#धमाका_बड़ी_खबर: दिनारा पुलिस ने नायब तहसीलदार सहित 7 शासकीय कर्मचारियों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में प्रकरण दर्ज किया, करेरा की बेशकीमती शासकीय भूमि का सर्वे नंबर निजी भूमि में तब्दील कर भूमि बीघा के हिसाब से बेचने का मामला, कलेक्टर रवीन्द्र कुमार ने कराई जांच तो खुली पोल
करेरा। करेरा की बेशकीमती शासकीय भूमि का सर्वे नंबर निजी भूमि में तब्दील कर भूमि बीघा के हिसाब से बेचने वाले महाघोटाले में दिनारा पुलिस ने नायब तहसीलदार सहित 7 शासकीय कर्मचारियों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। उक्त मामले की शुरुआत तब हुई जब डॉ. श्वेता शर्मा ने जरगवा गांव में 4 बीघा भूमि खरीदी, जिसकी रजिस्ट्री व नामांतरण होने के बाद श्वेता ने ये भूमि उमेश गुप्ता को बेची, तो उसकी भी रजिस्ट्री और नामांतरण हो गया। गुप्ता ने जब उक्त जमीन अधिक दाम में बेचने के लिए ग्राहक ढूंढा, तो पटवारी बृजेश यादव ने कथित तौर पर अपना हिस्सा मांगा। जब गुप्ता ने हिस्सा देने से मना किया तो पटवारी ने रीडर लोकेंद्र श्रीवास्तव के साथ मिलकर ऑनलाइन दिखाई देने वाले उमेश गुप्ता के नामांतरण को पोर्टल से गायब कर दिया। इतना ही नहीं उक्त भूमि को विक्रय से वर्जित भी लिख दिया। जब उमेश गुप्ता ने ये देखा तो उन्होंने डॉ श्वेता को जानकारी दी। तब डॉ. श्वेता शर्मा ने रिकॉर्ड में हेराफेरी करने की शिकायत कलेक्टर से की। जिस पर कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी ने मामले की जांच डिप्टी कलेक्टर शिवदयाल धाकड़ को सौंपी। धाकड़ ने जांच में पाया कि नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव, रीडर लोकेंद्र श्रीवास्तव, पटवारी बृजेश यादव, जीवनलाल तिवारी सहायक ग्रेड बाबू सेवानिवृत्त, प्रताप पुरी बाबू, दिवंगत लालाराम बाबू एवं दिवंगत मुकेश चौधरी पटवारी ने मिलकर शासकीय भूमि का सर्वे नंबर बदलकर उसे निजी बनाकर बीघा के रूप में बेच दी थी। जिसके बाद उक्त लोगों के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम की गैर जमानती धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।
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