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#mamakadhamakanews: ढाई साल बाद भी साइबर ठगी का निपटारा नहीं, पीड़ित छात्र का CIBIL स्कोर खराब; MBA की पढ़ाई और करियर पर संकट

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शिवपुरी। भारत सरकार भले ही आमजन को साइबर ठगी से बचाने के लाख जतन करे या फिर मोबाइल पर भी अलर्ट जारी करे लेकिन सरकार के मातहत इसे गम्भीरता से कतई नहीं ले रहे ऐसा ही एक मामला जिले के शिवपुरी निवासी एक छात्र नितांत रघुवंशी के साथ पेश आया है। जिसके साथ जनवरी 2024 में हुई साइबर ठगी के मामले में ढाई साल बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित छात्र ने आज, 21 जुलाई 2026 को जनसुनवाई में कलेक्टर अर्पित वर्मा को आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है और अपने भविष्य को बचाने की मांग की है।
थाने में जमा है मोबाइल, नहीं मिली प्रगति रिपोर्ट
पीड़ित छात्र ने बताया कि 2 और 3 जनवरी 2024 को उसके साथ साइबर फ्रॉड हुआ था, जिसकी प्राथमिकी (F.I.R क्रमांक 0016) 19 जनवरी 2024 को फिजिकल थाना, शिवपुरी में दर्ज कराई गई थी। जांच के नाम पर पुलिस ने छात्र का मुख्य मोबाइल फोन थाने में जमा करा लिया था। छात्र लगातार थाने के चक्कर काट रहा है, लेकिन ढाई साल बाद भी पुलिस द्वारा केस की प्रगति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
करियर और MBA एडमिशन पर मंडराया संकट
छात्र का एक प्रतिष्ठित कॉलेज में MBA (मास्टर्स ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) के लिए चयन हो गया है और उसे ऑफर लेटर भी मिल चुका है। कॉलेज में एडमिशन के लिए उसे 18 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस जमा करनी है। पीड़ित के पिता एक सरकारी शिक्षक हैं और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन पर होने के कारण वे अचानक इतनी बड़ी रकम चुकाने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
CIBIL स्कोर खराब होने से नहीं मिल रहा एजुकेशन लोन
इस लंबित साइबर ठगी के मामले के कारण बैंकों द्वारा छात्र का सिबिल (CIBIL) स्कोर खराब कर दिया गया है। इसके चलते छात्र को आगे की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन (शिक्षा ऋण) मिलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समय पर लोन न मिलने से छात्र का एडमिशन रद्द होने और उसका करियर बर्बाद होने की कगार पर है।
कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार
पीड़ित छात्र ने कलेक्टर से अत्यंत विनम्र और भावुक प्रार्थना की है कि उसके भविष्य और करियर को ध्यान में रखते हुए इस केस का जल्द से जल्द निपटारा कराने हेतु संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए जाएं। साथ ही, उसका जब्त मोबाइल फोन भी वापस दिलाया जाए ताकि वह अपनी आगे की पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू कर सके।

















#mamakadhamakanews : अंतरराष्ट्रीय शतरंज दिवस, गुरु नानक इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा अफीया खान ने अंडर-11 बालिका वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किया

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शिवपुरी। अंतरराष्ट्रीय शतरंज (Chess) दिवस के अवसर पर 19 जुलाई 2026 को शिवपुरी खेल परिसर स्थित माधवराव सिंधिया स्टेडियम में ओपन शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न विद्यालयों के 74 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इस प्रतियोगिता में गुरु नानक इंटरनेशनल स्कूल, शिवपुरी की होनहार छात्रा अफीया खान ने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए अंडर-11 बालिका वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें बेस्ट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
यह उपलब्धि अफीया की मेहनत, लगन और प्रतिभा का प्रमाण है। उनकी इस सफलता पर विद्यालय परिवार, अभिभावकों एवं सभी शुभचिंतकों की ओर से हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।
बहुत-बहुत बधाई अफीया खाँन! आप भविष्य में भी इसी प्रकार नई ऊँचाइयों को प्राप्त करें और शिवपुरी तथा अपने विद्यालय का नाम रोशन करती रहें।
















#mamakadhamakanews: छात्रों और पुलिस के बीच झड़पें, अश्रु गैस छोड़ी, बल प्रयोग किया, दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली (जैसे NEET पेपर लीक) और शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में हजारों युवाओं ने संसद तक भारी विरोध मार्च निकाला

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delhi। दिल्ली। दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली (जैसे NEET पेपर लीक) और शिक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में हजारों युवाओं ने संसद तक भारी विरोध मार्च निकाला। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। प्रदर्शन की मुख्य माँगें:केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
परीक्षा प्रणाली में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना। NEET परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा।जलवायु व शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्रों और युवाओं का एक विशाल आंदोलन चल रहा है, जिसने 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 'चलो संसद' मार्च के दौरान हिंसक रूप ले लिया। सोनम वांगचुक ने अस्पताल से संदेश दिया है कि जब तक युवाओं के नेताओं को सांसदों से मिलने नहीं दिया जाता, उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। वहीं, सरकार ने युवाओं से आंदोलन वापस लेने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
आंदोलन कैसे और क्यों हुआ?
शुरुआत (जून 2026): यह आंदोलन NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत अभिजीत दिपके द्वारा गठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' नामक एक युवा आंदोलन ने की, जिसे SFI और AISA जैसे छात्र संगठनों का भी समर्थन मिला।
भूख हड़ताल
प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी युवाओं के समर्थन में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।
तनाव की वजह (18-19 जुलाई):
 सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया, जिससे युवाओं का गुस्सा और भड़क गया।
20 जुलाई का 'संसद मार्च': 
पुलिस की पाबंदियों और धारा 163 (पुरानी धारा 144) लागू होने के बावजूद हजारों युवा संसद भवन की तरफ बढ़े। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स, वॉटर कैनन, आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया, जिसमें कई छात्र घायल हो गए। संसद के दोनों सदनों को भी इस हंगामे के चलते स्थगित करना पड़ा।
युवाओं की मुख्य मांगें क्या हैं?
युवाओं के प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलकर अपनी लिखित मांगें सौंपी हैं:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: 
NEET पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की जा रही है।
सोनम वांगचुक की रिहाई
अस्पताल में हिरासत में रखे गए कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा किया जाए।
मुआवजे की मांग
परीक्षा में हुई धांधली और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
शिक्षा तंत्र में सुधार
देश की सभी राष्ट्रीय परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए एग्जाम मेनिफेस्टो लागू करने और व्यापक सुधार करने की मांग की है। 
वर्तमान स्थिति:
 भारी बारिश के बावजूद छात्रों ने अपना विरोध जारी रखा है और वे अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं।

















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