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#धमाका_डिफरेंट_खबर: "महाराज" के पाले में गेंद, अविश्वास के बिना बीजेपी, नपाध्यक्ष का चेहरा बदलने की तैयारी में! अध्यक्ष के विरोध में 31 हस्ताक्षर का दावा मजबूत होने से बड़े आसार, नपाध्यक्ष के पास 15 पार्षदों का टोटा, कांग्रेस में नहीं लग सकी सेंध, बगीचा सरकार वाले पार्षद बोले, "कोई भी चलेगा, बस इनको हटाओ", नए नाम की अटकलें तेज!

रविवार, 17 अगस्त 2025

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। कलयुग में हनुमान जी का अखंड खेल ही लोगों की नैया पार लगाता आ रहा है। इस बात से इत्तेफाक रखने वाले शिवपुरी नगर पालिका परिषद के जिन पार्षदों ने करेरा के ख्यात बगीचा सरकार हनुमान मंदिर पर शिवपुरी की नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा को हटाने की कसम खाई थी और न्याय संगत तरीका अपनाते हुए बीते दो महीने से जंग जारी रखी अब उसके परिणाम उन्हीं के पक्ष में आते दिखाई दे रहे हैं। इसकी नजीर देखने को तब मिली जब 15 अगस्त यानी कल जब देशवासी स्वतंत्रता दिवस मना रहे थे और नपा में जारी वर्चस्व की लड़ाई में किसे स्वतंत्र किया जाए इसकी जद्दोजहद में जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर लगे हुए थे। बंद कमरे में आहुत बैठक के दौरान जब रूठे पार्षदों को अध्यक्ष के साथ बिठाकर तालमेल की जुगत नाकाम दिखी तो राजनीति के माहिर कूल मेन मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर ने दोनों पक्षों के बीच नई गेंद डाली कि जो भी आवश्यक संख्याबल अपने साथ लेकर हाजिर होगा उसी के पक्ष में निर्णय लिया जाएगा जो दोनों पक्षों को स्वीकार करना होगा। बता दें कि ऐसी स्थिति में नपाध्यक्ष को कुर्सी थामे रखने के लिए 15 पार्षदों का साथ चाहिए और विपक्ष को 30 पार्षद साथ लाने और अध्यक्ष क्लीन बोल्ड हो जाएंगी। दूसरी बात मंत्री प्रदुम्न सिंह तोमर ने फतेहपुर इलाके में अध्यक्ष से यहां तक पूछा कि क्या वे इस्तीफा दे सकेंगी। लोग बता रहे है कि वहां स्वीकारोक्ति के बाद उन्होंने यू टर्न लिया और बोलीं अविश्वास प्रस्ताव की बैठक में ताकत साबित करेंगी। हालांकि उनकी इस दावेदारी की हवा विपक्ष में खड़े पार्षदों की टीम ने निकालकर रख दी है जिसमें दावा किया जा रहा है कि उनके साथ 31 पार्षदों का गठजोड़ है और सभी के हस्ताक्षर भी हैं। यानि कि समझा जा सकता है कि नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा की मुश्किल बढ़ चुकी हैं। वाबजूद इसके की उन्होंने रविवार को कांग्रेस के घर में सेंधमारी की कोशिश की। नए अध्यक्ष मोहित अग्रवाल के साथ कांग्रेस के पार्षदों को दाना डाला लेकिन बताया जा रहा है कि दाल गलने की नौबत ही नहीं आई। यानि कि अध्यक्ष की आसंदी पर संकट के काले घने बादल छा चुके हैं और दिल्ली से आला कमान अगले सप्ताह तक कोई नई तस्वीर पेश कर सकते हैं!
फफूंद कतई पसंद नहीं महाराज को, सच्चाई का देते हैं साथ
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को जानने वाले अच्छी तरह जानते हैं कि वे फफूंद पसंद नहीं करते। यही कारण रहा कि जबसे नपा की कुर्सी हिलनी शुरू हुई और एक के बाद एक प्रमाणित भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने लगे। कई आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद भी विवादास्पद ठेकेदार के साथ कथित पार्टनर्स की पोल खुली, तभी से दिल्ली दरबार ने बदलाव की बात सोची। सूत्रों के अनुसार तब पार्षदों के बीच से बदलाव के बाद अध्यक्ष बनाने पर विचार भी किया गया लेकिन महिला पार्षद की खोज सफल नहीं हो सकी। इधर लगातार आक्रोश के बाद जब एक साथ बीस पार्षदों के इस्तीफे की नौबत आन खड़ी हुई है तब बीजेपी अपने घर की लड़ाई को बिना सार्वजनिक किए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहती है। इसमें कसम खाए पार्षदों की टीम का वो वचन भी काम करता नजर आ रहा है जिसमें उनका कहना है अध्यक्ष महाराज जिसे चाहे बना दें बस वर्तमान अध्यक्ष गायत्री शर्मा नहीं चाहिए! 
31 हस्ताक्षर वाला खत लेकर कबूतर रवाना
पक्की खबर है कि अध्यक्ष के विरोध में 31 पार्षदों के हस्ताक्षर वाला पत्र शिवपुरी से रवाना हो चुका है और टीम को अधिकृत बयानबाजी भी नहीं किए जाने के निर्देश मिले हैं। इसलिए सभी की निगाहें दिल्ली की तरफ लगी हैं। 
लोग बोले, पहले दें इस्तीफा तो ठीक अन्यथा किरकिरी!
नगर में रविवार को लोग इसी विषय पर  बातचीत करते नजर आए। उनका कहना था कि जब संख्या बल विरोध में है तो नपाध्यक्ष को खुद आगे होकर इस्तीफा देना चाहिए शायद कुछ लोगों की सिंपैथी मिल जाए, अन्यथा कहीं अनहोनी हुई और तब नौबत आई तो खिल्ली उड़ेगी! कुल मिलाकर पूरे प्रसंग में जल्द ही असली कहानी सामने आती दिखाई दे रही है। इसी के साथ नए नाम की चर्चा भी चल निकली है। इधर राजनीति की नई पारी चाणक्य की शैली में खेल रहे द ग्रेट सिंधिया जन भावना के अनुरूप अपनी पुंढीर से कौन सा शस्त्र छोड़ेंगे ये देखने वाली बात होगी। हम एक बार फिर साफ कर दें कि शिवपुरी तो क्या अंचल में सिंधिया रंग में रंगी बीजेपी में कोई दूसरा रंग अब दूर दूर तक नहीं है सभी के मुगालते औंधे मुंह हैं। 

















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