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#धमाका_बड़ी_खबर: बड़ी स्क्रीन पर बजट प्रसारण देख रहे बीजेपी नेताओं से बंद के दौरान झड़प, बीजेपी नेता मंच छोड़कर भागे, UGC के विरोध में भारत बंद शिवपुरी ज़िले में भी सफल, शिवपुरी, करैरा, नरवर में बने विवाद के हालात

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। देश के साथ शिवपुरी जिले में भी UGC के विरोध में भारत बंद के दौरान बाजार बंद रहे। नए विवादित नियमों को लेकर सड़क पर उतरे सवर्ण समाज के लोगों ने केंद्र सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। इस दौरान शिवपुरी, करैरा, नरवर में आपसी भिड़ंत की स्थिति निर्मित हुई। इसी क्रम में शिवपुरी के माधव चौक पर उस समय हंगामा हो गया जब बीजेपी के नेता बड़ी स्क्रीन लगाकर केंद्रीय बजट का सीधा प्रसारण देख रहे थे। यहां प्रदर्शनकारी जा पहुंचे और प्रसारण बंद करने की मांग करने लगे। जब हालात आपसी टकराव के बनते नजर आए तो कोतवाली टीआई कृपाल सिंह ने मोर्चा संभालते हुए प्रसारण बंद करवाया जिसके बाद लोगों को बाहर कर स्थिति संभाली हालाकि बाद में नेता फिर बजट देखते नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने जिला अध्यक्ष जसमंत जाटव को ज्ञापन भी सौंपा।
        ।।(शिवपुरी में टकराव का वीडियो)
करेरा में कुर्सी, बोतल फेंकी तो स्टेज छोड़ नेता भागे
भारत बंद के दौरान करेरा में बाजार बंद कराते समय एक ऑनलाइन दुकान और कच्ची गली में एक गारमेंट दुकान में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। हालांकि, पुलिस ने किसी बड़े विवाद या गंभीर चोट की पुष्टि नहीं की है। करेरा में भाजपा का बजट कार्यक्रम चल रहा था। वहां पर प्रदर्शनकारियों ने घुसकर नारेबाजी की। तोड़फोड़ करते हुए कुर्सियां फेंकी। इससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इससे बजट कार्यक्रम रद्द करना पड़ गया। वहीं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष को कार्यक्रम स्थल से भागना पड़ा। 
दरअसल, करेरा कस्बे में पुलिस सहायता केंद्र के पास भाजपा ने बजट पर कार्यक्रम रखा था। इसमें भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रणवीर सिंह रावत मौजूद थे।
व्यापारी ने दुकान बंद नहीं की मारपीट
बजट प्रसारण के दौरान ही नरवर कस्बे में दुकानदार को पीटा वहीं, नरवर कस्बे की मौजपुर मार्केट में व्यापारी ने दुकान नहीं बंद की तो प्रदर्शनकारियों ने उसके साथ मारपीट कर दी। इसका वीडियो भी सामने आया है।
मौके पर पुलिस प्रशासन को मोर्चा संभालना पड़ा। बाद में दोनों पक्ष नरवर थाने पहुंचे। कई और जगहों से भी हंगामा होने की खबरें हैं।
 शर्म आनी चाहिए बीजेपी को सवर्णों को
भरत शर्मा ने कहा कि शर्मनाक न्याय के लिए तरस रहे सवर्णों के शांतिपूर्वक भारत बंद के दिन सवर्णों की छाती पर अर्थात सार्वजनिक चौराहे पर टैंट का लगा कर मात्र बजट का श्रवण कार्यक्रम का आयोजन दर्शाता है कि आप सवर्ण के प्रति ही नहीं न्याय के लिए कितने संवेदनशील है, उसमें सम्मिलित सवर्ण नेताओं का क्या जमीर मर चुका है बो इतना भी नहीं कह सके कि इसे उसे सार्वजनिक स्थल पर न रखो उसमें हम सम्मिलित होने में असमर्थ रहेंगे लेकिन कहना तो दूर उस कार्यक्रम की प्रथम पंक्ति में बैठे बाजू स्वर्णों यूजीसी काले कानून से बचाने की गुहारो को सुन मुस्करा रहे है। शर्म आनी चाहिए बीजेपी को सवर्णों की छाती पर मूंग दलने का प्रदर्शन कर रहे है।
क्या है UGC का नया नियम ?
UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।' इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं।
ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं।
आंकड़ों में... क्या कैंपस में OBC-SC/ST के साथ भेदभाव हो रहा?
UGC ने नया 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026' नियम जारी करते हुए बताया कि बीते 5 सालों में कैंपस के अंदर जाति-आधारित भेदभाव की शिकायतें बढ़ी हैं।
2019-20 में 173 शिकायतें मिली थी, जबकि 2023-24 में 378 शिकायतें मिली।
मतलब 118.4% बढ़ोत्तरी।
AISHE (All India Survey on Higher Education) 2021-22 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल 12,002 कॉलेज-यूनिवर्सिटी में करीब 4.33 करोड़ स्टूडेंट्स हैं। जातीय भेदभाव की शिकायतें मिली 378। मतलब सिर्फ 0.00087%। यानी एक फीसदी से भी बहुत कम।
प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस 2026 में 3 बड़े बदलाव हुए हैं...
जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा दी गई
इस परिभाषा में कहा गया है, 'जाति, धर्म, नस्ल, लिंग, पैदाइश के स्थान, विकलांगता के आधार पर कोई भी अनुचित या पक्षपाती व्यवहार, जो पढ़ाई में बराबरी में बाधा बने या मानव गरिमा के खिलाफ हो, उसे जातिगत भेदभाव माना जाएगा।' जबकि, पुराने नियम में जातीय भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा नहीं थी।
परिभाषा में OBC को भी शामिल किया गया
इस परिभाषा में 'SC/ST के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC छात्रों को शामिल किया गया है। कहा गया है कि इनके खिलाफ किसी भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार को जाति-आधारित भेदभाव माना जाएगा। जबकि, पुराने नियम में OBC को शामिल नहीं किया गया था।
झूठी शिकायत करने पर सजा का प्रावधान हटाया गया
इस परिभाषा में 'SC/ST के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC छात्रों को शामिल किया गया है। कहा गया है कि इनके खिलाफ किसी भी अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार को जाति-आधारित भेदभाव माना जाएगा। जबकि, पुराने नियम में OBC को शामिल नहीं किया गया था।
अगले आदेश तक रोक
सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इनका देशभर में विरोध हो रहा है।













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