बता दें कि बांधवगढ़ से रेस्क्यू कर टाइगर रिजर्व शिवपुरी में छोड़ी गई बाघिन बार-बार आबादी क्षेत्र में पहुंच रही है। दो बार पहले भी रेस्क्यू कर उसे बाड़े में रखा गया था। इसके बाद भी बाघिन को जंगल रास नहीं आ रहा।
बाघिन बाड़े में रहेगी या बाहर भेजेंगे, निर्णय नहीं
बाघिन को तीसरी बार बाड़े में लाकर रखा गया है। यह बाघिन बार-बार आबादी क्षेत्र में पहुंच रही है। 27 अप्रैल को राजस्व सीमा से रेस्क्यू किया गया है। अब यह बाघिन बाड़े में ही रहेगी या फिर बाहर भेजी जाएगी। इस पर अधिकारियों ने निर्णय स्पष्ट नहीं किया है।
टाइगर रिजर्व प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
आखिर रिजर्व प्रबंधन लापरवाही पर क्यों उतारू है। जब बाघिन की निगरानी की जा रही थी तो आखिर कैसे बाघिन वापस ऐरावन के जंगल में पहुंच गई। इसी बीच नदी किनारे नहाने गए सरमन आदिवासी (50) का हिंसक प्राणी ने शिकार कर लिया। सवाल ये है कि अगर बाघिन आबादी की तरफ जा रही थी तो उसे हाथियों से उधर जाने से क्यों नहीं रोका अगर नहीं रुकी तो ट्रेंकुलाइज पहले ही क्यों नहीं किया गया शायद ये घटना टल जाती। ऐसा करना इसलिए भी आवश्यक था कि चंद रोज पहले इसी ग्राम में भैंस का शिकार बाघिन ने किया था। स्थिति की संवेदनशीलता क्यों नहीं समझी गई। लोगों का कहना है कि देश में रणथंभोर, कार्बेट, पन्ना, बांधवगढ़ आदि ऐसे टाइगर रिजर्व हैं जहां पर्यटन से अच्छा खासा व्यापार होता है। फिर शिवपुरी में पर्यटन मंशा पर आखिर कौन भारी है? कौन है जो शिवपुरी में देश विदेश के पर्यटकों को आने से रोकना चाहता है। सवाल ये भी है कि मानव और वन्य जीवो की मौजूदगी हर रिजर्व में देखी जाती है तो अकेले शिवपुरी में क्या परेशानी है जो जनता के बीच पर्यटन को लेकर विष बेल वो रहा है।













सच्ची और अच्छी खबरें पढ़ने के लिए लॉग इन कीजिये "मामा का धमाका डॉट कॉम"।
ये है, आपकी अपनी आवाज।
फोन कीजिये। खबर भेजिये वाट्सअप नम्बर 98262 11550 या मेल कीजिये 550vip@gmail.com
कोई टिप्पणी नहीं
एक टिप्पणी भेजें