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#धमाका_बड़ी_खबर: आखिर कौन है वो जो नहीं चाहता शिवपुरी के पर्यटन को लगे पंख!, जब देख रहे थे गांव की तरफ जाते तभी क्यों नहीं किया रेस्क्यू, अब बाघिन एमटी-6 का तीसरी बार रेस्क्यू कर बाड़े में छोड़ा

मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। बाघिन एमटी-6 का तीसरी बार रेस्क्यू किया गया है, उसे बाड़े में फिर से छोड़ दिया गया है। ऐरावन गांव के एक व्यक्ति का हिंसक वन्य प्राणी ने शिकार कर लिया था। ग्रामीणों ने बाघिन द्वारा शिकार का दावा किया। उन्होंने ट्रैफिक जाम कर दिया था। पार्क प्रबंधन ने बाघिन की लोकेशन भी उसी क्षेत्र में होना स्वीकार की थी रिजर्व ने आशंका जताई थी। जिसके बाद एक बार फिर बाघिन पकड़ ली है। टाइगर रिजर्व की टीम ने 27 अप्रैल की सुबह रेस्क्यू किया। उसे फिर से वापस बाड़े में छोड़ दिया गया है।
बता दें कि बांधवगढ़ से रेस्क्यू कर टाइगर रिजर्व शिवपुरी में छोड़ी गई बाघिन बार-बार आबादी क्षेत्र में पहुंच रही है। दो बार पहले भी रेस्क्यू कर उसे बाड़े में रखा गया था। इसके बाद भी बाघिन को जंगल रास नहीं आ रहा। 
बाघिन बाड़े में रहेगी या बाहर भेजेंगे, निर्णय नहीं
बाघिन को तीसरी बार बाड़े में लाकर रखा गया है। यह बाघिन बार-बार आबादी क्षेत्र में पहुंच रही है। 27 अप्रैल को राजस्व सीमा से रेस्क्यू किया गया है। अब यह बाघिन बाड़े में ही रहेगी या फिर बाहर भेजी जाएगी। इस पर अधिकारियों ने निर्णय स्पष्ट नहीं किया है।
टाइगर रिजर्व प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप 
आखिर रिजर्व प्रबंधन लापरवाही पर क्यों उतारू है। जब बाघिन की निगरानी की जा रही थी तो आखिर कैसे बाघिन वापस ऐरावन के जंगल में पहुंच गई। इसी बीच नदी किनारे नहाने गए सरमन आदिवासी (50) का हिंसक प्राणी ने शिकार कर लिया। सवाल ये है कि अगर बाघिन आबादी की तरफ जा रही थी तो उसे हाथियों से उधर जाने से क्यों नहीं रोका अगर नहीं रुकी तो ट्रेंकुलाइज पहले ही क्यों नहीं किया गया शायद ये घटना टल जाती। ऐसा करना इसलिए भी आवश्यक था कि चंद रोज पहले इसी ग्राम में भैंस का शिकार बाघिन ने किया था। स्थिति की संवेदनशीलता क्यों नहीं समझी गई। लोगों का कहना है कि देश में रणथंभोर, कार्बेट, पन्ना, बांधवगढ़ आदि ऐसे टाइगर रिजर्व हैं जहां पर्यटन से अच्छा खासा व्यापार होता है। फिर शिवपुरी में पर्यटन मंशा पर आखिर कौन भारी है? कौन है जो शिवपुरी में देश विदेश के पर्यटकों को आने से रोकना चाहता है। सवाल ये भी है कि मानव और वन्य जीवो की मौजूदगी हर रिजर्व में देखी जाती है तो अकेले शिवपुरी में क्या परेशानी है जो जनता के बीच पर्यटन को लेकर विष बेल वो रहा है।













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