इंदौर/शिवपुरी/गुना। शिवपुरी और गुना के 7 युवकों को इंदौर क्राइम ब्रांच ने 5 मई की देर रात आईपीएल सट्टेबाजी के फेर में इंदौर के ऊषा नगर स्थित 'साईं नयन' (Sai Nayan) अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 102 में दबिश देकर इस गिरोह को पकड़ा।पुलिस ने इनके बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए बताया कि ये सभी दिल्ली से लेकर दुबई तक अपना कारोबार फैलाए हुए थे। बता दें कि शिवपुरी के दिनारा और बदरवास में दो युवाओं की जान सट्टे के फेर में हाल ही में चली गई है। दिनारा में आईपीएल सट्टे में 5 लाख रुपये हारने के बाद कर्ज के दबाव में एक युवक (अमन भार्गव) द्वारा आत्महत्या करने का मामला भी सामने आया है, जिसमें पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।जानकारी के अनुसार पुलिस ने पुलिस ने ऊषा नगर स्थित साईं नयन अपार्टमेंट में दबिश देकर शशांक अग्रवाल, मुकेश गुप्ता, निखिल कौशल, शुभम कौशल, जतिन शर्मा, अर्पित तिवारी और प्रियांश जैन को पकड़ा है। आरोपियों के पास से 39 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप और 1.40 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
यह गिरोह 'डायमंड सर्वर' (Diamond Server) के जरिए सट्टा संचालित कर रहा था। जांच में सामने आया कि इनके तार दुबई और दिल्ली के बड़े सटोरियों से जुड़े हुए हैं। पुलिस को आरोपियों के पास से करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन के डिजिटल सबूत और फर्जी आईडी भी मिली हैं।
हैकिंग और हाईटेक नेटवर्क (प्रमुख खुलासे)
डायमंड सर्वर का उपयोग:
यह गिरोह दिल्ली और मुंबई स्थित 'डायमंड सर्वर' (Diamond Server) के माध्यम से काम कर रहा था। इस सर्वर का उपयोग सट्टेबाजी की दरें (भाव) और लेन-देन को डिजिटल रूप से प्रबंधित करने के लिए किया जाता था।
हैकिंग और एक्सेस:
जांच में यह सामने आया कि इनके तार दुबई और दिल्ली के बड़े सटोरियों से जुड़े हैं। वे सट्टेबाजी के लिए विशेष सॉफ्टवेयर और हैकिंग टूल्स का सहारा लेकर लाइव मैच फीड और डेटा में हेरफेर कर रहे थे, ताकि सट्टे की दरों को अपने पक्ष में रख सकें।
फर्जी डिजिटल पहचान:
आरोपियों के पास से कई फर्जी सिम कार्ड और फर्जी आईडी बरामद हुई हैं, जिनका उपयोग बैंक खाते खोलने और सट्टेबाजी के डिजिटल प्लेटफॉर्म (जैसे टेलीग्राम और व्हाट्सएप) पर अपनी पहचान छिपाने के लिए किया जा रहा था।
कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
यह गिरोह 'लोटस 365' (Lotus 365) और 'डायमंड एक्सचेंज' जैसे प्रतिबंधित एप्स और वेबसाइट्स के जरिए ग्राहकों को आईडी और पासवर्ड प्रदान करता था। वे सोशल मीडिया के जरिए लोगों को "2 से 3 गुना मुनाफे" का लालच देकर इस अवैध धंधे में फंसाते थे।
पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप के डिजिटल फुटप्रिंट की फोरेंसिक जांच कर रही है ताकि इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके।


























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