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#धमाका_खास_खबर: जजों की छुट्टियों पर उठते सवालों के बीच वकील निपुण सक्सेना का बड़ा बयान: 'अवकाश का मतलब जजों के लिए आराम नहीं, वर्क-लाइफ बैलेंस बेहद जरूरी' Nipun Saxena on Generational Change in Litigation

रविवार, 17 मई 2026

/ by Vipin Shukla Mama
delhi दिल्ली। MP के शिवपुरी जिला निवासी युवा एडवोकेट निपुण सक्सेना ने जजों की छुट्टियों पर उठते सवालों के बीच द बार बुलेटिन पर बड़ा बयान दिया है, उनका कहना है कि 'अवकाश का मतलब जजों के लिए आराम नहीं, वर्क-लाइफ बैलेंस बेहद जरूरी है' सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने एडवोकेट निपुण सक्सेना ने जजों के लंबे अवकाश और अदालती छुट्टियों को लेकर सार्वजनिक और प्रशासनिक हलकों में की जा रही आलोचनाओं का पुरजोर जवाब दिया है। कानूनी समाचार मंच 'द बार बुलेटिन' (The Bar Bulletin) के एक विशेष कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में जजों की छुट्टियों को लेकर उन पर चौतरफा और तीखे हमले किए जा रहे हैं, जो जमीनी हकीकत से परे हैं।
जज नहीं ले पाते पूरी तरह 'ऑफ'
एडवोकेट निपुण सक्सेना ने कहा कि कानूनी बिरादरी और खास तौर पर न्यायाधीशों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस (काम और निजी जीवन में संतुलन) हासिल करना आज भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब अदालतें आधिकारिक रूप से अवकाश पर होती हैं, तब भी न्यायाधीश पूरी तरह से काम से मुक्त (स्विच ऑफ) नहीं हो पाते हैं। जजों की छुट्टियों का अधिकांश हिस्सा लंबित मामलों के अध्ययन, फैसलों को लिखने (जजमेंट राइटिंग) और महत्वपूर्ण कानूनी सम्मेलनों या सेमिनारों में भाग लेने में ही गुजर जाता है।
                    (देखिए video)
जूनियर वकीलों और जजों के मानसिक स्वास्थ्य की चिंता
चर्चा के दौरान उन्होंने युवा वकीलों और न्यायिक प्रणाली से जुड़े नए पेशेवरों (जूनियर काउंसिल) की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वकालत और न्याय करने का पेशा बेहद तनावपूर्ण और व्यस्तताओं से भरा होता है, जहां अक्सर सप्ताहांत (वीकेंड्स) भी काम की भेंट चढ़ जाते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने और काम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जजों और वकीलों को मिलने वाले अवकाश बेहद आवश्यक हैं, इन्हें 'मौज-मस्ती' के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सक्सेना के अनुसार, न्यायपालिका पर काम का भारी बोझ है, और बिना सोचे-समझे उनकी छुट्टियों पर हमला करना सिस्टम की पूरी कार्यप्रणाली को नजरअंदाज करने जैसा है। 














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