खनियाधाना। 'तीर्थोदय' (Teerthoday) या 'तीर्थोदय तीर्थ गोलाकोट' मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के खनियांधाना में स्थित एक प्राचीन और महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल है, जो अपनी चमत्कारी प्रतिमाओं, गोल पहाड़ी, आरोग्य बावड़ी और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ 3000 साल से अधिक प्राचीन भगवान आदिनाथ की प्रतिमा विराजमान है, और यह जैन धर्म का एक प्रमुख धार्मिक केंद्र है। इन दिनों यहां पंचकल्याणक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। विश्व शांति महा पंचकल्याणक महोत्सव के द्वितीय दिवस बुधवार, 21 जनवरी 2025 को कार्यक्रमों की श्रृंखला भक्ति, साधना और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुई। प्रातःकाल से ही हजारों श्रद्धालुओं ने धर्म लाभ लिया।
द्वितीय दिवस का शुभारंभ प्रातः 6:30 बजे मंगलाष्टक, दिगंबरधन, रक्षामंत्र, शांतिमंत्र, नित्य नियम, अभिषेक, शक्तिधारा पूजन (गर्भकल्याणक पूजन) एवं शांति हवन के साथ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार से संपूर्ण तीर्थ क्षेत्र आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो गया।
इसके पश्चात प्रातः 8:30 बजे परम पूज्य मुनिश्री द्वारा दिव्य देशना प्रदान की गई, जिसे सुनने के लिए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुनिश्री की वाणी ने जीवन में धर्म, संयम और शांति का संदेश दिया।
मध्याह्न 12:30 बजे सीमंतनी क्रियाएं संपन्न हुईं, जिसमें महिला संगीत के माध्यम से माता की गोद भराई का भावपूर्ण आयोजन किया गया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
दोपहर 2:20 बजे सत्येंद्र शर्मा एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत नाट्य मंचन ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। वहीं दोपहर 3:00 बजे मंगल घट यात्रा के साथ नवीन मंदिर की शुद्धि, वेदी की शुद्धि एवं शिखर की शुद्धि सहित प्रतिष्ठा संबंधी क्रियाएं विधिविधान से संपन्न हुईं।
सायंकाल 5:30 बजे आचार्य भक्ति, जिज्ञासा समाधान एवं भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने श्रद्धा पूर्वक सहभागिता निभाई।
रात्रि 7:30 बजे महाराजा नाभिराय के राजदरबार में सभा सदृश मंचन प्रस्तुत किया गया। इसमें सभा सदस्यों द्वारा तत्व चर्चा, महाराजा नाभिराय का आगमन, प्रधानमंत्री एवं सेनापति से राज्य चर्चा, माता मरूदेवी का सभा में आगमन, सोलह स्वप्नों की चर्चा एवं उनका फलादेश, गीत-संगीत व नृत्य, कुमारियों द्वारा माता को भेंट समर्पण तथा प्रश्नोत्तर के माध्यम से सोलह स्वप्नों का एलईडी पर सजीव चित्रण किया गया।
द्वितीय दिवस का समापन आध्यात्मिक आनंद, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ हुआ। पंचकल्याणक महोत्सव में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, जिससे संपूर्ण क्षेत्र धर्ममय वातावरण में परिवर्तित हो गया है।
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