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#धमाका_डिफरेंट: जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा की मौजूदगी में शिक्षाविद डॉ. शोभा पैठणकर ने समान नागरिक संहिता के लिए किया जन परामर्श, लोग बोले, देश के लिए एक समान कानून जरूरी, लागू किया जाए

सोमवार, 15 जून 2026

/ by Vipin Shukla Mama
शिवपुरी। देश के लिए एक समान कानून की आवश्यकता है और इसे पूरी गंभीरता के साथ सभी पहलुओं का ध्यान रखते हुए लागू किया जाना चाहिए। किसी भी धर्म, जाति से ऊपर उठकर देश हित में एक कानून लागू होना चाहिए। फिर चाहे वह हिंदू हो मुसलमान हो या अन्य समाज। ये कहना था नगर के अनेक लोगों का जिन्होंने समान नागरिक संहिता को लेकर कानून बनाए जाने को लेकर अपनी राय प्रकट की। आज सोमवार को समान नागरिक संहिता के संबंध में जन परामर्श के लिए राज्य शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक शासकीय श्रीमंत माधवराव सिंधिया स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिवपुरी में आयोजित की गई। बैठक में समिति की सदस्य शिक्षाविद डॉ. शोभा पैठणकर ने समान नागरिक संहिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे और संभावित स्वरूप, विभिन्न राज्यों के अनुभव, सामाजिक समरसता तथा नागरिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने बुजर्ग माता पिता की दिन और दिन खराब होती हालत को लेकर कहा कि उन्हें कानूनी मदद का अधिकार है, अगर पीड़ित हैं तो उन्हें कानून से मदद मिल सकती है। 
इसके पूर्व उन्होंने जनता के विभिन्न वर्गों के व्यक्तियों से उनकी राय जानी। बैठक में कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री Arpit Verma IAS, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती गायत्री शर्मा, सीईओ जिला पंचायत श्री विजय राज, सांसद प्रतिनिधि श्री मनीष अग्रवाल तथा अन्य जनप्रतिनिधिगण, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शांति समिति के सदस्यगण, प्रध्यापक, कानूनविद, धर्मगुरु एवं अन्य प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
बीजेपी महिला मोर्चा अध्यक्ष शैलजा बोली बने कानून
बीजेपी महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष शैलजा अमित लवगीकर ने भी अपने विचार प्रकट किए। उन्होंने समान कानून की वकालत की। 
एडवोकेट बोले, मुस्लिम महिलाओं के लिए भी हो कानून
नगर के एडवोकेट भी बैठक में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह डायवोर्स के लिए हिंदू महिलाओं के लिए कानून में स्थान है जिससे वे न्याय प्राप्त कर सकती है उसी तरह मुस्लिम महिलाओं के लिए भी कानून में जगह होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तलाक या पारिवारिक विवाद के समय जब मुस्लिम महिलाएं हमसे कानूनी मदद के लिए गुहार लगाती है तो हम मदद नहीं कर पाते। एक अन्य एडवोकेट साथी ने कहा कि पहले मुस्लिम महिलाओं को तलाक के बाद भरण पोषण का अधिकार था जिसे बाद में बदला गया उसमें पुनः स्थान तय किया जाए।
सांसद प्रतिनिधि मनीष अग्रवाल, भरत अग्रवाल, विनोद पुरी, सूरज जैन, पत्रकार विपिन शुक्ला आदि ने की पैरवी
विचारों की श्रृंखला में अलग अलग अंदाज में उपरोक्त लोगों ने समान नागरिक संहिता को लागू करने की बात कही।
फरमान ने कहा वैसे भी होता है विवाह पंजीयन
पत्रकार फरमान अली ने कहा कि इस कानून को केंद्र सरकार ऊपर से सीधे लागू कर दे इन विचार की आवश्यकता नहीं लगती। फिर भी जहां तक विचार का सवाल है तो मुस्लिम समाज में शादी का पंजीयन काजी जी के पास किया जाता है। आवश्यक हो तो सरकार जानकारी ले सकती है। इसी तरह विवाह 18 और 21 का पालन किया जा रहा है। इस पर 
समिति की सदस्य शिक्षाविद डॉ. शोभा पैठणकर ने कहा कि जब नियम का पालन किया ही जा रहा है तो कानून बनाने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। 
बाल संरक्षण अधिकारी और सदस्य कौरव ने रखे विचार
बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने कहा कि मुस्लिम समाज उनके कानून के हवाले से 16 साल में भी शादी की वकालत करता है, ये बात सही है कि उनके पास दस्तावेज हैं लेकिन हमारी राय में कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। बाल संरक्षण समिति के सदस्य ने कहा कि आजादी के बाद ही कानून बनाया जाना चाहिए था लेकिन देर सही दुरुस्त आए इस कानून को लागू किया जाना चाहिए। 
अनिल उत्साही ने कहा जन जन के बीच जाय सरकार तब कांग्रेस इसके पक्ष में
कांग्रेस नेता अनिल उत्साही ने कहा कि आजादी के बाद से कानून बनते आए हैं। जहां तक इस कानून की बात है तो सरकार जन जन तक जाये। गांव गांव जाकर प्रचार प्रसार कर लोगों को जागरूक कर राय ले और फिर कानून बने तो कांग्रेस साथ है।
कई लोगों ने प्रकट की राय
जन परामर्श के दौरान अनेक लोगों ने अपनी राय प्रकट की। ज्यादातर लोगों ने कानून लागू करने के पक्ष में अपना तर्क रखा। प्रो पल्लवी गोयल ने कहा कि महिलाओं को भी पुरुषों के समान बराबर का कानून बने इसका ध्यान रखा जाए।
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