परीक्षा प्रणाली में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना। NEET परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा।जलवायु व शिक्षा कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्रों और युवाओं का एक विशाल आंदोलन चल रहा है, जिसने 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 'चलो संसद' मार्च के दौरान हिंसक रूप ले लिया। सोनम वांगचुक ने अस्पताल से संदेश दिया है कि जब तक युवाओं के नेताओं को सांसदों से मिलने नहीं दिया जाता, उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी। वहीं, सरकार ने युवाओं से आंदोलन वापस लेने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।
आंदोलन कैसे और क्यों हुआ?
शुरुआत (जून 2026): यह आंदोलन NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत अभिजीत दिपके द्वारा गठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' नामक एक युवा आंदोलन ने की, जिसे SFI और AISA जैसे छात्र संगठनों का भी समर्थन मिला।
भूख हड़ताल:
प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी युवाओं के समर्थन में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।
तनाव की वजह (18-19 जुलाई):
सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया, जिससे युवाओं का गुस्सा और भड़क गया।
20 जुलाई का 'संसद मार्च':
पुलिस की पाबंदियों और धारा 163 (पुरानी धारा 144) लागू होने के बावजूद हजारों युवा संसद भवन की तरफ बढ़े। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स, वॉटर कैनन, आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया, जिसमें कई छात्र घायल हो गए। संसद के दोनों सदनों को भी इस हंगामे के चलते स्थगित करना पड़ा।
युवाओं की मुख्य मांगें क्या हैं?
युवाओं के प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मिलकर अपनी लिखित मांगें सौंपी हैं:
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा:
NEET पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की जा रही है।
सोनम वांगचुक की रिहाई:
अस्पताल में हिरासत में रखे गए कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा किया जाए।
मुआवजे की मांग:
परीक्षा में हुई धांधली और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले NEET अभ्यर्थियों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
शिक्षा तंत्र में सुधार:
देश की सभी राष्ट्रीय परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए एग्जाम मेनिफेस्टो लागू करने और व्यापक सुधार करने की मांग की है।
वर्तमान स्थिति:
















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