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#धमाका_खास_खबर: फिर याद आईं पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया अडिग मंशा से टारगेट बेस पर शुरू करवाई थी डूबी मड़ीखेड़ा योजना, नपा में करोड़ों के टैंकर घोटाले रोके थे, बंद हुई थी शहर में ड्रम और पानी की कट्टी की दौड़, अफसोस, जहां छोड़ा था फिल्टर प्लांट आज भी नहीं बदला, जिन मोटर्स से शुरू करवाई थी मड़ीखेड़ा योजना, दम तोड़ने के बाद आज भी उन्हीं मोटर के सहारे शहर की आबादी, करोड़ों फूंकने के बाद भी हर दिन ठप हो रही मड़ीखेड़ा की सप्लाई, इंजीनियर बने करोड़पति!

गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। शहर की आवाम भीषण जल संकट का सामना कर रही है शहर में फिर पानी के टैंकरों की दौड़ शुरू गई है, लोग पानी के लिए फिर से जागरण करने लगे हैं। करीब 8 साल पहले शहर शिवपुरी आ जाने की पहचान हाथों में खाली कट्टी लिए लोग हुआ करते थे वही हाल फिर से नजर आने लगे हैं। ऐसे में लोगों को मध्यप्रदेश की पूर्व कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया की याद आने लगी है जिन्होंने अपने कठोर इरादे से रसातल में जा चुकी इस मड़ीखेड़ा योजना को टारगेट बेस पर पूरा करवाया था। कई बार उन्होंने मड़ीखेड़ा डेम पर रात को स्टे तक किया इसलिए कि तब भी नगर पालिका में निकम्मे अधिकारी मौजूद थे जो नहीं चाहते थे कि ये महती योजना पूरी हो। तत्कालीन नपा के इंजीनियरों ने मड़ीखेड़ा योजना के नाम पर केंद्रीय मंत्री द ग्रेट ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा स्वीकृत करवाई गई करीब 59 करोड़ की राशि तो ठिकाने लगा ली थी लेकिन कोई नहीं जानता था कि पानी कब आएगा।लापरवाही की हद ये थी कि पीएचई ने जिस इंटकवेल का निर्माण इंदौर की फर्म माहेश्वरी से करवाया उसमें निचली सतह पर गेट तक नहीं लगवाए नतीजे में जब साल 2010 में मड़ीखेड़ा डेम पर रेडियल गेट लगे और 2011 में सिंध नदी का पानी डेम भरने लगा तब साथ आई नदी की मिट्टी से इंटकवेल में मिट्टी भर गई। इधर नगर में जनता ने माधव चौक पर जल सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया था, मंत्री यशोधरा राजे फिर आगे आई और जनता को अपने ठोस इरादे से विश्वास में लिया कि वे मड़ीखेड़ा का पानी लाकर रहेंगी और तब उन्होंने तत्कालीन कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव के साथ मिलकर योजना को पूरा करने की ठानी। एक तरफ वन विभाग के अड़ंगे से सालों धूप में सड़ते रहे पाइप योजना में इस्तेमाल किए गए तो दूसरी तरफ इंटकवेल में मिट्टी भरने से ऊपर से पानी करने वाली तीन मोटर इंटकवेल और तीन मोटर सपपवेल के लिए स्पेशल ऑर्डर पर तैयार करवाई गई। आखिर टेस्टिंग के बाद कुल मिलाकर 37 किमी दूर से शिवपुरी शहर को पेयजल आपूर्ति के लिए बनी इस विशेष योजना पर काम लंबे समय तक चलाने और कई तकनीकी बाधाओं के बाद अगस्त 2018 में पहली बार परीक्षण (Trial) के तौर पर शहर में पानी की सप्लाई शुरू की गई थी। सतनबाड़ा स्थित इसके फिल्टर प्लांट की क्षमता 35 MLD है। 
सप्लाई तो शुरू हुई, बार बार फूटी लाइन
मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने अटल इरादे से योजना का पानी तो शहर में लाकर दिया जिससे टैंकर के नाम पर हर साल नपा में होने वाले करोड़ों के घोटाले पर लगाम लगी। साथ ही सड़कों, गलियों में कट्टी लेकर लोग दिखना बंद हुए, निजी टैंकर उद्योग में बदल चुका था उस पर अंकुश लगा लेकिन पानी की टाट से निर्मित मेन लाइन हर दिन फूटने लगी। इसके बाद मंत्री यशोधरा जी ने ही 40 करोड़ की लागत से जी आई पाइप लाइन न सिर्फ स्वीकृत करवाई बल्कि बदलवाई। इधर उनके राजनीतिक ठहराव के चलते नपा ने इंटकवेल और फिल्टर प्लांट की वो मोटर नहीं बदली जो तत्सम्य लगाकर शहर में पानी आया था। जिसके नतीजे आज शहर की आवाम भुगत रही है। कई कई दिन मोटर फूंकने से नगर में पेयजल की सप्लाई नहीं हो रही है। जनता फिर रात का जागरण शुरू कर चुकी है, टैंकर फिर दौड़ने लगे हैं। आज इसी दूरावस्था को दिखाने वार्ड 7 के पार्षद अरविंद ठाकुर सतनवाडा फिल्टर प्लांट पहुंचे थे। अफसोस ये है कि मड़ीखेड़ा पेयजल परियोजना जिस पर दो सो करोड़ धीरे धीरे खर्च हो चुके इसे नगर पालिका ठीक से क्रियान्वित नहीं कर पा रही ? उसका संचालन ठीक सरकारी अंदाज में किया जा रहा है जबकि शिवपुरी की बाग डोर अब देश के सबसे सक्रिय और विकास कार्य में खासी रुचि रखने वाले केंद्रीय मंत्री द ग्रेट ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथ में है। तब आखिर क्यूं मड़ीखेड़ा योजना को ठीक से नहीं चलाया जा रहा। 
उन्हें भी देखना चाहिए जिनकी कनपटी और रहता 24 घटे मोबाइल
जनता का कहना है कि सांसद का कद ऊंचा है। नगर की समस्या नपाध्यक्ष या विधायक को देखनी चहिए लेकिन सभी जानते हैं कि हालात क्या हैं? अब दूसरी तरफ वो नेता है जो केंद्रीय मंत्री के आगमन पर उनके आगे पीछे रहते हैं और द ग्रेट सिंधिया के जाने के बाद उन्हें जनता से कोई सरोकार नहीं रहता। कनपटी पर मोबाइल लगाकर अत्यधिक व्यस्त होने का दिखावा करने वाले आखिर क्यों मड़ीखेड़ा डेम और फिल्टर प्लांट का दौरा नहीं करते ? क्यों नहीं देखते कि जिन इंजीनियरों ने खुद को करोड़ों का आसामी बना लिया है, पूरा शहर मड़ीखेड़ा सप्लाई लाइन के नाम पर खोदकर निपटा डाला है आखिर वे जनता की कसौटी पर खरे क्यों नहीं उतरते। बात कड़वी लगेगी लेकिन साहब ये जनता है जो अच्छों अच्छों की सबक सिखाना जानती है, आज उसे बूंद बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है देखना कहीं आने वाले चुनावों में वो नेताओं का सुपड़ा साफ न कर दे! गुस्ताखी माफ साहेब।













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