शिवपुरी। कहते हैं भगवान के नाम का सिमरन करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। लोग तरह तरह के जतन करते हुए भगवान का नाम लेते हैं तो कुछ लोग नायब तरीके खोजकर प्रभु का नाम लेते हैं। कुछ इसी तरह का मामला शिवपुरी जिले के पिछोर खनियाधाना के ग्राम मुहारिकला का है। जहां के ग्रामीण बीते 15 सालों से अलसुबह गांव की गली घूमकर रामधुन में शामिल होते हैं जिसमें भगवान राम के साथ अन्य भगवान की स्तुति भजनों के माध्यम से की जाती है। दो लोगों से शुरू हुआ सफर आज कई लोगों के जुड़ जाने से कारवां में तब्दील हो चुका है। इस बारे में हमने रामधुन में अग्रणी पत्रकार शैलेंद्र गुप्ता से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि आज से 15 साल पहले की बात हैं मैंने और मेरे एक साथी ने यह सोचा कि क्यों ना
हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे पहले उठते ही प्रभु का नाम लिया करें। जिसके बाद मैं और मेरा दोस्त सुबह 4 बजे गांव में निकलने लगे और भगवान श्रीराम का नाम लेकर पूरे गांव का भ्रमण करने लगे। रामधुन की शुरुआत मुहारीकलां के राधा कृष्ण मंदिर से लेकर शंकर जी के मंदिर से होते हुए पुन: राधा कृष्ण मंदिर पर समापन करते। जैसे जैसे दिन बीते तो हमारे साथ गांव के कई लोग हमारी इस यात्रा में शामिल होते हुए और फिर हमारी यह यात्रा जिंदगी का एक हिस्सा बन गई अब हम सुबह राम नाम के बिना रह ही नहीं पाते। ग्रामीणों ने बताया कि इस रामधुन से हमारा जीवन बदल गया है, जब से हमने सुबह सुबह प्रभु श्रीराम का नाम का सर्कींतन शुरू किया और गांव की गलियों में हमने राम धुन शुरू की तो समय के साथ साथ यह हमारा कारवां बढ़ता चला गया। हम सुबह जैसे की संकीर्तन शुरू करते है ओर आगे बढते हैं लोगों के दरवाजे खुलते जाते है, सभी भक्त इस संकीर्तन यात्रा में शामिल हो जाते है, पिछले 15 साल से यह रामधुन यात्रा में किसी प्रकार का विध्न नही आया है। सर्दी, गर्मी और वर्षा काल में भी यह यात्रा निर्वाध रूप से निकलती है। शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि रामधुन का कारवां 2 से बढ़कर 40 का हो गया है, जो लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले मैं और मेरा दोस्त अच्छेलाल डंगरईया ही थे जो सुबह पूरे गांव में प्रभु का नाम जपते जपते घुमते थे, लेकिन अब 40 से ज्यादा लोगों का दल हो गया है। शैलेन्द्र ने कहा कि हमारी रामधुन यात्रा से कई लाभ हो रहे है, पहला आध्यात्मिक लाभ हम और हमारी आत्मा जब राम नाम का संकीर्तन करते हैं तो हमें आध्यात्मिक लाभ हो रहा है। हमारे रोम रोम में राम बस रहे हैं। वही यह यात्रा लगभग 2 किलोमीटर की है इससे सुबह सुबह हमारा टहलना हो जाता है फ्रेश ऑक्सीजन लेने से हमारा स्वास्थ्य बेहतर हो रहा है। वही सुबह सुबह राम की धुन पर ढोल और ढोलक की थाप के कारण वातावरण भी शुद्ध हो रहा है। हमारी रामटोली का प्रत्येक सदस्य 300 रुपए माह देता है इस राशि से हम अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
आसपास के ग्रामीणों को मिल रही हैं प्रेरणा, जल्द ही रामधुन यात्रा शुरू
इस रामधुन से आसपास गांव के लोगों को प्रेरणा मिल रही हैं, और वह ग्राम के लोगों की काफी तारीफ कर रहे हैं। और मुहारीकलां के आसपास के गांव जैसे चिरकिट, बसहार, मुहारी खुर्द, अमरपुर ललन, कियारा, मुहारी के आस पास के मजरा के समस्त ग्रामीण इकट्ठे होकर, हमसे जुड़ते जा रहे हैं और अपने-अपने गांव में रामधुन की शुरुआत कर रहे हैं। पूरा गांव राम नाम में मगन हो जाता हैं। इसकी प्ररेणा से आसपास के ग्रामीणों में भी बहुत जल्द ही रामधुन प्रभात फेरी चालू हो जायेगी। (देखिए video)
शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि प्रभु श्रीराम का नाम अमृत का काम कर रहा है प्रभु के नाम सुनने से 3 से 4 लोग जो कि डिप्रेशन का शिकार थे वह डिप्रेशन से बाहर आ रहे हैं और वह ठीक हो रहे हैं। वहीं महंत ने बताया कि हम सभी को मिलजुल कर रहना चाहिए और प्रभु के गुण गाना चाहिए उन्होंने हम इतना सुंदर जीवन दिया है, हमारे अंदर किसी के प्रति द्वेष भावना नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही सभी त्योहार को मिलजुल कर मनाना चाहिए।
शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया कि प्रभु श्रीराम का नाम अमृत का काम कर रहा है प्रभु के नाम सुनने से 3 से 4 लोग जो कि डिप्रेशन का शिकार थे वह डिप्रेशन से बाहर आ रहे हैं और वह ठीक हो रहे हैं। वहीं महंत ने बताया कि हम सभी को मिलजुल कर रहना चाहिए और प्रभु के गुण गाना चाहिए उन्होंने हम इतना सुंदर जीवन दिया है, हमारे अंदर किसी के प्रति द्वेष भावना नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही सभी त्योहार को मिलजुल कर मनाना चाहिए।

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