delhi दिल्ली। 8 नवंबर 2026 को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ दीवाली और महालक्ष्मी पूजन मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों के घरों में प्रवेश करती हैं। सुख-समृद्धि और वैभव की प्राप्ति के लिए इस दिन सही मुहूर्त में, सही विधि और नियमों के साथ पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। दीवाली पूजन से जुड़ी मुहूर्त, पूजा विधि और वस्त्रों के नियमों की पूरी जानकारी नीचे दी गई है: 1. लक्ष्मी पूजन के सबसे शुभ मुहूर्त (8 नवंबर 2026)। शास्त्रों के अनुसार, दीवाली की पूजा हमेशा स्थिर लग्न और प्रदोष काल में करना सबसे उत्तम माना जाता है, ताकि घर में लक्ष्मी का स्थायी वास हो।🏠 गृहस्थों और परिवारों के लिए (सर्वोत्तम समय)
- वृष लग्न (शाम का मुहूर्त): शाम 05:54 से रात 07:50 तक
(यह पूजा के लिए पूरे दिन का सर्वश्रेष्ठ समय है क्योंकि इस दौरान प्रदोष काल और स्थिर वृष लग्न दोनों का महासंयोग बन रहा है।) - 🏢 व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकान और ऑफिस के लिए
- कुम्भ लग्न (दोपहर का मुहूर्त): दोपहर 01:26 से दोपहर 02:54 तक
(व्यापारियों के लिए अपनी दुकान या दफ्तर में बही-खाता पूजन और लक्ष्मी आराधना के लिए यह स्थिर लग्न सबसे शुभ है।)
🌌 विशेष साधना और निशिता काल पूजा के लिए- सिंह लग्न (मध्य रात्रि का मुहूर्त): रात 12:55 से देर रात 02:42 तक
(यह समय तंत्र साधना, महालक्ष्मी के विशेष मंत्रों के जाप और फैक्ट्रियों/कारखानों में पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।)
- कुम्भ लग्न (दोपहर का मुहूर्त): दोपहर 01:26 से दोपहर 02:54 तक
🕒 शुभ चौघड़िया मुहूर्त
- लाभ चौघड़िया: सुबह 09:21 से सुबह 10:43 तक
- अमृत चौघड़िया: सुबह 10:43 से दोपहर 12:05 तक
- शुभ चौघड़िया: दोपहर 01:26 से दोपहर 02:47 तक
- 2. पूजन के समय वस्त्रों के नियम और शुभ रंग 👗दीवाली पूजा में वस्त्रों का चयन करते समय रंग और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि रंग हमारे आसपास की ऊर्जा को प्रभावित करते हैं।
- शुभ रंग (क्या पहनें): पूजा के लिए पीला, लाल, गुलाबी, केसरिया या नारंगी रंग के वस्त्र सबसे उत्तम और शुभ माने जाते हैं। पीला रंग भगवान विष्णु और लाल/गुलाबी रंग माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है।
- वर्जित रंग (क्या न पहनें): पूजा के दौरान भूलकर भी काले या गहरे नीले रंग के कपड़े न पहनें। हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों में काले रंग को अशुभ माना जाता है।
- कपड़ों का प्रकार: पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा या धोती-कुर्ता और महिलाओं के लिए साड़ी या सलवार-सूट पहनना श्रेष्ठ है। कपड़े पूरी तरह साफ और धुले हुए होने चाहिए।
- 3. महालक्ष्मी पूजन की संपूर्ण और सरल विधि 🕉️महालक्ष्मी पूजन के लिए घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में एक चौकी स्थापित करें और इस विधि से पूजा संपन्न करें:
- चौकी की स्थापना: चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। बीच में मुट्ठी भर अनाज (चावल) रखकर उस पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती की मूर्तियां/तस्वीर स्थापित करें। ध्यान रहे कि गणेश जी हमेशा लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर हों।
- कलश स्थापना: चौकी के पास एक तांबे या मिट्टी के कलश में पानी, गंगाजल, सिक्का, सुपारी और दूर्वा डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर ऊपर से नारियल (लाल कपड़े में लिपटा हुआ) रखें।
- संकल्प और पवित्रीकरण: अपने हाथ में थोड़ा जल लेकर पूजा का संकल्प लें और स्वयं पर तथा पूजा सामग्री पर 'ॐ पवित्रः अपवित्रो वा...' मंत्र पढ़ते हुए गंगाजल छिड़कें।
- गणेश-लक्ष्मी पूजन: सबसे पहले प्रथम पूजनीय भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें तिलक लगाएं, दूर्वा, मोदक और फूल चढ़ाएं। इसके बाद माता लक्ष्मी का ध्यान करें।
- पंचामृत स्नान और श्रृंगार: माता लक्ष्मी और गणेश जी की धातु की मूर्तियों को गंगाजल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) से स्नान कराएं। वस्त्र, कलावा (मौली), और माता लक्ष्मी को श्रृंगार की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी आदि) अर्पित करें।
- भोग और प्रसाद: माता लक्ष्मी को कमल का फूल या गुलाब का फूल चढ़ाएं। भोग में खील-बताशे, सफेद मिठाइयां (रसगुल्ला या पेड़ा), मखाने की खीर और फल अर्पित करें।
- दीपक प्रज्वलित करना: चौकी पर घी और तेल के दीपक जलाएं। एक मुख्य बड़ा दीपक (अखंड दीप) होना चाहिए जो पूरी रात जलता रहे। अपनी तिजोरी और बही-खातों की भी पूजा करें।
- आरती और क्षमा याचना: कपूर और घी के दीपक से पहले गणेश जी की और फिर माता लक्ष्मी की आरती करें। पूजा के अंत में हाथ जोड़कर अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए माता से क्षमा याचना करें।












































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