फफूंद कतई पसंद नहीं महाराज को, सच्चाई का देते हैं साथ
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को जानने वाले अच्छी तरह जानते हैं कि वे फफूंद पसंद नहीं करते। यही कारण रहा कि जबसे नपा की कुर्सी हिलनी शुरू हुई और एक के बाद एक प्रमाणित भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने लगे। कई आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद भी विवादास्पद ठेकेदार के साथ कथित पार्टनर्स की पोल खुली, तभी से दिल्ली दरबार ने बदलाव की बात सोची। सूत्रों के अनुसार तब पार्षदों के बीच से बदलाव के बाद अध्यक्ष बनाने पर विचार भी किया गया लेकिन महिला पार्षद की खोज सफल नहीं हो सकी। इधर लगातार आक्रोश के बाद जब एक साथ बीस पार्षदों के इस्तीफे की नौबत आन खड़ी हुई है तब बीजेपी अपने घर की लड़ाई को बिना सार्वजनिक किए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहती है। इसमें कसम खाए पार्षदों की टीम का वो वचन भी काम करता नजर आ रहा है जिसमें उनका कहना है अध्यक्ष महाराज जिसे चाहे बना दें बस वर्तमान अध्यक्ष गायत्री शर्मा नहीं चाहिए!
31 हस्ताक्षर वाला खत लेकर कबूतर रवाना
पक्की खबर है कि अध्यक्ष के विरोध में 31 पार्षदों के हस्ताक्षर वाला पत्र शिवपुरी से रवाना हो चुका है और टीम को अधिकृत बयानबाजी भी नहीं किए जाने के निर्देश मिले हैं। इसलिए सभी की निगाहें दिल्ली की तरफ लगी हैं।
लोग बोले, पहले दें इस्तीफा तो ठीक अन्यथा किरकिरी!
नगर में रविवार को लोग इसी विषय पर बातचीत करते नजर आए। उनका कहना था कि जब संख्या बल विरोध में है तो नपाध्यक्ष को खुद आगे होकर इस्तीफा देना चाहिए शायद कुछ लोगों की सिंपैथी मिल जाए, अन्यथा कहीं अनहोनी हुई और तब नौबत आई तो खिल्ली उड़ेगी! कुल मिलाकर पूरे प्रसंग में जल्द ही असली कहानी सामने आती दिखाई दे रही है। इसी के साथ नए नाम की चर्चा भी चल निकली है। इधर राजनीति की नई पारी चाणक्य की शैली में खेल रहे द ग्रेट सिंधिया जन भावना के अनुरूप अपनी पुंढीर से कौन सा शस्त्र छोड़ेंगे ये देखने वाली बात होगी। हम एक बार फिर साफ कर दें कि शिवपुरी तो क्या अंचल में सिंधिया रंग में रंगी बीजेपी में कोई दूसरा रंग अब दूर दूर तक नहीं है सभी के मुगालते औंधे मुंह हैं।













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