बदला कानून, सजा हुई कम, बढ़ने लगीं चेन स्नेचिंग
भोपाल की सड़कों के बाद अब अस्पताल भी उस कानूनी बदलाव का असर झेल रहे हैं, जिसने अपराध की प्रकृति ही बदल दी है। कानून के जानकार बताते हैं कि नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत चेन, पर्स और मोबाइल छीनने जैसे अपराधों को फिर से वर्गीकृत किया गया है। पहले ऐसे मामलों को डकैती/लूट की श्रेणी में दर्ज किया जाता था, जिसमें 10 से 14 साल तक की सजा का प्रावधान था। अब इन्हें “स्नैचिंग या झपटमारी” माना जाता है, जिसमें अधिकतम तीन साल की सजा है। गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं रही, जमानत आसानी से मिल जाती है और कई मामलों में आरोपी केवल नोटिस पर छूट जाता है।
इस बदलाव का असर आंकड़ों में साफ दिखता है। 2024 में झपटमारी के 39 मामले दर्ज हुए, जबकि 2025 में 165 से अधिक स्नैचिंग केस सामने आ चुके हैं यानि एक साल से भी कम समय में मामले चार गुना बढ़ गए। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि भोपाल में हर दूसरा स्ट्रीट क्राइम अब स्नैचिंग है। जहाँ पहले लूट के मामलों में गिरफ्तारी, कड़ी पूछताछ और अदालत की सख्त निगरानी होती थी, वहीं अब “गैर-गंभीर अपराध” मानी जाने वाली स्नैचिंग ने अपराधियों के पक्ष में पूरा संतुलन झुका दिया है। जेल का डर खत्म हो चुका है। पकड़े जाने का डर भी कम होता जा रहा है। कुछ दिनों पहले तो नीमच के पूर्व विधायक के बेटे ने कथित तौर पर प्रेमिका के महंगे शौक पूरे करने के लिए चेन स्नेचिंग का सहारा लिया था और अहमदाबाद में गिरफ्तार हुआ।












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