शिवपुरी। मड़ीखेड़ा परियोजना को सुनियोजित ढंग से फेल करार देने के नतीजे में जनता जल संकट का सामान कर रही है, इधर हमारी बात को बल इसलिए मिल रहा है कि जिस टैंकर महा घोटाले को पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने बल पूर्वक जैसे तैसे खत्म किया था और बार बार टैंकर चलवाने की युक्ति फेल की थी अब मड़ीखेड़ा को फिर फेल बताकर नगर में टैंकर दौड़ने की तैयारी हो चुकी है। जबकि नपा के बेड़े में पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा दिए गए टैंकर, पूर्व सांसद के पी यादव द्वारा टैंकर, वर्तमान सांसद द ग्रेट ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दिए हुए टैंकर के अलावा खुद नपा के टैंकरों के होते हुए भी नपा निजी टैंकर किराए पर लेने की बात कह रही है जनता के अनुसार ये सब सोची समझी साजिश का नतीजा है जबकि बीते साल से मड़ीखेड़ा की मोटर खराब होने की जानकारी होने के बाद भी अभी तक मोटर क्रय नहीं किया जाना शर्मनाक है। आज नगर पालिका में नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा ने जनता के आरोप की पुष्टि इस बात से कर दी है कि जब मोटर खरीदी के टेंडर पूर्व में निकाले जा चुके थे तो उन्हें बाला बाला निरस्त कैसे कर दिया गया। मंगलवार को आहुत नपा परिषद की बैठक हंगामा खेज रही। इसी में नपाध्यक्ष में गम्भीर आरोप लगाये और कहा कि जानबूझकर जलसंकट पैदा किया गया है। नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने सीएमओ और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शहर में जल संकट जानबूझकर पैदा किया गया है और नगर पालिका की व्यवस्था दलालों के हाथों में चली गई है। उन्होंने कहा कि सिंध जलावर्धन योजना मड़ीखेड़ा के तहत मोटरों के लिए टेंडर निकाला गया था, लेकिन बिना किसी सूचना के उसे रद्द कर दिया गया। उनका कहना है कि सीएमओ शहर की व्यवस्था सुधारने में रुचि नहीं ले रहे और केवल ट्रांसफर व प्रशासनिक फेरबदल में लगे हुए हैं।।नगर पालिका अध्यक्ष ने घोषणा की कि आगामी तीन दिनों में पानी के मुद्दे को लेकर विशेष परिषद बैठक दोबारा बुलाई जाएगी।
मड़ीखेड़ा तो मड़ीखेड़ा चांद पाठा की मोटर तक खराब
नगर में पेयजल संकट जानबूझकर बढ़ाया जाना प्रतीत होता है, मड़ीखेड़ा की मोटर ख़राब तो ठीक लेकिन चांद पाठा जिससे नगर के 40 प्रतिशत लोग पेयजल प्राप्त करते है इसकी मोटर भी दो दिन पहले तो खराब थी यामी की पूरी तैयारी के साथ नगर को भीषण जल संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा किया गया है।
आइए समझिए टैंकर कांड
लोगों की माने तो मड़ीखेड़ा परियोजना पूरी होने से पहले नपा में हर साल होने वाला टैंकर महाकांड अधिकारियों और नपा के जन प्रतिनिधियों के लिए फायदे का सौदा रहता था। 3 टैंकर प्रत्येक वार्ड में चलाए जाकर एक से जल वितरण और बाकी के 2 टैंकर के रुपए कागजी कार्रवाई के माध्यम से जेब में जाता था। ये तो हुई छोटे टैंकर की बात अगर बड़े टैंकर चले तो उसे कोई बड़े नेता जी ठेके पर लेकर सपवेल भरने के नाम पर लाखों की चपत नपा को लगाते थे। रात के अंधेरे में टेकर चलते थे न कोई देखने वाला न कोई सुनने वाला। इसी घोटाले की कहानी जब पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को पता लगी तो उन्होंने पूरे जतन करते हुए मड़ीखेड़ा परियोजना पूरी करवाई। जिन मोटर को नपा 4 महीने में लाने की बात कह रही है वही मोटर 30 लाख में एक महीने में अहमदाबाद से नई बनकर आई थी जिनसे आज भी काम चलता आया है। इस तरह टैंकर कांड खत्म हुआ था जिसे अब फिर शुरू करने की तैयारी है!
जल संकट को लेकर हुई नारेबाजी, पार्षद मट्टू बोले, 8 दिन वर्ना इस्तीफा दूंगा
पार्षद अरविंद ठाकुर ने गंभीर आरोप लगाए, जल संकट पर वे खासे गुस्से में थे, इधर पार्षद मट्टू खटीक ने कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की कि यदि अगले आठ दिनों के भीतर शहर की पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। खास बात ये है कि सीएमओ इशांक धाकड़ पूरे परिदृश्य से नदारद थे।
पार्षद रामसिंह ने पीआईसी से दिया इस्तीफा
बैठक के दौरान पार्षद राम सिंह यादव ने पीआईसी (पार्षद इंप्लीमेंटेशन कमेटी) की
सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने नगर पालिका में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्मचारी खुलेआम रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं, जबकि शहर की जनता पानी के लिए तरस रही है।
यादव ने यह भी आरोप लगाया कि नालों की सफाई नहीं हो रही है, जिससे बारिश में स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आवश्यक हुआ तो वह पार्षद पद से भी इस्तीफा दे देंगे।
चुप्पी साध गए सचिन
पार्षदों ने बैठक में मौजूद ईई सचिन चौहान से जवाब मांगा। चौहान ने पहले तीन दिन में जल संकट दूर करने का आश्वासन दिया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
मूल मुद्दा जल संकट में दबकर रह गया, हुई नारेबाजी
शिवपुरी नगर पालिका परिषद की बैठक मंगलवार को नारी सशक्तिकरण के मुद्दे पर बुलाई गई थी, लेकिन शहर में पानी संकट के कारण एजेंडा पीछे छूट गया। बैठक के दौरान पार्षदों ने पेयजल व्यवस्था, गंदगी और अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर जमकर हंगामा किया स्थिति तब और बिगड़ गई जब नगर पालिका के सीएमओ इशांक धाकड़ बैठक में अनुपस्थित रहे। उनकी गैरमौजूदगी पर पार्षदों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
हालांकि, भारी विरोध और हंगामे के बावजूद, बैठक समाप्त होने से पहले नारी सशक्तिकरण से संबंधित प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।







































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