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#धमाका_साहित्य_कॉर्नर: राष्ट्रीय साहित्य वाटिका अखिल भारतीय साहित्य संस्थान के सानिध्य में हुई कवि गोष्ठी

मंगलवार, 27 जनवरी 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। राष्ट्रीय साहित्य वाटिका अखिल भारतीय साहित्य संस्थान के सानिध्य में दिनाँक 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र के पूर्व कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें नगर के गणमान्य नागरिक, कवि विद्वान साहित्यकार उपस्थित हुए यह कार्यक्रम राष्ट्रीय साहित्य वाटिका के तत्वबिधान में आयोजित किया। राष्ट्रीय साहित्यि वाटिका के संरक्षक राम पंडित, संस्थापक राकेश मिश्रा एवं अध्यक्ष विकास शुक्ल प्रचण्ड एवं बसंत श्रीवास्तव के आवाहन पर आयोजित हुआ l
कार्यक्रम में डॉ. मुकेश अनुरागी, डॉ. अजय जैन अभिराम, राकेश सिंह, कल्पना सिनोरिया, मृदुला नामदेव, शरद गोस्वामी शिखर, बसंत श्रीवास्तव, एवं राकेश भटनागर आदि उपस्थित हुए, कार्यक्रम अध्यक्ष राकेश भटनागर, मुख्य अतिथि चन्द्रभूषण पाण्डेय संरक्षक भृगुवंशम भार्गव ब्राह्मण समाज एवं अध्यक्ष महेश शर्मा जी के सानिध्य में आयोजित हुई l
सर्वप्रथम डॉ. मुकेश अनुरागी जी ने अत्यंत जीवंत रचना का पाठ करते हुए पढ़ा 
"मेरे सपने सभी जीवित,मेरा ईमान जिन्दा है,
हृदय में देश बसता है, मेरी पहचान जिन्दा है,
 वतन पर मरने बालों ने बताया है यही हमको,
वतन पर मरने बालों से ये हिंदुस्तान जिन्दा है ll"
       कार्यक्रम का संचालन राकेश मिश्रा रंजन ने किया l
इस वतन को नमन,उस कफन को नमन,
मातृ भू को नमन, इस ध्वजा को नमन ll
वीर बलिदान के, सौर्य को भी नमन l
तीन रंग से बने, राष्ट्र ध्वज को नमन ll
डॉक्टर अजय जैन अभिराम ने तिरंगा को कुछ इस तरह पढ़ा,
तिरंगा तमासा नहीं, प्रतिबद्धता प्राण हैं,
यात्रा यातनाओं की मातृ भूमि मान है l
तीन रंगों का तिलक, चक्र भी गतिमान है,
तिरंगा तिरंगा नहीं, आस्था बलिदान है ll
प्रखर कवि राकेश सिंह ने पढ़ा
 " कश्मीर हो कन्याकुमारी या हो गुहाटी,
चंदन से भी बढ़कर है मेरे देश की माटी "
 राष्ट्रीय साहित्य वाटिका के अध्यक्ष विकास शुक्ल प्रचण्ड ने कुछ इस प्रकार पढ़ा, 
" वीणापाणी के स्वर का मैं अपमान नहीं कर सकता हूँ ,
दरवारों के वन्दन का में गान नहीं कर सकता हूँ l"
महेश शर्मा अध्यक्ष भृगुवंशम भार्गव समाज ने सभी बंधुओ को आभार ज्ञापित करते हुए कहा आपकी पावन उपस्थित से इस कार्यक्रम को गरिमा प्राप्त हुई,आप अच्छे कवि, लेखक, चिंतक और विचारक हैं, मैं हृदय से आप सभी का वन्दन अभिनंदन करता हूँ, हृदय से आभार ज्ञापित करता हूँ।












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