दिल्ली। निजीकरण की राह देख रही Air India के लिए कई कंपनियों ने बोलियां जमा की हैं, इसमे टाटा का नाम सबसे आगे है। Air India के लिए सरकार ने फाइनेंशियल बिड्स मंगवाई थीं। सरकार इसी वित्त वर्ष में इस सरकारी एयरलाइंस का निजीकरण करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ये सरकार के विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा भी है।
कब थी टाटा के पास जानिये
एयर इंडिया की शुरुआत 1932 में टाटा समूह ने की थी। जेआरडी टाटा कुशल पायलट थे। कम्पनी का नाम टाटा एयर सर्विस था। द्वितीय युद्ध के बाद भारत में सामान्य हवाई सेवा की शुरुआत हुई तब इसका नाम एयर इंडिया रखकर सार्वजिनिक कम्पनी बना दिया गया। आजादी के बाद एक राष्ट्रीय एयर लाइंस की जरूरत महसूस हुई तब सरकार ने 49% हिस्सेदारी अधिग्रहण कर ली और टाटा से हिस्सेदारी खरीद कर इसे सरकारी कम्पनी बना दिया।
पहले भी हुई कोशिश
निजीकरण की कोशिश साल 2000- 2001 में हुई थी। 2007 में इंडियंस एयर लाइंस का इसी में विलय हुआ। तभी से इसके बुरे दिन शूरु हो गए। साल 2006- 07 में दोनों कम्पनियों के घाटा 7.7 अरब था जो अगले दो साल में बढ़कर 72 अरब तक जा पहुंचा। तब यूपीए सरकार ने पैकेज देकर इसे बचाने की कोशिश की थी लेकिन बात नहीं बनी।
एनडीए सरकार ने फिर शुरू की कोशिश
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