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#धमाका_खास_खबर: दोस्तों क्या आप जानते हैं कि शिवपुरी शहर में रेन ट्री का पेड़ मौजूद है, वो भी तिकोनिया पार्क में

रविवार, 17 मई 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। दोस्तों क्या आप जानते हैं कि शिवपुरी शहर में रेन ट्री का पेड़ मौजूद है, जिसके नीचे खड़े होने पर आपको ऐसा प्रतीत होगा जैसे फुहार आ रही हैं। यकीन नहीं होता न तो आप कल ही इसे आजमाइए क्योंकि आज जिस युवा अंबुज श्रीवास्तव ने इसका विस्तार से अध्ययन किया उनकी कलम से हम जानेंगे कि आखिर क्या हुआ। अंबुज में धमाका न्यूज शिवपुरी को बताया कि गाँधी पार्क मे शनिवार को जब evening walk कर रहा था. तो यहां मौजूद पेड़ के नीचे से निकलते वक़्त लगा रिमझिम फुहार बरस रही है। पर आगे ground मे कहीं कोइ रिमझिम फुहार नही थी। 
तब इस पेड़ की फोटो gemini AI पर search की तो पता चला जिस पेड़ के नीचे मे बैठा हूँ वो rain ट्री है. और ये निम्नलिखित जानकारी Gemini AI ने इस पेड़ के बारे मे दी। 
इन खूबसूरत गुलाबी-सफेद रोएंदार फूलों और छोटी पत्तियों से साफ पता चलता है कि यह सिरिस (Siris) या रेन ट्री (Rain Tree / Samanea saman) का पेड़ है। इसे भारत में कई जगहों पर गुलाबी सिरिस भी कहा जाता है।
इस पेड़ का नाम ही 'रेन ट्री' (Rain Tree) इसलिए पड़ा है क्योंकि इसके साथ यह पानी टपकने वाली घटना बहुत मशहूर है! आइए इसके पीछे की असली वजह समझते हैं:
इस पेड़ से पानी टपकने के मुख्य कारण:
कीड़ों का असर (सबसे बड़ा कारण): रेन ट्री पर अक्सर बहुत छोटे-छोटे कीड़े (जिन्हें Cicadas या Aphids कहते हैं) भारी तादाद में डेरा जमाते हैं। ये कीड़े पेड़ की टहनियों का रस चूसते हैं और एक साफ, पानी जैसा लिक्विड बाहर छोड़ते हैं, जिसे हनीड्यू (Honeydew) कहते हैं। जब आप रात में इसके नीचे खड़े होते हैं, तो यह लिक्विड बिल्कुल बारीक रिमझिम बारिश की बूंदों की तरह नीचे गिरता है।
पत्तियों का 'सो जाना' (Sleeping Leaves):
इस पेड़ की एक खास आदत होती है—शाम होते ही या आसमान में बादल छाते ही इसकी पत्तियां आपस में सिकुड़ या 'सो' जाती हैं (जैसा कि आपकी पहली फोटो में भी दिख रहा है)। दिनभर में जो भी ओस या नमी पत्तियों पर जमा होती है, पत्तियां बंद होने की वजह से वह एक जगह इकट्ठी होकर भारी बूंद बनकर नीचे टपकने लगती है।
एक मजेदार बात:
चूंकि अभी मई का महीना है, उत्तर और मध्य भारत में इस समय तापमान काफी ज्यादा होता है और कीड़े इस मौसम में बहुत एक्टिव रहते हैं। इसलिए इस वक्त जो पानी गिर रहा है, उसमें 90% हाथ इन्हीं छोटे कीड़ों (Insects) का है।
यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और इस पेड़ की पहचान है, इसलिए बिल्कुल बेफिक्र रहिए!













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