शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, दतिया के लिए वरदान है सिंध
अटल सागर मड़ीखेड़ा डेम का पानी शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड और दतिया जिले में मुख्य रूप से 93,716 हेक्टेयर (लगभग 98.25 हजार हेक्टेयर) कृषि भूमि की सिंचाई और पेयजल (पीने के पानी) की आपूर्ति के लिए उपयोग किया जाता है। सिंध परियोजना (चरण-II) के तहत इन चारों जिलों के किसानों के लिए ये डेम वरदान है, जिससे रबी और खरीफ फसलों के लिए पानी मिलता है। इसके साथ ही, इस बहुउद्देशीय परियोजना से 60 मेगावाट (20-20 मेगावाट की 3 टरबाइन) जलविद्युत (बिजली) का उत्पादन भी किया जाता है। जल संसाधन विभाग और बिजली उत्पादन कंपनी द्वारा यहाँ स्थापित हाइड्रो पावर प्लांट से हर साल लाखों यूनिट बिजली बनाई जाती है।
पर्यटन:
मानसून के समय जब इसके 10 गेटों में से पानी छोड़ा जाता है, तो नरवर क्षेत्र का यह विहंगम नजारा देखने के लिए ग्वालियर-चंबल संभाग से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुँचते हैं। शुरुआती मानसूनी बारिश के बाद जल संसाधन विभाग का अमला और कंट्रोल रूम 24 घंटे अलर्ट मोड पर है।
तटीय क्षेत्रों को दी चेतावनी:
यदि ऊपरी इलाकों और गुना-अशोकनगर क्षेत्र में भारी बारिश होती है, तो बांध के गेट खोलने का निर्णय कभी भी लिया जा सकता है। प्रशासन ने निचली बस्तियों और सिंध नदी के किनारे बसे गांवों को नदी क्षेत्र से दूर रहने की हिदायत दे दी है।
















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