इसका पूर्व अनुमान लगाया जा रहा था। हालांकि कलेक्टर रवीन्द्र कुमार ने जो तर्क दिया है वह भी जायज है। कलेक्टर चौधरी का कहना है "इस्तीफे ऐसे ही नहीं दिए जाते। उसका भी एक नियम होता है। कानून कहता है कि पार्षद का त्यागपत्र स्पष्ट, लिखित और बिना किसी शर्त के होना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित होना चाहिए कि इस्तीफा स्वेच्छा से और दबाव रहित दिया गया हो।
उन्होंने कहा कि सामूहिक रूप से दिए गए इस्तीफे विधिसम्मत प्रक्रिया के अनुसार मान्य नहीं हैं। इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था, इसलिए इस्तीफे कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं।" इस तरह अब अध्यक्ष हटाओ अभियान में आज बुधवार को नया मोड़ आया है। अब सभी पार्षदों के इस्तीफों को कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी ने खारिज कर दिया है। नगर के वार्डों में यह चर्चा का विषय बन गया है।
अध्यक्ष के खिलाफ इन पार्षदों ने दिया था स्तीफा
स्तीफा देने वालों में नगर पालिका उपाध्यक्ष सरोज रामजी व्यास, भाजपा पार्षद विजय शर्मा, राजा यादव, ताराचंद राठौर, रीना कुलदीप शर्मा, ओमप्रकाश जैन ओमी, नीलम अनिल बघेल, सरोज महेन्द्र धाकड़, प्रतिभा गोपाल शर्मा, मीना पंकज शर्मा, कांग्रेस पार्षद मोनिका सीटू सरैया, संजय गुप्ता, ममता बाईसराम धाकड़, कमलाकिशन शाक्य, रितु जैन, निर्दलीय राजू गुर्जर और गौरव सिंघल शामिल हैं। इसके अलावा रितु रत्नेश जैन ने अलग से इस्तीफा दिया था।
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