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#धमाका_अलर्ट: AIIMS भोपाल में लिफ्ट के अंदर चेन स्नैचिंग, घटना 5 दिन पुरानी लेकिन आप भी रहें सतर्क इसलिए देखिए vairal video

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

/ by Vipin Shukla Mama
Bhopal भोपाल। राजधानी भोपाल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने गंभीर सुरक्षा चूक की तरफ इशारा किया है। अति सुरक्षित माने जाने वाले एम्स भोपाल परिसर में लिफ्ट के भीतर चेन स्नेचिंग की घटना ने हड़कंप मचा दिया है। ये घटना 27 जनवरी की है जब स्त्री रोग विभाग में अटेंडेंट के पद पर कार्यरत वर्षा सोनी ड्यूटी के दौरान ब्लड बैंक के पीछे स्थित एक लिफ्ट में अकेली थीं। इसी दौरान मास्क पहने एक युवक लिफ्ट में घुसा और बातचीत के बहाने नेत्र रोग विभाग की मंज़िल पूछने लगा। जैसे ही लिफ्ट तीसरी मंज़िल पर पहुँची, युवक बाहर निकला, फिर अचानक पलटा और महिला पर झपट पड़ा। उसने वर्षा की सोने की मोतियों वाली चेन और मंगलसूत्र छीना उन्हें धक्का दिया और लिफ्ट के सामने की ओर भाग गया। वह मंगलसूत्र लेकर फरार हो गया, जबकि मोतियों की चेन टूटकर वहीं गिर गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के वक्त लिफ्ट क्षेत्र में एक भी सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं था. पीड़िता ने बागसेवनिया थाने में लिखित शिकायत दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी IPD गेट से फरार हुआ। रविवार और 26 जनवरी की छुट्टी के चलते सुरक्षा व्यवस्था ढीली थी, जिसका उसने फायदा उठाया। सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने चेहरा ढक रखा था, जिससे पहचान में मुश्किल आ रही है। हालांकि ये घटना एक बड़े संकट का भी संकेत है। 
बदला कानून, सजा हुई कम, बढ़ने लगीं चेन स्नेचिंग
भोपाल की सड़कों के बाद अब अस्पताल भी उस कानूनी बदलाव का असर झेल रहे हैं, जिसने अपराध की प्रकृति ही बदल दी है। कानून के जानकार बताते हैं कि नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत चेन, पर्स और मोबाइल छीनने जैसे अपराधों को फिर से वर्गीकृत किया गया है। पहले ऐसे मामलों को डकैती/लूट की श्रेणी में दर्ज किया जाता था, जिसमें 10 से 14 साल तक की सजा का प्रावधान था। अब इन्हें “स्नैचिंग या झपटमारी” माना जाता है, जिसमें अधिकतम तीन साल की सजा है। गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं रही, जमानत आसानी से मिल जाती है और कई मामलों में आरोपी केवल नोटिस पर छूट जाता है।
इस बदलाव का असर आंकड़ों में साफ दिखता है। 2024 में झपटमारी के 39 मामले दर्ज हुए, जबकि 2025 में 165 से अधिक स्नैचिंग केस सामने आ चुके हैं यानि एक साल से भी कम समय में मामले चार गुना बढ़ गए। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि भोपाल में हर दूसरा स्ट्रीट क्राइम अब स्नैचिंग है। जहाँ पहले लूट के मामलों में गिरफ्तारी, कड़ी पूछताछ और अदालत की सख्त निगरानी होती थी, वहीं अब “गैर-गंभीर अपराध” मानी जाने वाली स्नैचिंग ने अपराधियों के पक्ष में पूरा संतुलन झुका दिया है। जेल का डर खत्म हो चुका है। पकड़े जाने का डर भी कम होता जा रहा है। कुछ दिनों पहले तो नीमच के पूर्व विधायक के बेटे ने कथित तौर पर प्रेमिका के महंगे शौक पूरे करने के लिए चेन स्नेचिंग का सहारा लिया था और अहमदाबाद में गिरफ्तार हुआ।












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