शिवपुरी। देश की विभिन्न बोलियों ने मिलकर हिंदी भाषा को समृद्ध किया है। हिंदी भाषा के विकास में साधु संतों, भक्ति कालीन कवियों और सूफियों का योगदान भी अतुलनीय है। यह बात मध्य प्रदेश लेखक संघ एवं श्री रामकिशन सिंघल फाउंडेशन द्वारा आयोजित हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर दुर्गा मठ में आयोजित समारोह में अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ कवि डॉक्टर हरिप्रकाश जैन हरि ने कही। उन्होंने अपने चिकित्सकीय कार्य के दौरान तमिलनाडु में तमिल भाषा सीखने का जिक्र भी किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रमोद भार्गव ने कहा कि हिंदी में शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान एवं तकनीकी का ज्ञान अर्जन किया जा सकता है इसके लिए आत्मबल मजबूत होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि साहित्यकार विनय प्रकाश जैन नीरव ने कहा भाषा हमारे भीतर जन्म लेती है और हमारे विचारों की अभिव्यक्ति के साथ-साथ हमारे स्तर का भी परिचय देताी है कि हम क्या हैं ,कैसे हैं।
इससे पूर्व हिंदी का भविष्य और भविष्य की हिंदी शीर्षक परिचर्चा का आरंभ करते हुए संस्था अध्यक्ष रामकिशन सिंघल डॉ महेंद्र अग्रवाल ने हिंदी भाषा में अन्य भाषाओं के शब्दों की ग्राह्यता एवं तकनीकी शब्दावली के साथ तालमेल की आवश्यकता निरूपित करते हुए नई पीढी के हिंदी जुड़ाव पर चिंता भी व्यक्त की। साहित्यकार अखलाक खान बताया कि हमारे देश में 57ः लोग हिंदी भाषा समझते एवं बोलते हैं तथा यूट्यूब पर तकरीबन 54 प्रतिशत वीडियो हिंदी में देखे जाते हैं जबकि अंग्रेजी में यह संख्या मात्र 16 प्रतिशत है। अतः हिंदी बहु संख्यक की भाषा है।
साहित्यकार पत्रकार प्रमोद भार्गव को किया गया सम्मानित
साहित्यकार पत्रकार एवं पुरातन विज्ञान को आधुनिक स्वरूप में वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर दुनिया के समक्ष रखने वाले लेखक प्रमोद भार्गव को हिंदी दिवस के अवसर पर श्री रामकिशन सिंघल फाउंडेशन एवं मध्य प्रदेश लेखक संघ द्वारा आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि डॉक्टर एच.पी. जैन ,अध्यक्ष डॉ महेंद्र अग्रवाल ा विनय प्रकाश जैन नीरव एवं राम पंडित ने शाल श्रीफल देकर सम्मानित किया।
कवियों ने किया काव्य पाठ
वरिष्ठ कवि बसंत श्रीवास्तव की सरस सरस्वती वंदना से आरंभ हुई कवि गोष्ठी में जीशान हयात करेरा ने गजल पेश की, अपने पांव का कांटा हमीं से निकलेगा। राधेश्याम सोनी परदेशी रामकृष्ण मौर्य ने गीत एवं गजलों की प्रस्तुति दी वहीं अजय जैन अभिराम की कविता की पंक्तियां देखें भविष्य की हिंदी के संग ऊंचा हो भारत का मान , माटी से मंगल तक पहुंचे हिंदी का सम्मान। कवि बसंत श्रीवास्तव ने कहा हिंदी से ही शान है हिंदी है अभिमान इस दिल में सबके बसे ऐसा हो अभियान। शिक्षिका मृदुल नामदेव के गीत को खूब सराहा गया, संस्कृत हमारी नानी और मां हमारी हिंदी। मृदुला नामदेव ने शिक्षक दिवस पर लिखी गई श्रेष्ठ कविता का पाठ भी किया। रफीक इशरत की गजल को देखें नफरतें खत्म हो रास्ता कोई ऐसा निकले। कभी राम पंडित ने जबरन मंच पर बैठने की चाहत रखने वालों पर व्यंग्य रचना पड़ी। विनय प्रकाश जैन के गीत को खूब सारा गया। कार्यक्रम का सफल संचालन साहित्यकार अखलाक खान ने एवं आभार डॉक्टर महेंद्र अग्रवाल द्वारा व्यक्त किया गया।













































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