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#धमाका_न्यूज: कलेक्टर साहब जब से बदले गये रेडियल गेट तभी से पनपी जलकुंभी, स्टेट कालीन गेट के डिजाइन से 1132 फीट जल स्तर होते ही आगे निकल जाता था कचरा सहित जलकुंभी, चांद पाठा और जाधव सागर में जलकुंभी को लेकर कलेक्टर अर्पित ने की बैठक, करबला पर स्टॉप डेम बनाने से कुछ नहीं होने वाला क्योंकि जब नगर के नाले उफान पर आते हैं तो कोई ताकत पानी को नहीं रोक पाती!

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शिवपुरी। शहर के प्रमुख जलाशय चांद पाठा और जाधव सागर में जलकुंभी एक बड़ी समस्या है। आज कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री Arpit Verma IAS ने जिला वेटलैंड समिति की बैठक में इन्हीं विषयों पर चर्चा की।
प्रमुख जलाशय से जलकुंभी हटाने के लिए निर्देशित किया। कर्बला पर स्टॉप डैम बनाने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
हाइड्रोलिक गेट का निरीक्षण: उन्होंने मुख्य नगरपालिका अधिकारी और परियोजना अधिकारी शहरी विकास अभिकरण निरीक्षण करके हाइड्रोलिक गेट को ठीक तरीके से न खुलने के कारणों का बारीकी से निरीक्षण करने और व्यवस्था में सुधार करने के निर्देश दिए।
हमारी भी सुन लीजिए बचपन से पचपन के हुए इसी शहर में साहब
कलेक्टर साहब जब से चांद पाठा के रेडियल गेट बदले गये तभी से जलकुंभी पनपी है, इसके पहले जब स्टेट कालीन गेट लगे थे उसकी डिजाइन ऐसी थी कि 1132 फीट जल स्तर होते ही कचरा सहित जलकुंभी आगे निकल जाता था। अब हालत ये है कि तीन साल पहले डेम के गेट फसकर रह गए थे तब जल संसाधन विभाग ने डेम टूटने की चेतावनी जारी की थी। अब हालत ये है कि अर्ध चंद्रमा की तरह निर्मित चांद पाठा अपनी आभा खो चुका है। 
नहीं होगा कुछ भी करबला पर पानी रोकने से
कलेक्टर साहब करबला पर स्टॉप डेम बनाने से कुछ नहीं होने वाला क्योंकि जब नगर के नाले उफान पर आते हैं तो कोई ताकत पानी को नहीं रोक पाती।

#धमाका_बड़ी_खबर: इंटरसिटी के बाद अब शिवपुरी ग्वालियर फोरलेन मुड़खेडा के पास सिकरवार ट्रेवल्स की यात्री बस में उठा धुआं, चीखते हुए जान बचाकर भागे यात्री

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शिवपुरी। अभी शाजापुर पर इंटरसिटी ट्रेवल्स में लगी आग ठंडी भी नहीं है कि शनिवार को शिवपुरी में यात्री बस में उठे धुएं ने यात्रियों की सांस थाम दी। बता दें कि शिवपुरी जिले के सुभाषपुरा थाना क्षेत्र स्थित मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास शनिवार को एक चलती बस के इंजन में अचानक स्पार्किंग हुई और धुआं निकलने लगा। यात्रियों से भरी बस में यह घटना होने पर हड़कंप मच गया।
सिकरवार ट्रेवल्स की बस क्रमांक MP07 P 4188 शिवपुरी से ग्वालियर जा रही थी। बताया गया है कि बस में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे। मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास पहुंचते ही इंजन में स्पार्किंग हुई और धुआं उठने लगा।
चालक ने तुरंत बस रोकी और सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया। कुछ देर बाद इंजन से धुआं निकलना बंद हो गया। हालांकि, एहतियात के तौर पर यात्रियों को दूसरी बस से ग्वालियर भेजा गया। इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।
इस घटना ने एक बार फिर शिवपुरी-ग्वालियर-गुना रूट पर चलने वाली निजी बसों की फिटनेस और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बस संचालक आरटीओ नियमों की अनदेखी करते हुए क्षमता से अधिक यात्री बैठाते हैं।
उनका यह भी कहना है कि कई बसों के पास फिटनेस सर्टिफिकेट तो होते हैं, लेकिन वे तकनीकी रूप से अनफिट हालत में सड़कों पर दौड़ रही हैं। लोगों का आरोप है कि ऐसी शिकायतें पहले भी सामने आई हैं, लेकिन परिवहन विभाग द्वारा कोई प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं की गई।
घटना के बाद जागा परिवहन विभाग
घटना के बाद परिवहन विभाग भी हरकत में आ गया। जानकारी के मुताबिक सूचना मिलते ही शिवपुरी आरटीओ रंजना भदौरिया मौके पर पहुंचीं और संबंधित बस को जब्त कर सुभाषपुरा थाना परिसर में खड़ा करवाया गया।
इसके बाद आरटीओ द्वारा मुड़खेड़ा टोल प्लाजा पर चेकिंग अभियान चलाकर अन्य यात्री बसों की भी जांच की गई। इस दौरान बसों के दस्तावेज, फिटनेस और क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने जैसे मामलों की पड़ताल की गई। घटना के बाद परिवहन विभाग की कार्रवाई को लेकर लोगों में चर्चा रही कि यदि पहले नियमित जांच होती, तो इस तरह की घटनाओं पर समय रहते अंकुश लगाया जा सकता था।













#धमाका_डिफरेंट: पशु बलि पर रोक लगवाने से लेकर समाज हित में प्रखर महेंद्र दुबे ने अब लगाई सोशल मीडिया पर अनर्गल धार्मिक बयानबाजी के खिलाफ याचिका, नहीं पेश हुआ अनावेदक तो जारी हुआ जमानती वारंट

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शिवपुरी। "कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो जरा जोर से उछालो यारो..." ये पंक्तियां चंद उन लोगों पर सटीक बैठती हैं जो खुद के लिए तो जीते ही हैं साथ साथ जमाने के लिए भी जीने लड़ने से पीछे नहीं हटते। अब देखिए न कुछ मंदिरों पर जैसे खूबत बाबा, बलारी माता पर पशु बलि दी जाती थी। धर्म से जुड़े इस मामले में कोई कुछ नहीं बोलता था लेकिन नगर के मत्स्य विभाग के सेवानिवृत अधिकारी महेंद्र कुमार दुबे आगे आए और आज इन मंदिरों पर पशु बलि पर प्रभावी रोक लग चुकी है। इतना ही नहीं दुबे जी समाज हित, उपभोक्ता हितों के प्रति इतने सजग रहते है कि देश भर में लड़ने से पीछे नहीं हटते। आजकल उनकी चर्चा इसलिए हो रही है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर अनर्गल धार्मिक बयानबाजी के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में एक परिवाद दायर कर दिया जो न सिर्फ स्वीकार हुआ बल्कि न्यायालय में आज जब दिल्ली का अनावेदक पेश नहीं हुआ तो उसके विरुद्ध 500 रुपए का जमानती वारंट जारी हो गया, इसमें अगली तारीख 22 जून लगाई है। दरअसल वाट्सअप ग्रुप पर दिल्ली के एक व्यक्ति के खिलाफ शिवपुरी सीजेएम न्यायालय में परिवाद स्वीकार किया गया है। इस मामले में 14 मई आज गुरुवार को तय तारीख पर दिल्ली का अनावेदक उपस्थित नहीं हुआ। जिसके चलते न्यायालय ने उसके खिलाफ 500 रुपए का जमानती वारंट जारी करते हुए मामले में अगली तारीख 22 जून तय की है। 
ये है मामला
एमजे मिशन जीव मित्र नाम के वाट्सअप ग्रुप में शिवपुरी के महेंद्र दुबे जुड़े हुए थे। इस ग्रुप पर बीते 24 फरवरी 2025 को सुबह 11:43 बजे एक मेसेज दुबे के मोबाइल पर नजर आया, जो 8989458665 अतुल जैन की तरफ से भेजा गया। जिसमें हिंदुत्व के विरोध में लिखा जाकर जैन धर्म में मूर्ति पूजा शुरू से होना बताया साथ ही यह भी लिखा कि जो भी प्राचीन मंदिर मिलते हैं, वो जैन मंदिर ही मिलते हैं। नई दिल्ली निवासी अतुल जैन के इस मेसेज को देखकर महेंद्र दुबे आहत हुए तथा उन्होंने ग्रुप को छोड़कर अतुल जैन के खिलाफ पहले कोतवाली शिवपुरी में शिकायत की, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। 
सीजेएम में लगाया परिवाद, हुआ स्वीकार:
ब्राह्मण समाज एवं हिंदुत्व के खिलाफ की गई इस टिप्पणी के खिलाफ महेंद्र दुबे एवं पुरुषोत्तम शर्मा ने सीजेएम शिवपुरी प्राची शर्मा उपाध्याय की अदालत में परिवाद पत्र प्रस्तुत किया। जिसे स्वीकार करते हुए अतुल जैन के विरुद्ध धारा 299 भा. न्या. सं. के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। इसी परिवाद के तहत दर्ज प्रकरण में 14 मई 2026 तारीख तय की गई, जिसमें अनावेदक अतुल जैन उपस्थित नहीं हुए, जबकि उनके विरुद्ध 500 रुपए का जमानती वारंट जारी हुआ था। आज फिर 500 रुपए का जमानती वारंट न्यायालय से जारी किया गया, जो रजिस्टर्ड डाक से नई दिल्ली भेजा जाएगा। इस मामले में अगली तारीख 22 जून 2026 तय की गई है।













#धमाका_अलर्ट: जरा ध्यान दीजिए, गुमशुदा की तलाश, बदरवास से मोहरसिंह लापता, मानसिक स्थिति ठीक नहीं, दिखे या मिले तो डायल करें 99810 03307

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शिवपुरी। फोटो में नजर आ रहा ये युवा मोहरसिंह है जो थाने के पीछे बदरवास का रहने वाला है। इसे पैरालाइसिस हुआ है और मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। तीन दिन से लापता है। अगर आपको नजर आए या मिले तो निम्न नंबर पर जानकारी दीजिए। मोबाइल 99810 03307
अथवा 9770403760. उचित इनाम दिया जाएगा। पुलिस में जानकारी दे दी है।













#धमाका_दुखद_खबर: बस जल रही थी, बेटे को अभिषेक खो चुके थे इसी बीच जब मीडिया साथी मौके पर पहुंचे तो अभिषेक ने रोते रोते कहा, "मीडिया आप बिक मत जाना, मेरा मीडिया से ये कहना है कि कम से कम इतना तो करवा दो की ये हादसे फिर न हो, मैने तो अपना भविष्य खो दिया लेकिन आगे कभी किसी का भविष्य न जले, मेरा 4 साल का बेटा जिंदा जल गया", मासूम अनय की रविवार की सुबह शिवपुरी मुक्तिधाम में उठावनी होगी, देखिए कलेजे को चीरती अभिषेक की करुण पुकार, video, साथ ही देखिए खामियां और क्या सुधार आवश्यक विस्तृत खबर सिर्फ धमाका न्यूज शिवपुरी पर

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शिवपुरी। पूरी तरह फैल सिस्टम का नतीजा है शुक्रवार शनिवार की देर रात शाजापुर के पास हुआ इंटरसिटी ट्रेवल्स अग्निकांड जिसमें सवार अपने मासूम सुपुत्र अनय जैन के असमय काल के मुंह में समाने के वियोग में दुखी पिता CA अभिषेक जैन की करुण पुकार रह रहकर कलेजा चीर रही है। सोचिए इस पिता पर क्या गुजरी होगी जिसने अपने परिवार की सुध भूलकर अन्य यात्रियों की जान बचाई। लोग तमाशबीन बने video शूट करते रहे लेकिन इसी बीच आग का गोला बनी बस में मासूम की चिता धधक उठी। जब मिली तो पहले हितेचि से बस काटनी पड़ी और तब अनय कंकाल के रूप में मिला। शिवपुरी के मुक्तिधाम में रविवार सुबह मासूम की उठावनी रखी गई है। 
इधर वो "वीडियो" झकझोर देने वाला है जिसमें अभिषेक जैन अपने दुख से अधिक भविष्य में ऐसे हादसे रोकने की विनती कर रहा है।
सुनिए आंखों को भिगो देने वाले बोल...
बस जल रही थी, बेटे को अभिषेक खो चुके थे इसी बीच जब मीडिया साथी मौके पर पहुंचे तो अभिषेक ने रोते रोते कहा,  "मीडिया आप बिक मत जाना, मेरा मीडिया से ये कहना है कि कम से कम इतना तो करवा दो की ये हादसे फिर न हो, मैने तो अपना भविष्य खो दिया लेकिन आगे कभी किसी का भविष्य न जले, मेरा 4 साल का बेटा जिंदा जल गया। इस बस में न पीछे गेट था, न अग्निशमन, कांच तोड़ने का कोई इंतजाम भी नहीं था, फेल सिस्टम की भेंट चढ़ गया मेरा बेटा अनय जैन"।
एक दुखी पिता की करुण पुकार क्या पहुंचेगी पत्थर दिल सरकार के कानों तक
आखिर कैसे सड़कों पर दौड़ रही हैं मौत की गारंटी देती वीडियो कोच बसें, इन्हीं हादसों के चलते विदेशों में लग चुका है वैन लेकिन हमारे देश में पैसे की खनक के सामने बौनी हुईं सरकार, आखिर कब तक जिंदा जलेंगे लोग ? बसों में कब लगेंगे 2 गेट और अग्निशमन यंत्र पूछती है आवाम।
वास्तव में यह एक अत्यंत हृदयविदारक घटना है, और अपने 4 साल के मासूम बेटे अनय को खोने वाले पिता अभिषेक जैन का दर्द पूरी तरह से झकझोर देने वाला है। एक पिता का यह पूछना बिल्कुल जायज है कि नियमों की अनदेखी के कारण आखिर कब तक मासूम जिंदगियां यूं ही खत्म होती रहेंगी।
ऐसी दुर्घटनाएं स्पष्ट रूप से परिवहन सुरक्षा प्रणालियों (Transport Safety Systems) और नियमों के लागू होने में गंभीर कमियों को उजागर करती हैं।
बसों में सुरक्षा के अनिवार्य नियम और वास्तविकता भारत में कमर्शियल बसों के लिए सुरक्षा मानक (जैसे Central Motor Vehicles Rules) तय हैं, लेकिन जमीन पर उनका पालन न होना ही बड़े हादसों का कारण बनता है:
आपातकालीन निकास (Emergency Exits): नियमों के मुताबिक हर बस में पीछे या दाईं तरफ एक स्पष्ट इमरजेंसी गेट या टूटने वाली बड़ी कांच की खिड़की (Safety Glass) होनी चाहिए।
ग्लास ब्रेकिंग हैमर (Glass Hammers): आपात स्थिति में शीशा तोड़ने के लिए खिड़कियों के पास लाल रंग के विशेष हथौड़े लगे होने अनिवार्य हैं।
अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguishers): बस में ड्राइवर की सीट के पास और यात्रियों की पहुंच में चालू हालत वाले फायर एक्स्टिंग्विशर होने चाहिए।
विदेशों में कड़े नियम :
कई विकसित देशों में बसों के निर्माण (Bus Body Code) और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर जीरो-टॉलरेंस की नीति है:
* वहां बसों में दो नियमित दरवाजों के अलावा छत पर भी निकास (Roof Hatches) होते हैं।
* इंजनों में ऑटोमैटिक फायर सप्रेशन सिस्टम (Automatic Fire Suppression Systems) लगे होते हैं जो आग लगते ही खुद ब खुद एक्टिव हो जाते हैं।
* फिटनेस सर्टिफिकेट और सेफ्टी ऑडिट के बिना किसी भी कमर्शियल गाड़ी को सड़क पर उतरने की अनुमति नहीं होती।जवाबदेही और बदलाव की जरूरत जनता और पीड़ित परिवारों का यह आक्रोश पूरी तरह न्यायसंगत है। इस फेल सिस्टम को सुधारने के लिए केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि इन सख्त कदमों की जरूरत है:
कड़ा भ्रष्टाचार विरोधी रुख
अनफिट बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट देने वाले अधिकारियों और आरटीओ (RTO) पर सीधी कानूनी कार्रवाई हो।
डिजिटल चेकिंग
बसों में सुरक्षा उपकरणों की जांच के लिए औचक निरीक्षण (Surprise Inspections) और कैमरे आधारित चेकिंग हो।
कड़ा जुर्माना और परमिट रद्दीकरण: नियमों का उल्लंघन करने वाले बस ऑपरेटरों के लाइसेंस और परमिट तुरंत रद्द किए जाएं। 
वीडियो कोच बसों में सवारी से ज्यादा कमाई के लिए छत और फर्श के नीचे भारी कार्गो लादना और मूल वायरिंग (original wiring) से छेड़छाड़ करना बस हादसों और आग लगने का सबसे बड़ा कारण बनता है।
अतिरिक्त भाड़ा कमाने के चक्कर में की गई यह लापरवाही यात्रियों की जान को गंभीर खतरे में डालती है। इसके मुख्य दुष्परिणाम और कारण नीचे दिए गए हैं:
शॉर्ट सर्किट और आग का खतरा (Wiring Tampering)
अवैध कनेक्शन: बसों में एक्स्ट्रा लाइटें, हैवी म्यूजिक सिस्टम, चार्जिंग पॉइंट और AC मॉडिफिकेशन के लिए मूल वायरिंग को काटा-छांटा जाता है।
घटिया क्वालिटी के तार:
 बिना सुरक्षा मानकों (ISI मार्क) के लोकल मैकेनिकों से वायरिंग कराई जाती है।
ओवरलोडिंग
अतिरिक्त बिजली उपकरणों के कारण तारों पर लोड बढ़ता है, जिससे वे गर्म होकर पिघल जाते हैं और शॉर्ट सर्किट से आग लग जाती है।
अनियंत्रित संतुलन और पलटने का जोखिम (Cargo Overloading)
सेंटर ऑफ ग्रेविटी बिगड़ना
छत पर भारी सामान (जैसे बाइक, लोहे के बक्से या व्यावसायिक माल) लादने से बस का संतुलन (Center of Gravity) ऊपर की तरफ खिसक जाता है।
पलटने का खतरा
तेज मोड़ पर या अचानक ब्रेक लगाने पर बस बहुत जल्दी अनियंत्रित होकर पलट जाती है।
ब्रेक फेल होना: फर्श के नीचे (डिक्की में) क्षमता से अधिक भारी कार्गो भरने से गाड़ी का कुल वजन तय सीमा से बहुत ज्यादा हो जाता है, जिससे इमरजेंसी में ब्रेक काम करना बंद कर देते हैं।
3. आग फैलने की तेज रफ्तार और दम घुटना ज्वलनशील सामान
कार्गो में कई बार चोरी-छिपे सिंथेटिक कपड़ा, प्लास्टिक, या रासायनिक सामान ले जाया जाता है जो आग को तेजी से भड़काता है।
रास्ते ब्लॉक होना
अतिरिक्त सामान कभी-कभी बस के आपातकालीन द्वारों (Emergency Exits) के सामने रख दिया जाता है, जिससे दुर्घटना के समय यात्रियों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता।जहरीला धुआं
वायरिंग और कार्गो के जलने से निकलने वाला गाढ़ा, जहरीला धुआं यात्रियों को चंद सेकंड में बेहोश कर देता है।
भारत सरकार के मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (CMVR) के अनुसार यात्री सुरक्षा से समझौता करने वाली बसों पर बहुत कड़े जुर्माने और सुरक्षा नियम लागू किए गए हैं। तीन प्रश्नों के सटीक कानूनी और व्यावहारिक जवाब नीचे दिए गए हैं:
ओवरलोडिंग और अवैध वायरिंग पर RTO के कानूनी जुर्माने कार्गो ओवरलोडिंग (सामान का अतिरिक्त भार): यदि बस की छत या डिक्की में तय सीमा से अधिक कमर्शियल माल लादा जाता है, तो न्यूनतम ₹20,000 का बेस जुर्माना लगाया जाता है। इसके साथ ही हर एक अतिरिक्त टन वजन के लिए ₹2,000 प्रति टन का अतिरिक्त जुर्माना वसूला जाता है और माल को तुरंत अनलोड कराया जाता है।
सवारी ओवरलोडिंग (तय क्षमता से अधिक यात्री): बस की आरसी (RC) में दर्ज क्षमता से अधिक सवारी बैठाने पर ₹200 प्रति अतिरिक्त सीट/यात्री का जुर्माना लगता है।
अवैध वायरिंग और मॉडिफिकेशन
बिना अनुमति के ओरिजिनल वायरिंग से छेड़छाड़ करने या लोकल वर्कशॉप से बस बॉडी मॉडिफाई कराने पर गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट और रजिस्ट्रेशन (RC) तुरंत निरस्त (Cancel) कर दिया जाता है। आरटीओ द्वारा बस को सीज (जब्त) भी किया जा सकता है।
2. बसों में फायर एक्स्टिंगुइशर और इमरजेंसी एग्जिट के नियमसड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) के AIS-135 और AIS-153 मानकों के तहत सभी यात्री और स्लीपर बसों के लिए नियम बहुत कड़े हैं।
इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन द्वार) का नियम:हर बस में कम से कम 4 इमरजेंसी एग्जिट होने अनिवार्य हैं (जिसमें 1 मुख्य आपातकालीन दरवाजा, 2 रूफ हैच यानी छत के रास्ते और 1 अतिरिक्त एग्जिट शामिल हैं)।
आपातकालीन निकास के रास्तों (Passageway) की चौड़ाई कम से कम 450 mm होनी चाहिए ताकि लोग आसानी से निकल सकें।
आपातकालीन द्वारों की आंतरिक सीमा पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव (चमकदार) टेप लगी होनी चाहिए ताकि अंधेरे या धुएं में भी रास्ता दिख सके।
फायर एक्स्टिंगुइशर (अग्निशामक यंत्र) का नियम:बस में कुल मिलाकर न्यूनतम 10 किलोग्राम क्षमता के अग्निशामक सिलेंडर होने चाहिए। इन्हें केवल ड्राइवर के पास नहीं, बल्कि बस के अंदर अलग-अलग सुलभ जगहों पर रखना अनिवार्य है।
ग्लास ब्रेकिंग हैमर (हथौड़ा): आपातकालीन खिड़कियों के शीशे तोड़ने के लिए हर बर्थ/सीट के पास लोहे के विशेष लाल रंग के हथौड़े टंगे होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।फायर अलार्म सिस्टम (FDSS): सभी नई स्लीपर और लंबी दूरी की बसों के यात्री केबिन में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) और अलार्म अनिवार्य किया गया है जो धुआं उठते ही पानी की बौछार या अलार्म शुरू कर देता है।
3. यात्री के तौर पर आपको किन सुरक्षा बातों की जांच करनी चाहिए?सफर शुरू करने से पहले एक जागरूक यात्री के नाते बस में इन 4 मुख्य बातों की जांच अवश्य करें:
आपातकालीन हैमर (Hammers) की मौजूदगी: देखें कि क्या खिड़कियों के पास लगे लाल हथौड़े अपनी जगह पर मौजूद हैं या गायब हैं।रास्तों की रुकावट (Blocked Passageways): ध्यान दें कि बस के बीच का रास्ता (गैलरी) या इमरजेंसी गेट के ठीक सामने कोई कार्गो, भारी बैग या एक्स्ट्रा सीटें लगाकर रास्ता ब्लॉक तो नहीं किया गया है।
फायर एक्स्टिंगुइशर और उसकी एक्सपायरी: ड्राइवर के केबिन और बस के पिछले हिस्से में अग्निशामक सिलेंडर की जांच करें। सुनिश्चित करें कि उसका प्रेशर मीटर 'हरे निशान' पर हो और वह एक्सपायर्ड न हो।स्पार्क या जलने की गंध: यदि बस के केबिन में कहीं से भी तारों के जलने की गंध आ रही हो, या कोई अनधिकृत हैवी लाइट/म्यूजिक सिस्टम लगा दिखे, तो तुरंत ड्राइवर से आपत्ति जताएं या सफर करने से बचें।













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