुजन रूपाली वर्ष 24 पहले ही अपने घर से निकल आए थीं। जयपुर की एक संस्था के माध्यम से भरतपुर अपनाघर में आई थी। वेस्ट बंगाल की होने की वजह से वह अपनी लोकल भाषा ही बोलती थी, हिंदी ना बोलने की कर उनकी भाषा को हम नहीं समझ पाए थे। अपनाघर में एक अलग से अन्य वार्ड में रखा गया और उनका इलाज शुरू किया गया। जिसके बाद प्रभुजन का इलाज किया। ठीक होने के बाद उन्होंने अपने घर का पता बताया, जिसके बाद हमने 2 दिन पहले इंटरनेट के माध्यम से उनके गांव को ढूंढा और वहां की लोकल एरिया को सर्च किया जिसके बाद एक होटल का मोबाइल नंबर हमें मिला। जिनको फोन कर हमने उनके परिवार वालों से पूछताछ की। क्या इस तरीके से कोई महिला गुमशुदा हुई है शुरुआत में लोगों ने मना कर दिया, लेकिन बाद में जानकारी हुई। हां 24 साल पहले एक महिला घर से लापता हो गई थी जिसके बाद वह उनको लेने के लिए पहुंचे।
प्रभुजन रुपाली आदिवासी समाज से थी। परिवार में सिर्फ एक बेटा और पति व अन्य लोग थे, लेकिन आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थे। इस कारण उनको वापस ले जाने व अपने परिवार से मिलवाने के लिए गांव के मुखिया नानू मुर्मू, विधायक अभिजीत सिन्हा ने खुद के खर्चे पर परिजनों की हवाई जहाज की टिकट कराई। दिल्ली से भरतपुर तक के लिए वाहन को बुक किया। (साभार)
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