* डायरेक्टर माधव टाइगर रिज़र्व को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश
शिवपुरी। शहर की आबादी को पेयजल सप्लाई कराने के लिए लाई गई मड़ीखेड़ा पेयजल परियोजना के प्रथम फेज में जो पाइप लाइन डाली गई और बाद में टाट से निर्मित पाइप बताए गए, फिर इसमें बार बार लीकेज हुए और टाट में पेबंद लगे, नतीजे में और चालीस करोड़ फूंक कर नई डीआई लाइन बिछानी पड़ी और जल सप्लाई हो रही है। लेकिन लाइन बदलने के दौरान पुरानी लाइन को सड़क के किनारे, जंगल में यहां वहां पटक दिया जिसमें जब चाहे आग लगती है। अब एनजीटी ने उस सड़ी लाइन के टुकड़ों को तीस दिन में हटाने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि माधव टाइगर रिजर्व सहित आसपास के वन क्षेत्रों, सड़क किनारे और कृषि क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में मौजूद Glass Reinforced Plastic (GRP) पाइपों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), भोपाल ने सख्त रुख अपनाया है। NGT ने शिवपुरी नगर पालिका को माधव टाइगर रिजर्व में पड़े GRP पाइप और अन्य सामग्री को 30 दिन के अंदर हटाने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
यह महत्वपूर्ण आदेश Original Application No. 207/2026 (CZ), Aditya Shrivastava v. State of Madhya Pradesh & Ors. में 25 सितंबर 2026 को पारित किया गया, जिसमे अभय जैन एवं राशिका नारायण (AOR, सुप्रीम कोर्ट) द्वारा पैरवी की गई।
मामला वर्ष 2023 में सिंध जलावर्धन योजना के तहत मड़ीखेड़ा बांध से शिवपुरी नगरपालिका क्षेत्र के बीच बिछाई गई जलापूर्ति पाइप लाइन को बदले जाने के बाद सामने आया। पाइप लाइन बदलने के बाद बड़ी मात्रा में पुराने GRP पाइप और संबंधित सामग्री को नहीं हटाया गया तथा उनके उचित प्रबंधन एवं नष्ट करने की सही व्यवस्था नहीं की गई। इसके बाद बड़ी मात्रा में GRP सामग्री अलग-अलग स्थानों पर खुले में पड़ी रही। यह स्थिति केवल सड़क किनारे तक सीमित नहीं रही, बल्कि वन क्षेत्रों, कृषि भूमि और विशेष रूप से माधव टाइगर रिजर्व की सीमा के भीतर भी GRP पाइप पड़े पाए गए। संरक्षित वन क्षेत्र में इस तरह बड़ी मात्रा में कचरा पड़ा रहना पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
GRP यानि Glass Reinforced Plastic एक ऐसा पदार्थ है जिसमें प्लास्टिक और ग्लास फाइबर का इस्तेमाल होता है। यह सामान्य कचरे की तरह आसानी से खत्म नहीं होता। लंबे समय तक खुले में पड़े रहने पर इसके छोटे-छोटे कण मिट्टी, पानी और हवा को प्रभावित कर सकते हैं। टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इतनी बड़ी मात्रा में GRP पाइपों का पड़ा रहना केवल कचरे की समस्या नहीं है, बल्कि इससे वन्यजीवों, जंगल और पर्यावरण पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए इन पाइपों को हटाकर उन्हें सही तरीके से खत्म करना जरूरी है।
मामले में आवेदक की मुख्य मांग थी कि सड़क किनारे और जंगल में पड़े GRP पाइप और अन्य कचरा सामग्री को जल्द हटाया जाए, ताकि इससे पर्यावरण को नुकसान न हो। इस पर NGT ने स्पष्ट निर्देश देते हुए शिवपुरी नगर पालिका को 30 दिनों के भीतर GRP पाइप और अन्य कचरा सामग्री हटाने के लिए कहा। साथ ही, माधव टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।












































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