#धमाका_दुखद_खबर: आठ घंटे पहले जन्मी बेटी के साथ स्ट्रेचर पर आई पत्नी...तिरंगे में लिपटे आर्मी जवान की अंतिम विदाई में फूट फुटकर रो पड़े लोग vairal video
महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के सातारा के आरे दरे गांव में ऐसी कहानी सामने आई, जिसने लोगों को रुला दिया, आंखें नम हो गईं. हर चेहरा बुझा हुआ, हर आंख नम और हर दिल किसी अनकहे दर्द से भरा हुआ था. गांव की गलियों से जब तिरंगे में लिपटा एक पार्थिव शरीर गुजर रहा था, तो लोग हाथ जोड़कर सिर झुकाए खड़े थे. दरअसल महाराष्ट्र के सातारा में जब भारतीय सेना के जवान प्रमोद जाधव को अंतिम विदाई दी गई, तो पूरा गांव खामोश हो गया. हादसे में जान गंवाने वाले जवान की पत्नी को अस्पताल से स्ट्रेचर पर पति के अंतिम दर्शन के लिए लाया गया, जबकि उनकी सिर्फ 8 घंटे पहले जन्मी बेटी भी पिता को आखिरी बार देखने गोद में लाई गई. प्रमोद जाधव कुछ दिन पहले ही छुट्टी लेकर अपने घर आए थे. घर में खुशी का माहौल था, क्योंकि उनकी पत्नी गर्भवती थीं. पूरे परिवार को उस दिन का इंतजार था, जब घर में एक नई जिंदगी आएगी और खुशियों की किलकारी गूंजेगी. लेकिन किसी को क्या पता था कि यह खुशी इतनी जल्दी मातम में बदल जाएगी. एक दर्दनाक सड़क हादसे में प्रमोद जाधव की अचानक मौत हो गई और एक हंसता-खेलता परिवार टूट गया.इस दुखद घटना के कुछ ही घंटों बाद प्रमोद जाधव की पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया. एक तरफ घर में नन्ही बच्ची का जन्म हुआ, वहीं दूसरी तरफ उसके पिता इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे. यह जीवन और मृत्यु का ऐसा दृश्य था, जिसने हर इंसान को अंदर तक हिला दिया. जिस बच्ची को अपने पिता की गोद में खेलना था, वह पैदा होते ही पिता के साए से वंचित हो गई.जब गांव में यह खबर फैली, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. सेना और प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हुईं. हर आंख नम थी. सबसे भावुक पल तब आया, जब प्रमोद जाधव की पत्नी को अस्पताल से स्ट्रेचर पर सीधे अंतिम दर्शन के लिए लाया गया. अभी-अभी डिलीवरी हुई थी, शरीर बेहद कमजोर था, लेकिन पति को आखिरी बार देखने की इच्छा उन्हें वहां खींच लाई. उनकी आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे और दर्द साफ झलक रहा था.इसके बाद जो दृश्य सामने आया,उसने वहां मौजूद हर इंसान को रुला दिया. सिर्फ आठ घंटे पहले जन्मी मासूम बच्ची को उसकी मां की गोद में लेकर पिता के पार्थिव शरीर के पास लाया गया. नन्ही सी बच्ची को दुनिया की कोई समझ नहीं थी, लेकिन वह तिरंगे में लिपटे अपने पिता के सामने थी, जिन्होंने देश की रक्षा की, लेकिन अपनी बेटी को कभी देख या गोद में नहीं ले सके.सेना की ओर से पूरे राजकीय सम्मान के साथ प्रमोद जाधव को अंतिम सलामी दी गई.
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