मुरैना। (अजय दंडोतिया की रिपोर्ट)
शासन द्वारा विभागों में स्थानांतरण की नीति बनाई गई थी लेकिन तहत लगभग 3 से 5 साल में अधिकारी व कर्मचारियों का स्थानांतरण होना तय था। वर्तमान में जिला मुरैना में स्थानांतरण के नाम पर अधिकारी कर्मचारी मौज उडा रहे हैं उच्च अधिकारियों को छोडकर देखा जाये तो ज्यादातर अधिकारी कर्मचारी मुरैना में वर्षों से जमे हुए हैं कई अधिकारी कर्मचारियों के तो रिटायरमेंट तक आ चुके हैं लेकिन उनका स्थानांतरण मुरैना से नहीं हुआ। सूत्र बताते हैं कि मुरैना जिले में ज्यादातर अधिकारी कर्मचारी पहले अपना स्थानांतरण कराने से मना कर देते हैं लेकिन एक बार जो मुरैना में अपनी पदस्थापना ले लेते हैं तो यहां से अन्य जगह स्थानांतरण कराने की सोचते तक नहीं हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि काली कमाई में सबसे ज्याद मुरैना जिला अव्वल है। यहां कथित तौर पर अधिकारी कर्मचारियों का मन इसलिये लग जाता है क्योंकि टेबल के नीचे से आने वाले लक्ष्मी कुछ ज्यादा ही मेहरवान हो जाती है जिस वजह से जो एक बार मुरैना में टिक गया वह जाने का नाम तक नहीं लेता। कुछ ऐसे ही हालात शिक्षा विभाग, जिला पंचायत, जनपद पंचायत और महिला बाल विकास विभाग के बने हुए हैं जहां कई कर्मचारी व अधिकारी अपना सिक्का जमाये बैठे हैं यहां इतना जरूर है कि उच्च अधिकारियों का समय-समय पर स्थानांतरण होता रहता है लेकिन असली चांदी तो यहां इन विभागों में वर्षों से जमे कर्मचारी काट रहे हैं। अपने आला अफसरों को मोटी कमाई का पाठ पढाने वाले उक्त विभागों के कर्मचारी अपनी इस कला से सभी का मन मोह लेते हैं। अधिकारी भी अपनी जेब गर्म होती देख इन्हीं कर्मचारियों के रंग में रंग जाते हैं फिर क्या है। इस मोटी कमाई में जिन लोगों का नुकसान होता है वह होती है आम जनता। जी हां! वर्षों से जमे इन कर्मचारियों की वजह से आम जनता अपना कार्य कराने के लिये अच्छा खासा चढावा चढाती है। यहां चढावा जनता अपनी स्वेच्छा से नहीं बल्कि मजबूरीवश चढाती है। इसका मुख्य कारण यह है कि अगर इन विभागों में अपना कार्य कराने के लिये चढावा नहीं चढाया गया तो लोगों की चप्पलें घिस जायेंगे मगर उनके कार्य कभी नहीं हो सकेंगे। उदाहरण के लिये अपने किसी एक विभाग में अपना कार्य करवाने के लिये जायें तो आपको शासन के कई नियम व कानूनों का हवाला देकर उक्त कार्य को इतना जटिल बना दिया जायेगा कि वह कार्य कराना संभव ही न हो। लेकिन जैसे ही जेब गर्म करने की बात आये तो सारे नियम व कानून एक तरफ और चढावे की राशि एक तरफ। सभी कार्य एक ही दिन में आसानी से मलाई मार रहे उक्त कर्मचारियों द्वारा करवा दिया जाता है। बहरहाल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का ध्यान अभी वर्षों से जमे अधिकारी कर्मचारियों पर नहीं है लेकिन भोपाल से जुडे सूत्रों के मुताबिक जल्द ही मलाई मार रहे इन अधिकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण की कार्यवाही जल्द ही की जावेगी।
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